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Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Now the heart of the patient and the patient's BP will also eat ghee

अब हृदय रोगी और बीपी के मरीज भी खा सकेंगे घी

Wed, 25 May 2016 12:01 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला Updated Wed, 25 May 2016 12:01 AM IST
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अब हृदयरोगी और बीपी के मरीज भी घी का स्वाद चख सकेंगे। इससे न केवल उसके शरीर का कॉलेस्ट्रोल कम होगा,  बल्कि भविष्य में हृदय रोग, एनजाइना, उच्च रक्तचाप व पेट से संबंधित रोगों से भी निजात मिलेगी। दरअसल एनडीआरआई के वैज्ञानिकों ने हर्बल घी की टेक्नोलॉजी तैयार की है जो हृदय रोग से पीड़ित व्यक्ति के लिए रामबाण औषधि का कार्य करेगा। इस घी में अर्जुन पेड़ की छाल भी मिलाई गई है, जो न्यूट्रिशन की कमी को पूरा करेगी।  

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कैसे बना और क्या हैं फायदे
एनडीआरआई के वैज्ञानिकों ने बताया अर्जुन हर्बल घी का इस्तेमाल हार्ट और बीपी के मरीज सामान्य रूप से कर सकते हैं और इसे खाने से मनुष्य की पाचन क्रिया भी ठीक रहती है। उन्होंने बताया कि अर्जुन हर्बल घी बनाने में इसका फ्लेवर और टेस्ट सामान्य घी की तरह रखना एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि इसमें अर्जुन नामक पेड़ की छाल मिलाई जाती है और जिसकी वजह से इसका टेस्ट बदल जाता था, लेकिन संस्थान के वैज्ञानिकों ने शोध के माध्यम से अर्जुन हर्बल घी का टेस्ट और फ्लेवर सामान्य घी की तरह ही तैयार कर दिखाया है। उन्होंने बताया कि अर्जुन हर्बल घी फंक्शनल फूड के साथ-साथ न्यूट्रिशन की कमी को भी पूरा करता है।
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30 से 35 आयु वर्ग के हो रहे हृदय रोग के शिकार
वैज्ञानिकों ने बताया कि पहले हृदय की समस्या 40 से 50 की आयु के लोगों में होती थी, लेकिन आजकल यह 30 से 35 के आयु वर्ग वाले युवाओं को भी होने लगी है। इस समस्या को देखते हुए संस्थान के वैज्ञानिकों ने इस दिशा में काम करना शुरू किया और अर्जुन हर्बल घी की तकनीक विकसित की। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस घी को हार्ट व बीपी के मरीज में सामान्य मात्रा में ले सकते हैं।
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एनडीआरआई के निदेशक डॉ. एके श्रीवास्तव ने बताया कि संस्थान के वैज्ञानिक लगातार नई नई टेक्नोलॉजी विकसित कर रहे हैं और इन तकनीकों को डेयरी उद्योगों को हस्तांतरित करके युवाओं को स्वरोजगार के अवसर भी प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अर्जुन हर्बल घी की तकनीक डेयरी टेक्नोलॉजी विभाग के वैज्ञानिकों ने विकसित की है। डॉ. श्रीवास्तव ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में 16 टेक्नोलॉजी डेयरी इंडस्ट्री को हस्तांतरित की हैं। 

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