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Karnal News: अब सल्फर से सुधारी जाएगी क्षारीय भूमि की सेहत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 31 Oct 2023 02:17 AM IST
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Now the health of alkaline soil will be improved with sulfurNow the health of alkaline soil will be improved with sulfur
- क्षारीय भूमि सुधार के लिए अभी सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है जिप्सम
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- राजस्थान के खदानों से निकलने वाले जिप्सम की लगातार होती जा रही कमी के चलते वैज्ञानिक कई सालों से कर रहे थे विकल्प की खोज
- छह साल की शोध के बाद सीएसएसआरआई ने विकसित की सल्फर आधारित मृदा सुधार तकनीक
- इस तकनीक से अब बढ़ते लवण के कारण बंजर हो रही भूमि पर फिर से लहलहाएंगी फसलें
देव शर्मा

करनाल। अब सल्फर से देश की क्षारीय भूमि की सेहत सुधारी जाएगी। छह साल के शोध के बाद केंद्रीय मृदा एवं लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई) करनाल ने सल्फर आधारित मृदा सुधार तकनीक विकसित कर ली है। अभी तक सुधार के लिए जिस जिप्सम का उपयोग होता है, वह राजस्थान के खदानों से निकलता है, लेकिन इसकी लगातार कमी होती जा रही है। जिसके चलते कई वर्षों से वैज्ञानिक इसका विकल्प खोज रहे थे। खास बात ये है कि ये सल्फर पेट्रोलियम रिफाइनरी से निकलने वाले गैसों से तैयार किया जाएगा। इस तकनीक से अब बढ़ते लवण के कारण बंजर हो रही भूमि पर फिर से फसलें लहलहाएंगी।
केंद्रीय मृदा एवं लवणता अनुसंधान संस्थान के फसल एवं मृदा सुधार विभाग के अध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार रॉय ने बताया कि संस्थान कई वर्षों से क्षारीय एवं लवणीय भूमि के सुधार के लिए कार्य कर रहा है। इसके लिए कई तकनीक विकसित की गईं हैं। क्षारीय भूमि के सुधार के लिए जिप्सम तकनीक अपनाई जा रही है, लेकिन अब जिप्सम की कमी देखी जाने लगी है। शुद्ध जिप्सम भी मिलना मुश्किल होता जा रहा है।
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अभी देश में 3.78 लाख हेक्टेयर भूमि क्षारीयता से प्रभावित है। जिस भूमि का पीएच मान 8.3 से अधिक हो जाता है, उसे क्षारीय भूमि माना जाता है। इसके अतिरिक्त क्षारीय जल के प्रयोग से फसलों का उत्पादन धीरे-धीरे गिरता जाता है, 10 से 15 सालों में ये स्थिति हो जाती है, उस भूमि में फसलों की पैदावार बंद हो जाती है। भूमि बंजर होने लगती है। आखिर, सीएसएसआरआई के वैज्ञानिकों ने इसका विकल्प तैयार करने पर शोध कार्य शुरू किया। ये शोध कार्य सीएसएसआरआई ने रिलायंस इंडस्ट्री के साथ मिलकर शुरू किया था। छह साल की कड़ी मेहनत और अनुसंधान के बाद अब संस्थान ने सल्फर आधारित मृदा सुधार तकनीक को तैयार कर लिया है।
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पेट्रोलियम रिफाइनरी से निष्प्रयोज्य गैसों से निकलेगा सल्फर
इस तकनीक में उपयोग होने वाला सल्फर पेट्रोलियम रिफाइनरी से प्राप्त किया जाता है। जो निष्प्रयोज्य होता है। इससे जो गैसें निकलती हैं, उसे एक प्रक्रिया से गुजार कर सल्फर निकाला जाएगा। इस तकनीक को विकसित करने में रिलायंस इंडस्ट्री भी सहयोगी रही है। रिलायंस के अपने पेट्रोलियम रिफाइनरी भी हैं, जिससे सल्फर आसानी से तैयार किया जा सकेगा। इसका बड़ा फायदा क्षारीय भूमि में सुधार तो है ही, दूसरा सबसे बड़ा फायदा ये भी होगा कि ये गैसों से प्रदूषण भी कम होगा।

देश के बड़े भूभाग को फिर से बनाया जा सकेगा उपजाऊ : डॉ. रॉय
सल्फर आधारित मृदा सुधार तकनीक के परिणामों के लिए सीएसएसआरआई के साथ-साथ हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान में कई स्थानों पर अध्ययन किया गया। इतना ही नहीं, इसका उपयोग विभिन्न फसलों जैसे धान, गेहूं, कपास, बरसीम आदि पर भी किया गया। इस तकनीक को अपनाने के बाद भूमि में आठ से 225 प्रतिशत तक की वृद्धि पाई गई है। ये परिणाम शोध की दुनिया में काफी उत्साहजनक है। इस तकनीक का प्रयोग करके देश के एक बड़े भूभाग को फिर से उपजाऊ बनाया जा सकेगा। जिसमें फसलों की पैदावार होगी और देश का खाद्यान्न बढ़ेगा।
- डॉ. अरविंद कुमार रॉय, अध्यक्ष, फसल एवं मृदा सुधार विभाग, सीएसएसआरआई करनाल
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