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Karnal News: कल से चार माह तक नहीं होंगे शुभकार्य
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- मान्यता के अनुसार देवशयनी एकादशी पर योग निद्रा में चले जाते हैं भगवान विष्णु
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। देवशयनी एकादशी को भगवान विष्णु की पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दिन दान, उपासना, उपवास व अन्य शुभ कार्य करने से प्रभु की असीम कृपा मिलती है। यही नहीं देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद भी श्रद्धालुओं पर बना रहता है। ये व्रत इस बार रविवार को रखा जाएगा। इसी दिन से चार माह के लिए शुभ कार्य वर्जित हो जाएंगे।
श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री के बताया कि पंचांग के मुताबिक आषाढ़ शुक्ल एकादशी पर देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन से चातुर्मास भी शुरू हो जाता है, जिसमें भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान सृष्टि का संचालन भोले नाथ के हाथों में चला जाता है। चूंकि श्रीहरि योग निद्रा में होते हैं, इसलिए शादी, विवाह, मुंडन समेत अन्य शुभ कार्य करने की मनाही होती है। पंडित विनोद के अनुसार इस वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत पांच जुलाई को शाम छह बजकर 58 मिनट पर होगी। तिथि का समापन छह जुलाई को शाम नौ बजकर 14 मिनट पर है। इसलिए देवशयनी एकादशी का व्रत 6 जुलाई 2025 के दिन रखा जाएगा।
देवशयनी एकादशी के शुभ मुहूर्त-
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह चार बजकर आठ मिनट से चार बजकर 48 मिनट तक।
विजय मुहूर्त : दोपहर दो बजकर 45 मिनट से तीन बजकर 40 मिनट तक।
अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12 बजकर एक मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक।
निशिता मुहूर्त : रात 12 बजकर छह मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक।
अमृतकाल : दोपहर 12 बजकर 51 मिनट से दो बजकर 38 मिनट तक।
(इस दिन विशाखा नक्षत्र बन रहा है, जो रात 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा रात नौ बजकर 26 मिनट तक साध्य योग का संयोग रहेगा)
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। देवशयनी एकादशी को भगवान विष्णु की पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दिन दान, उपासना, उपवास व अन्य शुभ कार्य करने से प्रभु की असीम कृपा मिलती है। यही नहीं देवी लक्ष्मी का आशीर्वाद भी श्रद्धालुओं पर बना रहता है। ये व्रत इस बार रविवार को रखा जाएगा। इसी दिन से चार माह के लिए शुभ कार्य वर्जित हो जाएंगे।
श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री के बताया कि पंचांग के मुताबिक आषाढ़ शुक्ल एकादशी पर देवशयनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन से चातुर्मास भी शुरू हो जाता है, जिसमें भगवान विष्णु चार माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इस दौरान सृष्टि का संचालन भोले नाथ के हाथों में चला जाता है। चूंकि श्रीहरि योग निद्रा में होते हैं, इसलिए शादी, विवाह, मुंडन समेत अन्य शुभ कार्य करने की मनाही होती है। पंडित विनोद के अनुसार इस वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत पांच जुलाई को शाम छह बजकर 58 मिनट पर होगी। तिथि का समापन छह जुलाई को शाम नौ बजकर 14 मिनट पर है। इसलिए देवशयनी एकादशी का व्रत 6 जुलाई 2025 के दिन रखा जाएगा।
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देवशयनी एकादशी के शुभ मुहूर्त-
ब्रह्म मुहूर्त : सुबह चार बजकर आठ मिनट से चार बजकर 48 मिनट तक।
विजय मुहूर्त : दोपहर दो बजकर 45 मिनट से तीन बजकर 40 मिनट तक।
अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12 बजकर एक मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक।
निशिता मुहूर्त : रात 12 बजकर छह मिनट से 12 बजकर 46 मिनट तक।
अमृतकाल : दोपहर 12 बजकर 51 मिनट से दो बजकर 38 मिनट तक।
(इस दिन विशाखा नक्षत्र बन रहा है, जो रात 10 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा रात नौ बजकर 26 मिनट तक साध्य योग का संयोग रहेगा)