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Karnal News: क्लब फुट बीमारी की चपेट में नवजात, करनाल तीसरे स्थान पर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 30 Oct 2023 02:47 AM IST
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Newborns in the grip of club foot disease, Karnal is at third place.
- प्रदेश में यमुनानगर पहले स्थान पर, डॉक्टर बोले, इस बीमारी का अब तक नहीं मिला स्पष्ट कारण
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। नवजात बच्चे क्लब फुट (टेढे-मेढ़े पैर) बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। प्रदेश में क्लब फुट से पीड़ित बच्चों की बात करें तो 2020 से अब तक यह आंकड़ा 915 पर पहुंच चुका है। वहीं, इस बीमारी की बात करें तो 139 बच्चों के साथ यमुनानगर पहले, 96 बच्चों के साथ नूंह दूसरे और 91 बच्चों के साथ करनाल तीसरे स्थान पर है। ऐसे में डॉक्टरों के लिए यह चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि क्लब फुट के कारण अब तक अज्ञात हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ ने बताया कि कई बार गर्भाशय में भ्रूण को पर्याप्त जगह न मिलने के कारण भी यह समस्या आ सकती है, लेकिन यह समस्या का प्रमुख कारण नहीं है।
क्या है क्लब फुट
डीईआईसी की प्रभारी अर्चना ने बताया कि क्लब फुट एक जन्मजात दोष है जो पूरी तरह से उपचार योग्य है, जिसमें एक या दोनों पैर अंदर की ओर मुड़े हाेते हैं। क्लब फुट 800 नवजात में से एक के जीवन को प्रभावित करता है। प्रत्येक वर्ष क्लब फुट वाले 33 हजार बच्चे भारत में पैदा होते हैं। पूर्ण इलाज के बाद क्लब फुट के साथ पैदा हुआ बच्चा अन्य सामान्य बच्चों की तरह सब कुछ कर सकता है। क्लब फुट का इलाज पोनसेटी विधि से किया जा रहा है। इसमें कास्टिंग, टेनोटॉमी व ब्रेसिंग शामिल हैं।
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सहयोग कर रही अनुष्का फाउंडेशन
अनुष्का फाउंडेशन की जिला कार्यक्रम अधिकारी सुजाता सैनी ने बताया कि नागरिक अस्पताल के डीईआईसी केंद्र के माध्यम से क्लब फुट का निशुल्क इलाज करवाया जा रहा है। जिसमें अनुष्का फाउंडेशन के हरियाणा सहित नौ राज्यों में 128 स्थापित केंद्र क्लब फुट से पीड़ित बच्चों का इलाज करवाने में निशुल्क ब्रेस शू उपलब्ध करवा रहे हैं। जिससे क्लब फुट यानी जन्मजात टेडे-मेढ़े पैर से पीड़ित बच्चा सामान्य बच्चों की तरह चल-फिर सकें। इन नौ राज्यों में गुजरात में छह, हरियाणा में 16, हिमाचल प्रदेश में सात, उत्तर प्रदेश में 75, मध्य प्रदेश में नौ, महाराष्ट्र में पांच, मिजोरम में एक, नागालैंड में एक, त्रिपुरा में आठ केंद्र शामिल हैं।
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प्रदेश के 16 जिलों में 915 बच्चों का चल रहा इलाज
अंबाला में 63, चरखी दादरी में 10, फतेहाबाद में 19, झज्जर में 20, जींद में 82, कैथल में 42, करनाल में 91, कुरुक्षेत्र में 77, नारनौल में 28, नूह में 96, पलवल में 46, पानीपत में 63, रेवाड़ी में 37, सिरसा में 48, सोनीपत में 54 व यमुनानगर में 139 बच्चे शामिल हैं।
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