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Karnal News: जौ की नई किस्में भविष्य में बढ़ाएंगी पोषण और पैदावार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 12 May 2025 02:49 AM IST
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New varieties of barley will increase nutrition and yield in the future
देव शर्मा
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करनाल। जौ की नई किस्में भविष्य में पोषण बढ़ाएंगी। इसके लिए देशभर में छिलकारहित जौ की 45 नई किस्मों पर अनुसंधान चल रहा है। वैज्ञानिकों का प्रयास है कि इनमें उच्च पैदावार के साथ-साथ औषधीय गुण भी पहले से अधिक हों।
अब तक देश में सर्वाधिक प्रचलित छिलका रहित जौ किस्मों में 2020 में रिलीज हुई पीएल-891 शामिल है, जिसे पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना ने विकसित किया था।
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इसके अलावा, एनबी-5 को वर्ष 2009 में आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय, फैजाबाद और वर्ष 1991 में रिलीज हुई गीतांजलि किस्म को चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय, कानपुर ने तैयार किया था। इसी प्रकार, भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर), करनाल से विकसित कर्ण-16 किस्म को वर्ष 1987 में केंद्रीय किस्म रिलीज समिति ने स्वीकृत किया था। इन सभी किस्मों की विशेषता यह रही कि ये छिलका रहित थीं और किसानों की पसंद बनी रहीं, ये सभी किस्में रतुआ (रस्ट) रोग के प्रति संवेदनशील थीं। करीब 37 साल बाद, अब आईआईडब्ल्यूबीआर करनाल ने वर्ष 2025 में डीडब्ल्यूआरबी-223 नामक नई छिलका रहित किस्म विकसित की है।
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यह किस्म अब तक की सभी किस्मों में सर्वाधिक, 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर औसत उपज देती है और 64 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की अधिकतम उत्पादन क्षमता रखती है। डीडब्ल्यूआरबी-223 किस्म रतुआ (रस्ट) रोग के प्रति प्रतिरोधी है। इसमें प्रोटीन 12 प्रतिशत, आयरन 44 पीपीएम, और जिंक 48 पीपीएम की उच्च मात्रा पाई जाती है। आईआईडब्ल्यूबीआर करनाल के अखिल भारतीय समन्वयित जौ सुधार कार्यक्रम के प्रधान अनुसंधानकर्ता डॉ. ओमबीर सिंह ने बताया कि वर्तमान में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और अनुसंधान संस्थानों में छिलका रहित जौ की नई किस्मों को विकसित करने का काम चल रहा है। इन किस्मों पर लगातार परीक्षण (ट्रायल) किए जा रहे हैं और उन्हें अधिक पैदावार और पौष्टिकता के मानकों पर परखा जा रहा है। इस कार्य में आईआईडब्ल्यूबीआर करनाल, राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान जयपुर और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं। इन प्रयोगों में कर्ण-16, गीतांजलि और डीडब्ल्यूआरबी-223 को मानक (स्टैंडर्ड) किस्मों के रूप में लिया गया है। फिलहाल 36 प्रविष्टियों (एंट्रीज़) का पहला ट्रायल तथा 9 प्रविष्टियों का दूसरा और तीसरा ट्रायल किया जा रहा है।
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