{"_id":"5d83e81a8ebc3e012d67fabf","slug":"ndri-karnal-karnal-news-knl56768139","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"एनडीआरआई करनाल में बरेली और हिसार के वैज्ञानिकों ने संभाला मोर्चा, भैंसों की मौतों की जांच करेंगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनडीआरआई करनाल में बरेली और हिसार के वैज्ञानिकों ने संभाला मोर्चा, भैंसों की मौतों की जांच करेंगे
Fri, 20 Sep 2019 01:11 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करनाल(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, करनाल(हरियाणा)
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 20 Sep 2019 01:11 PM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) के पशुधन अनुसंधान केंद्र में पशुओं की संदिग्ध रूप से हो रही मौत के कारणों की जांच लेकर तीन बड़े संस्थानों की टीमों के हाथ भी खाली हैं। किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच पाने के कारण वीरवार को इन्हीं संस्थानों के सर्वोच्च विशेषज्ञ बुलाए गए। लाला लाजपत राय वेटरनरी यूनिवर्सिटी हिसार (लुवास) की विशेष टीम जांच के लिए पहुंची है। लुवास के विशेषज्ञ डॉ. आरएस बिसला और एपीडीमोलॉजिस्ट डॉ. नरेश जिंदल भी एनडीआरआई पहुंचे।
पशुपालन विभाग हरियाणा के संयुक्त निदेशक डॉ. ओपी छिक्कारा व विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजबीर वत्स ने भी स्थिति का जायजा लिया। साथ ही इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट बरेली से वीरवार को दो और विशेषज्ञ जांच के लिए पहुंचे। संस्थान का दावा है कि बुधवार की शाम के बाद किसी पशु की मौत नहीं हुई है। ऐहतियात के तौर पर कैटल यार्ड के आसपास गहन सफाई अभियान चलाया गया। करनाल के डीसी विनय प्रताप सिंह ने भी एनडीआरआई के निदेशक डॉ. आरआरबी सिंह से बात कर स्थिति जानी है। उधर, पांच मृत पशुओं का पोस्टमार्टम करवाया गया और यार्ड में पशुओं के रक्त के दोबारा से सैंपल लिए गए हैं। अभी तक पहले वाले सैंपलों की रिपोर्ट भी नहीं आई है।
एनडीआरआई के कैटल यार्ड में 11 सितंबर से लगातार मुर्राह नस्ल की भैंसों व चार कटड़ियों की मौत हो गई थी। संस्थान ने 43 पशुओं की मौत की पुष्टि की थी। आशंका जताई गई थी कि ज्यादा पशुओं की मौत हुई है। लुवास-हिसार, आईवीआरआई-बरेली और एनडीआरआई के विशेषज्ञों की टीमें जांच में जुटी, लेकिन मौत के कारण सामने नहीं आ सके। इस स्थिति ने विज्ञान जगत के माथे पर सिकन पैदा की और चुनौती खड़ी कर दी। पशुओं की मौत को रोकना वैज्ञानिकों के लिए चुनौती बना हुआ है। वीरवार को कैटल यार्ड में किसी पशु की मौत नहीं हुई।
विज्ञापन
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजबीर वत्स ने कहा कि एनडीआरआई के पशुओं को गलघोटू, मुंह खुर इत्यादि बीमारियों से बचाव के नियमित रूप से कदम उठाए गए। कहीं भी कोई कमी नजर नहीं आई। बुधवार से वह संस्थान के संपर्क में हैं। सर्वोच्च वैज्ञानिकों को बुलाया गया है। उन्होंने दावा किया कि स्थिति नियंत्रित करने में जल्द सफलता मिलेगी।
विज्ञापन
पशुपालन विभाग हरियाणा के संयुक्त निदेशक डॉ. ओपी छिक्कारा व विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजबीर वत्स ने भी स्थिति का जायजा लिया। साथ ही इंडियन वेटरनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट बरेली से वीरवार को दो और विशेषज्ञ जांच के लिए पहुंचे। संस्थान का दावा है कि बुधवार की शाम के बाद किसी पशु की मौत नहीं हुई है। ऐहतियात के तौर पर कैटल यार्ड के आसपास गहन सफाई अभियान चलाया गया। करनाल के डीसी विनय प्रताप सिंह ने भी एनडीआरआई के निदेशक डॉ. आरआरबी सिंह से बात कर स्थिति जानी है। उधर, पांच मृत पशुओं का पोस्टमार्टम करवाया गया और यार्ड में पशुओं के रक्त के दोबारा से सैंपल लिए गए हैं। अभी तक पहले वाले सैंपलों की रिपोर्ट भी नहीं आई है।
विज्ञापन
एनडीआरआई के कैटल यार्ड में 11 सितंबर से लगातार मुर्राह नस्ल की भैंसों व चार कटड़ियों की मौत हो गई थी। संस्थान ने 43 पशुओं की मौत की पुष्टि की थी। आशंका जताई गई थी कि ज्यादा पशुओं की मौत हुई है। लुवास-हिसार, आईवीआरआई-बरेली और एनडीआरआई के विशेषज्ञों की टीमें जांच में जुटी, लेकिन मौत के कारण सामने नहीं आ सके। इस स्थिति ने विज्ञान जगत के माथे पर सिकन पैदा की और चुनौती खड़ी कर दी। पशुओं की मौत को रोकना वैज्ञानिकों के लिए चुनौती बना हुआ है। वीरवार को कैटल यार्ड में किसी पशु की मौत नहीं हुई।
विज्ञापन
पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. राजबीर वत्स ने कहा कि एनडीआरआई के पशुओं को गलघोटू, मुंह खुर इत्यादि बीमारियों से बचाव के नियमित रूप से कदम उठाए गए। कहीं भी कोई कमी नजर नहीं आई। बुधवार से वह संस्थान के संपर्क में हैं। सर्वोच्च वैज्ञानिकों को बुलाया गया है। उन्होंने दावा किया कि स्थिति नियंत्रित करने में जल्द सफलता मिलेगी।