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अदालत ने नायब तहसीलदार की सरकारी गाड़ी की जब्त
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असंध। गलत तरीके से स्टांप ड्यूटी लगाकर जमीन की रजिस्टरी करने के मामले में असंध कोर्ट ने नायब तहसीलदार की सरकारी गाड़ी को जब्त कर लिया है। पैसे जमा करवाने के बाद ही गाड़ी को छोड़ने के आदेश दिए गए हैं। अगर 10 जनवरी तक नायब तहसीलदार या सरकार ने पैसे जमा नहीं करवाए तो गाड़ी को नीलाम कर किसान को पैसे दिए जाएंगे।
एडवोकेट सोमदत्त शर्मा ने बताया कि बेगमपुर (पानीपत) वासी किसान हुकमचंद की जमीन 2008 में हरियाणा स्टेट इंडस्टीज एरिया में एक्वायर की गई थी। जिसमें स्टांप ड्यूटी की छूट सरकार की ओर से किसानों को दी गई थी। जिसके लिए पानीपत के राजस्व अधिकारी ने छूट के पात्र होने का प्रमाण पत्र भी जारी किया था। जिसके बाद किसान ने सब तहसील बल्ला के अंतर्गत बाल पबाना गांव में जमीन लेनी तय की। उस दौरान (2017) बल्ला सब तहसील में नायब तहसीलदार गोपीचंद ने उस सर्टिफिकेट को दरकिनार करते हुए स्टांप ड्यूटी लगाकर रजिस्टरी करवा दी। इसके बाद किसान हुक्कमचंद ने स्टेट हरियाणा के खिलाफ अदालत में केस दायर किया। जिसके बाद लगातार तारीख लगती रही।
सोहन लाल मलिक की अदालत में पांच मार्च 2019 को किसान के फेवर में फैसला सुनाते हुए प्रदेश सरकार या नायब तहसीलदार को स्टांप ड्यूटी व अन्य खर्च (404359) छह प्रतिशत के ब्याज सहित किसान को देने का आदेश दिया था, लेकिन इसके बाद भी केस में इजरा दायर किया गया। दोनों पार्टियों के ऑब्जेक्शन लगातार आते रहे। एडवोकेट ने बताया कि रकम जमा न करवाने पर दो दिसंबर को अदालत में सरकारी संपत्ति को कुर्क कर किसान को पैसे देने की दरख्वास्त लगाई। जिसमें सरकारी गाड़ी का विवरण दिया गया। जिसके बाद जज सुनील कुमार जूनियर डिवीजन की ओर से 23 दिसंबर को संपति कुर्क करने के आदेश दे दिए। आदेश के बाद पॉजिशन वारंट जारी करते हुए अब गाड़ी को कब्जे में लिया गया। गाड़ी को न्यायालय में खड़ा कर लिया गया। जिसके बाद 10 जनवरी 2022 को अनुमानित राशि 5 लाख 50 हजार रुपये अगर किसान को नहीं दिए जाते हैं तो गाड़ी कुर्क कर दी जाएगी। मामले में एसडीएम मनदीप सिंह का कहना है कि न्यायालय के आदेशों का पालन किया जाएगा, जो भी आगामी आदेश होंगे वह मान्य होंगे।
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एडवोकेट सोमदत्त शर्मा ने बताया कि बेगमपुर (पानीपत) वासी किसान हुकमचंद की जमीन 2008 में हरियाणा स्टेट इंडस्टीज एरिया में एक्वायर की गई थी। जिसमें स्टांप ड्यूटी की छूट सरकार की ओर से किसानों को दी गई थी। जिसके लिए पानीपत के राजस्व अधिकारी ने छूट के पात्र होने का प्रमाण पत्र भी जारी किया था। जिसके बाद किसान ने सब तहसील बल्ला के अंतर्गत बाल पबाना गांव में जमीन लेनी तय की। उस दौरान (2017) बल्ला सब तहसील में नायब तहसीलदार गोपीचंद ने उस सर्टिफिकेट को दरकिनार करते हुए स्टांप ड्यूटी लगाकर रजिस्टरी करवा दी। इसके बाद किसान हुक्कमचंद ने स्टेट हरियाणा के खिलाफ अदालत में केस दायर किया। जिसके बाद लगातार तारीख लगती रही।
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सोहन लाल मलिक की अदालत में पांच मार्च 2019 को किसान के फेवर में फैसला सुनाते हुए प्रदेश सरकार या नायब तहसीलदार को स्टांप ड्यूटी व अन्य खर्च (404359) छह प्रतिशत के ब्याज सहित किसान को देने का आदेश दिया था, लेकिन इसके बाद भी केस में इजरा दायर किया गया। दोनों पार्टियों के ऑब्जेक्शन लगातार आते रहे। एडवोकेट ने बताया कि रकम जमा न करवाने पर दो दिसंबर को अदालत में सरकारी संपत्ति को कुर्क कर किसान को पैसे देने की दरख्वास्त लगाई। जिसमें सरकारी गाड़ी का विवरण दिया गया। जिसके बाद जज सुनील कुमार जूनियर डिवीजन की ओर से 23 दिसंबर को संपति कुर्क करने के आदेश दे दिए। आदेश के बाद पॉजिशन वारंट जारी करते हुए अब गाड़ी को कब्जे में लिया गया। गाड़ी को न्यायालय में खड़ा कर लिया गया। जिसके बाद 10 जनवरी 2022 को अनुमानित राशि 5 लाख 50 हजार रुपये अगर किसान को नहीं दिए जाते हैं तो गाड़ी कुर्क कर दी जाएगी। मामले में एसडीएम मनदीप सिंह का कहना है कि न्यायालय के आदेशों का पालन किया जाएगा, जो भी आगामी आदेश होंगे वह मान्य होंगे।
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