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Karnal News: छह करोड़ जारी पर कागजों में कैद जच्चा-बच्चा अस्पताल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 05 Aug 2024 06:50 AM IST
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Mother-child hospital imprisoned in papers on release of Rs. 6 crores
छह करोड़ जारी पर कागजों में कैद जच्चा-बच्चा अस्पताल
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पांच माह बाद भी मुख्यालय में प्रशासनिक अनुमति की बाट जोह रही फाइल
निर्माण के बाद शहर ही नहीं पूरे जिले के लोगों को होगा फायदा

कमल बहल
कैथल। प्रदेश सरकार की ओर से छह करोड़ रुपये की राशि जारी करने के बावजूद पुराना अस्पताल परिसर का निर्माण कार्य कागजों से बाहर नहीं निकला है। फिलहाल इससे संबंधित फाइल मुख्यालय में प्रशासनिक अनुमति की बाट जो रही है। ऐसे में बजट जारी होने के पांच माह बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
गौरतलब है कि प्रदेश सरकार ने करीब डेढ़ साल पहले ही सिरसा और कैथल अस्पताल में 100 बेड के जच्चा-बच्चा अस्पताल निर्माण की घोषणा की थी। इसके बाद बीते फरवरी माह में छह करोड़ रुपये की राशि भी जारी की गई थी, लेकिन जच्चा-बच्चा अस्पताल के निर्माण की फाइल इस समय स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय में ही पड़ी है। वहां से प्रशासनिक अनुमति मिलने के बाद ही लोक निर्माण विभाग की ओर से अस्पताल का नक्शा बनाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। शहर के पुराना अस्पताल में बनने वाले जच्चा-बच्चा अस्पताल का निर्माण होने के बाद केवल शहर ही नहीं, बल्कि पूरे जिले के लोगों को फायदा होगा। इसमें बच्चों की बीमारियों का इलाज करने के लिए अलग से बाल रोग विशेषज्ञों की टीम को तैनात किया जाएगा। बता दें कि इस समय कैथल या इसके आस-पास स्थित कोई भी सरकारी जच्चा-बच्चा अस्पताल नहीं है। केवल पंजाब के पटियाला में यह अस्पताल है। ऐसे में जिले के लोगों को पटियाला तक का करीब 60 किलोमीटर का सफर बच्चों की बीमारियों का इलाज करवाने के लिए जाना पड़ता है। कैथल में जच्चा-बच्चा अस्पताल की घोषणा से क्षेत्रवासियों में आस जगी थी, लेकिन अभी इसके लिए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
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पुराने अस्पताल का भवन हो चुका है जर्जर-
शहर में स्थित पुराने अस्पताल का भवन इस समय जर्जर हो चुका है। इस भवन में कुछ समय पहले स्वास्थ्य विभाग का वेयर हाउस, शहरी स्वास्थ्य केंद्र व प्रसूति केंद्र चलाया जा रहा था। अब इसे शिफ्ट किया जा चुका है। गौरतलब है कि इस समय जिला नागरिक अस्पताल 200 बेड का है। इसके अलावा कोरोना महामारी को लेकर 100 बेड का पोर्टेबल अस्पताल भी बनाया गया है। जच्चा-बच्चा अस्पताल बनने के बाद शहर में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के तहत कुल 400 बेड के अस्पताल बन जाएंगे। इस समय स्वास्थ्य विभाग में बच्चों के लिए एकमात्र बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक हैं, जो प्रतिदिन 100 से 120 बच्चों की जांच करते हैं।
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ये मिलनी हैं सुविधाएं
जच्चा-बच्चा केंद्र अस्पताल के निर्माण के बाद यहां पर निकु वार्ड अलग से बनाया जाएगा। इसके साथ ही रोहतक व चंडीगढ़ पीजीआई की तर्ज पर यहां बच्चों के इलाज की सुविधाएं मिल सकेंगी। इसके लिए यहां पर अलग से बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति भी होगी। यहां गर्भवती महिलाओं की जांच और डिलीवरी भी सुलभ हो सकेगी। शहर वासियों को घर के नजदीक ही इलाज की बेहतर सुविधा मिल सकेगी।



पुराना अस्पताल परिसर में बनने वाले जच्चा-बच्चा अस्पताल के निर्माण की प्रशासनिक अनुमति के लिए मुख्यालय में फाइल भेजी गई है। इसके बाद ही अस्पताल का नक्शा बनाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। नक्शा बनने के बाद वापस यह फाइल सिविल सर्जन कार्यालय में पहुंचेगी। इसके बाद लोनिवि की ओर से निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसको लेकर आला अधिकारियों से पत्राचार किया गया है।

- डॉ. रेनू चावला, सिविल सर्जन, कैथल।
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