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जच्चा बच्चा की मौत, डाक्टर पर लापरवाही का आरोप
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हाइवे के सर्विस रोड पर स्थित भगवती चंद्र मेमोरियल हॉस्पिटल में डिलीवरी के दौरान जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। इससे नाराज परिजनों ने डाक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा किया। गुस्साए परिजनों ने करीब चार घंटे तक शव को अस्पताल से नहीं उठाया। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस को परिजनों ने लिखित में शिकायत भी दी। पुलिस की ओर से कार्रवाई के आश्वासन पर परिजन शव उठाने को तैयार हुए।
हनुमान मंदिर इलाके की निवासी 30 वर्षीय गर्भवती महिला सीमा पत्नी आनंद भगवती चंद्र मेमोरियल अस्पताल में शनिवार की सुबह करीब आठ बजे भर्ती करवाई गई। परिजनों के अनुसार डॉक्टरों ने गर्भवती का चेकअप किया और बताया कि नॉर्मल डिलीवरी हो जाएगी, लेकिन कुछ देर बाद ही डॉक्टरों ने ऑपरेशन से डिलीवरी करने की बात कही। सीमा के जेठ सोमबीर का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने ऑपरेशन के लिए पानीपत से डॉक्टर बुलवाया, जिसके बाद ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरू की गई। कुछ ही देर बाद डॉक्टर ऑपरेशन थिएटर से बाहर आए और बच्चे की मौत की बात बताई। जब सीमा की हालत के बारे में पूछा गया तो ठीक बताई गई। सोमबीर और अन्य परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने इलाज में लापरवाही बरती है और उनको गुमराह किया। सीमा की हालत भी ठीक नहीं थी, उसकी सही जानकारी देने की बजाए उन्हें दो यूनिट ब्लड व चार प्वाइंट प्लाज्मा लाने के लिए कहा गया। जब वे प्लाज्मा लेकर पहुंचें तो सीमा को ब्लड व प्लाज्मा चढ़ाना शुरू किया गया। इसके कुछ ही देर बाद अस्पताल के डॉक्टरों ने सीमा को करनाल के लिए रेफर कर दिया, लेकिन जब रेफर के लिए ले जाया जा रहा था तो सीमा की नब्ज चेक की गई, जिसमें जरा सी भी हलचल नहीं थी। सोमबीर का आरोप है कि सीमा की मौत पहले ही हो चुकी थी। अस्पताल प्रबंधन इलाज के नाम पर उन्हें गुमराह कर रहे थे। घटना की सूचना के बाद थाना प्रभारी कंवर सिंह पुलिसकर्मियों के साथ अस्पताल में पहुंचें और मामले की छानबीन शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि जच्चा बच्चा की मौत के बाद परिजनों की ओर से लिखित में शिकायत दी गयी थी, लेकिन बाद में उन्होंने शिकायत वापस ले ली।
डाक्टर बोलीं, पहले कहा था दूसरे अस्पताल ले जाने को
अस्पताल की महिला डॉक्टर कविता रानी का कहना है कि गर्भवती की डिलीवरी नॉर्मल ही करनी थी, लेकिन जब डिलीवरी कराई गई तो बच्चे के गले में आरनॉल की तीन लपेटे लगे हुए थे, जिससे दम घुटने से बच्चे की मौत हो गई। डिलीवरी से पहले ही परिजनों को कहा गया था कि वे गर्भवती को किसी दूसरे अस्पताल में ले जाएं, लेकिन वे यहीं पर डिलीवरी करवाने की बात पर अड़े रहे।
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हनुमान मंदिर इलाके की निवासी 30 वर्षीय गर्भवती महिला सीमा पत्नी आनंद भगवती चंद्र मेमोरियल अस्पताल में शनिवार की सुबह करीब आठ बजे भर्ती करवाई गई। परिजनों के अनुसार डॉक्टरों ने गर्भवती का चेकअप किया और बताया कि नॉर्मल डिलीवरी हो जाएगी, लेकिन कुछ देर बाद ही डॉक्टरों ने ऑपरेशन से डिलीवरी करने की बात कही। सीमा के जेठ सोमबीर का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने ऑपरेशन के लिए पानीपत से डॉक्टर बुलवाया, जिसके बाद ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरू की गई। कुछ ही देर बाद डॉक्टर ऑपरेशन थिएटर से बाहर आए और बच्चे की मौत की बात बताई। जब सीमा की हालत के बारे में पूछा गया तो ठीक बताई गई। सोमबीर और अन्य परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने इलाज में लापरवाही बरती है और उनको गुमराह किया। सीमा की हालत भी ठीक नहीं थी, उसकी सही जानकारी देने की बजाए उन्हें दो यूनिट ब्लड व चार प्वाइंट प्लाज्मा लाने के लिए कहा गया। जब वे प्लाज्मा लेकर पहुंचें तो सीमा को ब्लड व प्लाज्मा चढ़ाना शुरू किया गया। इसके कुछ ही देर बाद अस्पताल के डॉक्टरों ने सीमा को करनाल के लिए रेफर कर दिया, लेकिन जब रेफर के लिए ले जाया जा रहा था तो सीमा की नब्ज चेक की गई, जिसमें जरा सी भी हलचल नहीं थी। सोमबीर का आरोप है कि सीमा की मौत पहले ही हो चुकी थी। अस्पताल प्रबंधन इलाज के नाम पर उन्हें गुमराह कर रहे थे। घटना की सूचना के बाद थाना प्रभारी कंवर सिंह पुलिसकर्मियों के साथ अस्पताल में पहुंचें और मामले की छानबीन शुरू कर दी। उन्होंने बताया कि जच्चा बच्चा की मौत के बाद परिजनों की ओर से लिखित में शिकायत दी गयी थी, लेकिन बाद में उन्होंने शिकायत वापस ले ली।
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डाक्टर बोलीं, पहले कहा था दूसरे अस्पताल ले जाने को
अस्पताल की महिला डॉक्टर कविता रानी का कहना है कि गर्भवती की डिलीवरी नॉर्मल ही करनी थी, लेकिन जब डिलीवरी कराई गई तो बच्चे के गले में आरनॉल की तीन लपेटे लगे हुए थे, जिससे दम घुटने से बच्चे की मौत हो गई। डिलीवरी से पहले ही परिजनों को कहा गया था कि वे गर्भवती को किसी दूसरे अस्पताल में ले जाएं, लेकिन वे यहीं पर डिलीवरी करवाने की बात पर अड़े रहे।
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