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Karnal News: मोनिका चार वर्ष से बना रही आर्टिफिशियल गहने, शुरू किया स्वयं का रोजगार
Mon, 08 Dec 2025 01:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Mon, 08 Dec 2025 01:20 AM IST
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माेनिका
करनाल। ग्रामीण महिलाएं वर्तमान में अपने घरेलू हुनर के जरिये आत्मनिर्भर बन रहीं हैं। मोनिका पिछले चार वर्षों से गहनें व कस्माइजड सजावटी सामान बनाने का कार्य कर रही हैं। इसके साथ ही वे अपने गांव व चार से पांच गांव की महिलाओं व युवतियों को गहने बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं।
मोनिका ने बताया कि उन्होंने फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई की है लेकिन बचपन से शौक रचनात्मक कार्य करने का ही रहा है। उन्होंने बताया कि वे व्यर्थ सामान से रचनात्मक और सजावटी सामान बनाती आ रही हैं। मोनिका हाल ही में पंचकूला, सोनीपत सहित तीन से चार जिलों में गहने व फैशन डिजाइनिंग का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। वर्तमान में वे अपने गांव की करीब 35 से 40 महिलाओं को गहने बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। गहने बनाने के लिए कच्चा सामान दिल्ली से लाती हैं साथ ही मिट्टी व क्ले से भी सुंदर गहने बनाती हैं। इसके साथ ही कागज के टुकड़ो और बेकार पड़ी छोटी-छोटी चीजों से नए हैंडीक्राफ्ट तैयार करती हैं।
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अन्य महिलाओं को भी कर रहीं सशक्त
मोनिका बताती है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ कर उन्हें खुद को प्रशिक्षित कर व्यवसाय करने का मौका मिला। उन्होंने बताया कि समूह की महिलाओं ने उन्हें प्रोत्साहित किया जिसके बाद से अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देना शुरू किया। आज मोनिका बीड वर्क, रेजिन ज्वेलरी, पेपर ज्वेलरी, ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी से लेकर खास तरह के हैंडीक्राफ्ट सेट बनाती हैं। वर्तमान में स्वयं सहायता समूह की 30 से 40 महिलाएं गहने बनाने का काम कर खुद का रोजगार कर रही हैं। उन्होंने अन्य युवतियों को संदेश देते हुए कहा कि युवतियां भी अपने शैक्षिक जीवन के साथ-साथ छोटे स्तर पर रोजगार कर सकती हैं। वहीं वर्तमान में शादी सीजन के चलते हर माह लगभग सात से आठ हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं।
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इनसैट
- खुद का रोजगार करना था सपना
मोनिका ने बताया कि पिता किसान हैं और खेती कर वह घर का खर्च चलाते हैं। बचपन से माता-पिता को आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए संघर्ष करते देखा और सपना बनाया कि भले ही छोटा ही सही लेकिन खुद का रोजगार शुरू करना है। सपने को साकार करने के लिए फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया। बचपन से देखा कि ग्रामीण महिलाएं सपने और शिक्षा को लेकर पीछे रह जाया करती थीं लेकिन अपने पिता के आगे बात रखी कि वह अन्य महिलाओं के लिए भी काम करना चाहती हैं। समूह से जुड़ने के बाद 25 वषीर्य मोनिका आज अपने साथ-साथ अन्य ग्रामीण महिलाओं को रोजगार दिला रही हैं।
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मोनिका ने बताया कि उन्होंने फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई की है लेकिन बचपन से शौक रचनात्मक कार्य करने का ही रहा है। उन्होंने बताया कि वे व्यर्थ सामान से रचनात्मक और सजावटी सामान बनाती आ रही हैं। मोनिका हाल ही में पंचकूला, सोनीपत सहित तीन से चार जिलों में गहने व फैशन डिजाइनिंग का प्रशिक्षण दे चुकी हैं। वर्तमान में वे अपने गांव की करीब 35 से 40 महिलाओं को गहने बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। गहने बनाने के लिए कच्चा सामान दिल्ली से लाती हैं साथ ही मिट्टी व क्ले से भी सुंदर गहने बनाती हैं। इसके साथ ही कागज के टुकड़ो और बेकार पड़ी छोटी-छोटी चीजों से नए हैंडीक्राफ्ट तैयार करती हैं।
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अन्य महिलाओं को भी कर रहीं सशक्त
मोनिका बताती है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ कर उन्हें खुद को प्रशिक्षित कर व्यवसाय करने का मौका मिला। उन्होंने बताया कि समूह की महिलाओं ने उन्हें प्रोत्साहित किया जिसके बाद से अन्य महिलाओं को भी प्रशिक्षण देना शुरू किया। आज मोनिका बीड वर्क, रेजिन ज्वेलरी, पेपर ज्वेलरी, ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी से लेकर खास तरह के हैंडीक्राफ्ट सेट बनाती हैं। वर्तमान में स्वयं सहायता समूह की 30 से 40 महिलाएं गहने बनाने का काम कर खुद का रोजगार कर रही हैं। उन्होंने अन्य युवतियों को संदेश देते हुए कहा कि युवतियां भी अपने शैक्षिक जीवन के साथ-साथ छोटे स्तर पर रोजगार कर सकती हैं। वहीं वर्तमान में शादी सीजन के चलते हर माह लगभग सात से आठ हजार रुपये की आमदनी कर रही हैं।
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- खुद का रोजगार करना था सपना
मोनिका ने बताया कि पिता किसान हैं और खेती कर वह घर का खर्च चलाते हैं। बचपन से माता-पिता को आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए संघर्ष करते देखा और सपना बनाया कि भले ही छोटा ही सही लेकिन खुद का रोजगार शुरू करना है। सपने को साकार करने के लिए फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया। बचपन से देखा कि ग्रामीण महिलाएं सपने और शिक्षा को लेकर पीछे रह जाया करती थीं लेकिन अपने पिता के आगे बात रखी कि वह अन्य महिलाओं के लिए भी काम करना चाहती हैं। समूह से जुड़ने के बाद 25 वषीर्य मोनिका आज अपने साथ-साथ अन्य ग्रामीण महिलाओं को रोजगार दिला रही हैं।