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Karnal News: आगामी तीन माह में भारतीय बाजार में उपलब्ध होगी लंपी वायरसरोधी स्वदेशी वैक्सीन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 09 Apr 2023 02:20 AM IST
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Lumpy virus indigenous vaccine will be available in the Indian market in the next three months
देव शर्मा
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करनाल। पशुओं खासकर गायों को अपनी चपेट में लेने वाले लंपी वायरस ने पिछले सालों में पशुधन को भारी नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद कुछ समय पहले ही भारतीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली ने मिलकर इस घातक वायरस से होने वाले लंपी त्वचा रोग की रोकथाम को स्वदेशी वैक्सीन प्रो-वैक आईएनडी विकसित की। अब इस वैक्सीन को आम पशुपालकों तक पहुंचाने की तैयारी है। जिसके लिए केंद्र ने इस तकनीक को देश की चार बड़ी कंपनियों को हस्तांतरित कर दिया है। उम्मीद है कि आगामी दो से तीन महीने में इस वैक्सीन का बड़े पैमाने पर उत्पादन होने के साथ ही भारतीय बाजार में उपलब्ध होगी।
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) करनाल में शनिवार से शुरू हुए राष्ट्रीय डेयरी मेले में राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार ने भी अपना स्टाॅल लगाया। जिसमें सहायक मुख्य तकनीकी अधिकारी डॉ. अजमेर सिंह व प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राम अवतार लेघा ने देशभर से आए किसानों से इस स्वदेशी वैक्सीन की जानकारी साझा की। डॉ. अजमेर सिंह ने बताया कि लंपी वायरस गाय व भैंस दोनों में ही देखा गया, लेकिन सर्वाधिक गायों को अपनी चपेट में लेता है, इससे गायों के शरीर पर जख्म हो जाते हैं। जिसमें असहनीय दर्द होता है। हल्का बुखार होता है, पशु खाना छोड़ देता है। इसकी रोकथाम के लिए स्वदेशी वैक्सीन प्रो-वैक आईएनडी को तैयार किया गया, इसके 2021-22 में जम्मू कश्मीर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, असम, अंडमान निकोबार आदि 22 राज्यों में एक लाख पशुओं पर किया गया परीक्षण सफल रहा है। खास बात ये भी है कि यह वैक्सीन गाभिन पशुओं को भी लगाया जा सकता है। प्रति पशु एक मिली लीटर की डोज लगती है, ये एक डोज एक साल तक काम करती है।
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डॉ. अजमेर सिंह ने बताया कि कुछ दिन पहले ही वैक्सीन को तैयार किया गया है, लेकिन अब इसके अगले चरण में इसे देश के बाजार में पहुंचाने की ओर कदम बढ़ा दिया गया है। इसके लिए केंद्र ने वैक्सीन निर्माण तकनीक का हस्तांतरण महाराष्ट्र सरकार के साथ-साथ तीन बड़ी कंपनियों बायोवेट कर्नाटक, हेस्टेयर (एचईएसटीईआर) बायोसाइंसेस लिमिटेड गुजरात, इंडियन इम्नोजिकल हैदराबाद को किया गया है। ये तकनीक प्रत्येक को 75-75 लाख रुपये में हस्तांतरित की गई है। अब महाराष्ट्र सरकार व ये कंपनियां इस वैक्सीन का उत्पादन करेंगी। उम्मीद है कि संबंधित सरकारों से अनुमोदन के बाद ये वैक्सीन दो से तीन महीने के अंदर बाजार में उपलब्ध हो जाएगी। जिसका लाभ सीधे पशु पालक किसानों को होगा।
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