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नहर में छलांग लगाकर बचाई जान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 03 May 2020 01:57 AM IST
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life saved by jumping in the karnal
मधुबन। हरियाणा पुलिस अकादमी के मध्य गुजरने वाली आवर्धन नहर में डूब रहे व्यक्ति को जीवन अकादमी के दो प्रशिक्षकों ने साहस व सूझबूझ ने बचा लिया। भारतीय सेना से प्रशिक्षण ड्यूटी पर हरियाणा पुलिस अकादमी में आए प्रशिक्षक नायक दान बहादुर राणा व नायक राकेश कुमार ने देर रात नहर में डूब रहे 55 वर्षीय करनाल निवासी व्यक्ति को बचाया। उन्होंने नहर के खतरनाक बहाव की परवाह न करते हुए पानी में छलांग लगाकर व्यक्ति को बाहर निकाला और उसे कृत्रिम श्वास देकर उसका जीवन बचाया। अकादमी के निदेशक योगिंद्र सिंह नेहरा ने नायक दान बहादुर राणा और नायक राकेश कुमार के अदम्य साहस की दिल से सराहना की और कहा कि उन्होंने व्यक्ति के जीवन को बचाने का महान कार्य है।
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मुख्य कवायद प्रशिक्षक अमरीक सिंह चहल ने बताया कि दोनों प्रशिक्षक रात को आवर्धन नहर पर सुरक्षा ड्यूटी में गश्त पर थे। मध्य रात्रि के बाद पानी में कुछ आवाज सुनाई दी लेकिन अंधेरे के कारण कुछ दिखाई नहीं दिया। टॉर्च की रोशनी से जब इन्होंने इलाके को खोजना आरम्भ किया तो पानी में कपड़ा दिखाई दिया। दोनों प्रशिक्षकों ने क्षणभर में आपसी सूझबूझ से निर्णय लिया और नायक दानबहादुर राणा अपनी जान की परवाह न करते हुए पानी में छलांग दी। राकेश ने योजना अनुसार पेड़ के लंबे डण्डे को पानी में लटका दिया। नायक राणा ने डूबते हुए व्यक्ति को पकड़ लिया और किनारे की तरफ आते हुए उसी डण्डे के सहारे से बाहर आ गए। इस प्रकार अकादमी के दोनों जांबाज प्रशिक्षकों ने अपनी जान को जोखिम में डालकर एक नागरिक के जीवन को बचा लिया। नायक दान बहादुर राणा सेना में पीटी कोर्स प्रशिक्षण के प्रशिक्षक हैं और इस समय 2 साल के लिए हरियाणा पुलिस अकादमी में प्रशिक्षक के रूप में सेवा दे रहे हैं।
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नायक राणा ने बताया कि जब नहर में डूबते हुए व्यक्ति का पता चला तो उन्हें अपनी सुरक्षा और दूसरे का जीवन बचाने के बीच कुछ ही पलों में निर्णय लेना था, जो बहुत मुश्किल था। लेकिन साथी राकेश की सहायता से डूबते व्यक्ति को बचाने के लिए तेज बहाव की नहर में छलांग लगाना जरूरी था। बाहर निकालने पर वह व्यक्ति बेहोश था। उसे मुंह के बल उल्टा लिटाकर पहले पानी निकाला और फिर कृत्रिम श्वास देने की प्रक्रिया पूरी की। उसे होश में आया देखकर दोनों की खुशी का ठिकाना न रहा। नायक राकेश कुमार सेना के कमाण्डों प्रशिक्षक हैं और 2 साल के लिए अकादमी में तैनात हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास डूबते को बचाने में पल भर की देरी जीवनभर का मलाल बन जाती। एक सैनिक ना तो अपने सामने दुश्मन को बर्दाश्त कर सकता और न ही अपने देशवासी को संकट में देख सकता है। नायक राणा और वह काफी समय से एक साथ ड्यूटी पर रहते हैं तो उनमें परस्पर विश्वास बढ़ा है, जिसके चलते बचाव कार्य में देरी नहीं हुई।
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