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Karnal News: बाल कैदियों से जानीं परेशानियां
Sat, 28 Sep 2024 04:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 28 Sep 2024 04:47 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। किशोर बंदियों को दी जा रही सुविधाओं की निगरानी के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के चेयरपर्सन चंद्रशेखर ने प्लेस ऑफ सेफ्टी, मधुबन का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने बाल कैदियों से वार्तालाप की और उनको होने वाली परेशानियों के बारे में जाना।
इसके अलावा उन्होंने उन्हें परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को स्वयं परखा। उन्होंने बच्चों को स्वस्थ रहने और अपने आस-पास के वातावरण को साफ-सुथरा रखने के लिए भी जागरूक किया। उन्होंने बताया कि यदि कोई बच्चा अपने आगे के अध्ययन में सुधार करना चाहता है तो वह जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण से संपर्क कर सकता है। इस संबंध में स्टाफ को बच्चों के आवेदन अग्रेषित करने के निर्देश दिए गए।
अधीक्षक को बैरकों और पुस्तकालय में बच्चों-कैदियों के कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी स्थापित एवं प्रदर्शित करने का भी निर्देश दिया, ताकि बच्चों-कैदियों को कानूनी सेवाएं प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत बनाए गए नियम और कानून निर्धारित उनके कानूनी अधिकारों से अवगत कराया जा सके।
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कुछ कैदियों ने विभिन्न न्यायालयों में लंबित अपने मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए अनुरोध किया। स्टाफ को उनके आवेदनों को अग्रेषित करने का निर्देश दिया गया, ताकि मामला संबंधित न्यायालयों के ध्यान में लाया जा सके।
उन्होंने अधीक्षक को किशोर न्याय अधिनियम और बच्चों-कैदियों के कल्याण के तहत गठित समितियों के अस्तित्व के बारे में भी अवगत कराया। इस दौरान उअतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश कुमार, डॉ. विवेक गोयल, मोहित अग्रवाल, राम अवतार पारीक, सीजेएम एवं सचिव इरम हसन व जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट सुयेशा जावा उपस्थित रही।
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करनाल। किशोर बंदियों को दी जा रही सुविधाओं की निगरानी के लिए जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण के चेयरपर्सन चंद्रशेखर ने प्लेस ऑफ सेफ्टी, मधुबन का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने बाल कैदियों से वार्तालाप की और उनको होने वाली परेशानियों के बारे में जाना।
इसके अलावा उन्होंने उन्हें परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता को स्वयं परखा। उन्होंने बच्चों को स्वस्थ रहने और अपने आस-पास के वातावरण को साफ-सुथरा रखने के लिए भी जागरूक किया। उन्होंने बताया कि यदि कोई बच्चा अपने आगे के अध्ययन में सुधार करना चाहता है तो वह जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण से संपर्क कर सकता है। इस संबंध में स्टाफ को बच्चों के आवेदन अग्रेषित करने के निर्देश दिए गए।
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अधीक्षक को बैरकों और पुस्तकालय में बच्चों-कैदियों के कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी स्थापित एवं प्रदर्शित करने का भी निर्देश दिया, ताकि बच्चों-कैदियों को कानूनी सेवाएं प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत बनाए गए नियम और कानून निर्धारित उनके कानूनी अधिकारों से अवगत कराया जा सके।
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कुछ कैदियों ने विभिन्न न्यायालयों में लंबित अपने मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए अनुरोध किया। स्टाफ को उनके आवेदनों को अग्रेषित करने का निर्देश दिया गया, ताकि मामला संबंधित न्यायालयों के ध्यान में लाया जा सके।
उन्होंने अधीक्षक को किशोर न्याय अधिनियम और बच्चों-कैदियों के कल्याण के तहत गठित समितियों के अस्तित्व के बारे में भी अवगत कराया। इस दौरान उअतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रजनीश कुमार, डॉ. विवेक गोयल, मोहित अग्रवाल, राम अवतार पारीक, सीजेएम एवं सचिव इरम हसन व जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट सुयेशा जावा उपस्थित रही।