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तीर्थों के जीर्णोद्धार से आस्था की नगरी बनेगी कर्ण नगरी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 07 Aug 2022 02:30 AM IST
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Karna city will become a city of faith with the restoration of pilgrimages
दानवीर राजा कर्ण की नगरी के नाम से देशभर में प्रसिद्ध करनाल को सरकार पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रही है। इसके लिए जहां पहले कर्ण लेक समेत अन्य जगहों को नया रूप देने का प्रयास किया गया। वहीं अब धर्मस्थल और ऐतिहासिक तीर्थों के सुधार एवं जीर्णोद्धार के लिए भी प्रदेश सरकार ने खजाना खोला है। 48 कोस परिधि के तीर्थों को नया रूप मिलने से कर्ण की नगरी आस्था की नगरी के रूप में भी नजर आएगी।
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करनाल को पर्यटन स्थल बनाने का मुख्यमंत्री मनोहर लाल का सपना है। इसी के तहत करनाल पहुंचे सीएम ने छह तीर्थों के जीर्णोद्धार के लिए 6.64 करोड़ रुपये से होने वाले कार्यों का शिलान्यास भी किया। इस राशि से इन तीर्थों के रास्ते पक्के करने के अलावा सरोवरों की तस्वीर भी बदलेगी। करीब एक साल बाद ये ऐतिहासिक सरोवर नए अंदाज में नजर आएंगे। ऐसे में यहां त्योहारों पर स्नान के लिए आने वाले लोगों की आस्था भी और गहराएगी।
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48 कोस परिधि में कुल 134 तीर्थ हैं। जो पांच जिलों में हैं। इनमें से 34 तीर्थ अकेले करनाल में हैं। इसके अलावा कैथल में सर्वाधिक 50, कुरुक्षेत्र में 31, जींद में 18 और पानीपत में एक तीर्थ है। जिन छह तीर्थों को जीर्णोद्धार के लिए चुना है, इस विशेष
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सोम तीर्थ : 13 तपस्वियों ने ली थी जीवित समाधि
यह तीर्थ करनाल से लगभग 29 किमी दूर समाना बाहु गांव में है। महाभारत और वामन पुराण में इसका उल्लेख कई बार मिलता है। महाभारत में इसे सोम लोक प्रदाता गया है। कहा जाता है कि इस तीर्थ में स्नान करने से चंद्रमा को व्याधि से मुक्ति मिली थी। तो इसे सोम तीर्थ की संज्ञा प्राप्त हुई। यहां स्नान से राजसूर्य यज्ञ के फल की प्राप्ति होती है। रोग और दोष नष्ट होते हैं। व्यक्ति सोम लोक को प्राप्त करके चिरकाल तक वहां निवास करता है। प्राचीन काल में यहां 13 तपस्वियों ने एक श्वान के साथ जीवित समाधि ली थी। पृथ्वी में समाधि लेने के कारण ही इस ग्राम का नाम समाना प्रसिद्ध हुआ।
अक्षय वट तीर्थ : पुलस्त्य मुनि की तपस्थली
यह करनाल से लगभग 27 किमी दूर बड़थल ग्राम में है। इस तीर्थ का वर्णन महाभारत, अग्निपुराण, पदमपुराण, वायुपुराण और ब्रह्मपुराण में मिलता है। यहां पितरों के निमित्त दिया हुआ दान अक्षय होता है इसलिए इसे अक्षयवट तीर्थ की संज्ञा मिली। ब्रह्म पुराण मे इसे पुलस्त्य मुनि की तपस्थली कहा है।
कौशिकी तीर्थ : नारायण अवतार के चित्र विद्यमान
यह करनाल से 29 किमी दूर कोयर ग्राम में है। तीर्थ कुरुक्षेत्र भूमि की नौ नदियों में से एक कौशिकी नदी के तट पर स्थित होने के कारण कौशिकी तीर्थ के नाम से प्रसिद्ध है। वामन पुराण में कौशिकी नदी को पाप नाशिनी कहा गया है। करीब 15 एकड़ में विस्तृत इस तीर्थ सरोवर में स्त्रियों और पुरुषों के स्नान के लिए अलग-अलग घाट बने हैं। तीर्थ स्थित मंदिर के गर्भगृह की दीवारों पर कालियदमन, मत्स्यावतार और सूर्यरथ आदि अनेक चित्र हैं।
वामनक तीर्थ : वामन अवतार से संबंध
यह बोड़श्याम गांव में स्थित है। इसे विष्णुह्रद, विष्णुपद नाम से भी जाना जाता है। महाभारत और वामन पुराण में इसका वर्णन उपलब्ध है। महाभारत में कहा है कि विष्णु पद नामक तीर्थ में स्नान करके वामन भगवान की अर्चना करनी चाहिए। वामन पुराण के अनुसार, भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर दैत्यों के राजा बलि से तीन पद पृथ्वी मांगी थी और उसक मानमर्दन किया था। तब से यह तीर्थ विष्णुपद के नाम से जाना जाता है। यहां ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को यथाशक्ति स्नान दान करने से मनुष्य को परम पद मिलता है।
ब्रह्म तीर्थ : बलराम के विश्राम का उल्लेख
यह करनाल से 39 किमी दूर सावंत ग्राम में है। कुरुक्षेत्र के सभी तीर्थ ब्रह्मा, विष्णु और महेश आदि देवों में आस्था के प्रतीक हैं। इसका वर्णन भी महाभारत और पौराणिक साहित्य में मिलता है। इस तीर्थ में स्नान करने से ब्राह्मणेतर मानव ब्राह्मणत्व को प्राप्त हो जाता है। ब्रह्म पुराण में इस तीर्थ की गणना समंतक पंचक तीर्थ के साथ दी गई है। ब्रह्म पुराण में इस तीर्थ को देवताओं के लिए भी दुर्लभ तथा मनुष्यों के लिए भोग, ऐश्वर्य एवं मोक्ष देने वाला बताया गया है। कौरवों और पांडवों के युद्ध में स्वयं को तटस्थ बनाए रखने के लिए बलराम द्वारा की गई तीर्थ यात्रा के दौरान यहां विश्राम करने का उल्लेख है।

फोटो-- 59 नंबर है।
तीर्थों का चरणबद्ध ढंग से होगा जीर्णोद्धार : सीएम
हरियाणा में 48 कोस के तीर्थों का चरणबद्ध ढंग से जीर्णोद्धार किया जा रहा है। करनाल में अभी छह तीर्थ लिए हैं। इन स्थानों में महाभारत काल से जुड़ी कहानियां अभी भी सुनाई जाती हैं। इनसे रास्ते, सरोवर आदि को सुधारा जाएगा। पिंडदान आदि के लिए यहां लोग आते हैं। - मनोहर लाल, मुख्यमंत्री हरियाणा
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