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छोटे कद की चिंता दरकिनार, संकल्प से पाया मुकाम
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जीवन में चाहे कितनी ही परेशानियां क्यों न आए लेकिन दृढ़ संकल्प और हिम्मत से आगे बढ़ा जाए तो कोई भी मुकाम आसानी से पाया जा सकता है। ऐसा जालंधर की हरविंद्र कौर ने साबित करके दिखाया। अपने तीन फीट के कद के कारण लोगों के उपहास को सह कर कभी खुद को कमरे में बंद करने वाली हरविंद्र कौर ने हिम्मत दिखाकर कानून की पढ़ाई की और आज एक सफल वकील के रूप में जालंधर कोर्ट में सेवाएं दे रही हैं।
करनाल में एक सेमिनार में पहुंचीं जालंधर की महिला अधिवक्ता हरविंद्र कौर को कल्पना चावला महिला सशक्तिकरण अवार्ड से सम्मानित किया गया। हरविंद्र कौर ने विद्यार्थियों के साथ अपने जीवन के अनुभव सांझा किए। सफलतम वकीलों में शुमार महिला अधिवक्ता ने अपने वक्तव्य में जिंदगी की मुश्किलों से लड़ते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वे 25 वर्ष की आयु में सफल महिला अधिवक्ता हैं और उन्हें देश की सबसे छोटे कद की अधिवक्ता माना जाता है। उन्होंने शारीरिक विषमता के बावजूद जिंदगी की कठिनाइयों से लड़कर अपना विशेष मुकाम हासिल किया।
विद्यार्थियों को कानून की पढ़ाई के बताए मायने
डा. मंगलसेन सभागार में सारगर्भित सेमिनार का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कानून की पढ़ाई के बाद एक विद्यार्थी के सामने भविष्य के क्या-क्या विकल्प हैं। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए कलेक्टर की परीक्षा को कैसे मेरिट के साथ पास कर सकते हैं। इस विषय पर सोमवार को डा. मंगलसेन सभागार में सारगर्भित सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न स्कूलों के सैकड़ों विद्यार्थियों ने कानून की पढ़ाई से संबंधित जानकारी प्राप्त की।
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क्लैट इंडिया, निफा, जिला बार संघ, सहोदय स्कूल कांपलेक्स व आईबीएन संस्था की ओर से आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि डा. भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डा. अमित कम्बोज ने कहा कि पहले कानून की पढ़ाई के मायने केवल वकील बनने से लिए होते थे लेकिन अब इस पढ़ाई के बाद सफलता के इतने रास्ते खुलते हैं जितने कि विज्ञान व मेडिकल की शिक्षा के बाद भी नहीं खुलते। आज हर विभाग में कानूनी सलाहकार का पद रहता है। बड़े कारपोरेट भी अपने कानूनी सलाहकार नियुक्त करते हैं। न्याय के क्षेत्र में भी बेहतरीन रास्ते खुले हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कानून में अनेक अवसर हैं। इमिग्रेशन लॉ के माध्यम से भी रोजगार का अच्छा अवसर उपलब्ध है। डा. अनिल सिंघानिया ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को कानून की आईआईटी बताते हुए इसमें दाखिले के रास्ते की जानकारी दी।
जिला बार संघ के अध्यक्ष कंवरप्रीत सिंह भाटिया, निफा के अध्यक्ष प्रितपाल सिंह पन्नू, संयोजक एडवोकेट नरेश बराना व डा. विनोद कौशिक ने भी विचार रखे।
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करनाल। जीवन में चाहे कितनी ही परेशानियां क्यों न आए लेकिन दृढ़ संकल्प और हिम्मत से आगे बढ़ा जाए तो कोई भी मुकाम आसानी से पाया जा सकता है। ऐसा जालंधर की हरविंद्र कौर ने साबित करके दिखाया। अपने तीन फीट के कद के कारण लोगों के उपहास को सह कर कभी खुद को कमरे में बंद करने वाली हरविंद्र कौर ने हिम्मत दिखाकर कानून की पढ़ाई की और आज एक सफल वकील के रूप में जालंधर कोर्ट में सेवाएं दे रही हैं।
करनाल में एक सेमिनार में पहुंचीं जालंधर की महिला अधिवक्ता हरविंद्र कौर को कल्पना चावला महिला सशक्तिकरण अवार्ड से सम्मानित किया गया। हरविंद्र कौर ने विद्यार्थियों के साथ अपने जीवन के अनुभव सांझा किए। सफलतम वकीलों में शुमार महिला अधिवक्ता ने अपने वक्तव्य में जिंदगी की मुश्किलों से लड़ते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वे 25 वर्ष की आयु में सफल महिला अधिवक्ता हैं और उन्हें देश की सबसे छोटे कद की अधिवक्ता माना जाता है। उन्होंने शारीरिक विषमता के बावजूद जिंदगी की कठिनाइयों से लड़कर अपना विशेष मुकाम हासिल किया।
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विद्यार्थियों को कानून की पढ़ाई के बताए मायने
डा. मंगलसेन सभागार में सारगर्भित सेमिनार का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। कानून की पढ़ाई के बाद एक विद्यार्थी के सामने भविष्य के क्या-क्या विकल्प हैं। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए कलेक्टर की परीक्षा को कैसे मेरिट के साथ पास कर सकते हैं। इस विषय पर सोमवार को डा. मंगलसेन सभागार में सारगर्भित सेमिनार का आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न स्कूलों के सैकड़ों विद्यार्थियों ने कानून की पढ़ाई से संबंधित जानकारी प्राप्त की।
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क्लैट इंडिया, निफा, जिला बार संघ, सहोदय स्कूल कांपलेक्स व आईबीएन संस्था की ओर से आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि डा. भीमराव आंबेडकर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डा. अमित कम्बोज ने कहा कि पहले कानून की पढ़ाई के मायने केवल वकील बनने से लिए होते थे लेकिन अब इस पढ़ाई के बाद सफलता के इतने रास्ते खुलते हैं जितने कि विज्ञान व मेडिकल की शिक्षा के बाद भी नहीं खुलते। आज हर विभाग में कानूनी सलाहकार का पद रहता है। बड़े कारपोरेट भी अपने कानूनी सलाहकार नियुक्त करते हैं। न्याय के क्षेत्र में भी बेहतरीन रास्ते खुले हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कानून में अनेक अवसर हैं। इमिग्रेशन लॉ के माध्यम से भी रोजगार का अच्छा अवसर उपलब्ध है। डा. अनिल सिंघानिया ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी को कानून की आईआईटी बताते हुए इसमें दाखिले के रास्ते की जानकारी दी।
जिला बार संघ के अध्यक्ष कंवरप्रीत सिंह भाटिया, निफा के अध्यक्ष प्रितपाल सिंह पन्नू, संयोजक एडवोकेट नरेश बराना व डा. विनोद कौशिक ने भी विचार रखे।

डॉ मंगलसेन ऑडीटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में तीन फीट की एडवोकेट हरविंद्र कौर को कल्पना चावला म?