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Karnal News: देसी नुस्खे बढ़ा रहा मर्ज, श्रवण शक्ति खो रहे मरीज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 28 Dec 2022 09:00 AM IST
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Home remedies increasing disease, patients losing hearing power
अनुज शर्मा
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करनाल। कान का घरेलू नुस्खों से इलाज करने के कारण मरीजों की श्रवण शक्ति कम हो रही है। ईएनटी ओपीडी में रोजाना पहुंच रहे 300 मरीजों में से 20 से 25 मरीजों के कान के पर्दे खत्म या खत्म होने की स्थिति तक पहुंच चुके हैं। ऐसे में डॉक्टर लोगों को खुद इलाज करने के बजाय ईएनटी विशेषज्ञों के पास जाने की सलाह दे रहे हैं। जिससे सुनने की क्षमता को बचाया जा सके।
नागरिक अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. जयवर्धन ने बताया कि बढ़ती ठंड के साथ खांसी, जुकाम और वायरल इंफेक्शन भी बढ़ रहा है। ऐसे में अधिकतर मरीज डॉक्टर के पास जाने के बजाय खुद ही घरेलू नुस्खों से अपना इलाज कर रहे हैं। जिस कारण अधिकतर मरीजों की सुनने की शक्ति कम हो रही है। जुकाम के बाद कान बंद होने की स्थिति में कान में गर्म तेल डालने से पर्दों को नुकसान पहुंच रहा है। विशेषज्ञों के समक्ष ठंड में जुकाम से परेशान लोगों का ज्यादा जोर से नाक साफ करना, जोर से गरारे करने की बातें सामने आई। वहीं अधिकतर मरीजों के जरिए विशेषज्ञों को पता चला कि नागरिक अस्पताल में आने से पहले वे अपना स्वयं घरेलू उपचार करके आए हैं। घरेलू उपचार के बाद राहत नहीं मिली तो उन्होंने अस्पताल का रुख किया। संवाद
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कान में न डालें गर्म तेल
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. जयवर्धन ने बताया कि जुकाम के बाद कान बंद होने की स्थिति में अधिकतर मरीज कान में गर्म तेल डाल लेते हैं। जिससे गर्म तेल कान के पर्दों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। ओपीडी में ऐसे रोजाना 20 से 25 मरीज आ रहे हैं। जो कान में गर्म तेल डालने के बाद कम सुनने की बीमारी से पीड़ित हो चुके हैं। जिनके कान के पर्दे खत्म या खत्म होने की स्थिति तक पहुंच चुके हैं।
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ज्यादा जोर से गरारे करना नुकसानदेह
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. कुलजीत सिंह ने बताया कि अधिकतर मरीज गला बैठने, खराश, नाक बंद होने की स्थिति में ज्यादा जोर से गरारे और नाक साफ करने लग जाते हैं। ऐसी स्थिति में एक बार तो नाक या गले को राहत मिल जाती है, लेकिन कान में हवा भरने से वे बंद हो जाते हैं। अगर यह प्रक्रिया कई बार दोहराई जाए तो कान के पर्दे फटने तक की स्थिति पैदा हो सकती है। जो आपके की शक्ति कमजोर कर सकता है।
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