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10 मार्च से शुरू होगा होलाष्टक, आठ दिन शुभ कार्य वर्जित

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 05 Mar 2022 02:25 AM IST
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Holashtak will start from March 10, auspicious work prohibited for eight days
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। होली से करीब आठ दिन पहले लगने वाले होलाष्टक का समय 10 मार्च से शुरू हो रहा है। इसके बाद आठ दिन के लिए सभी तरह के शुभ कार्य वर्जित हो जाते हैं। ये फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से शुरू हो जाते हैं। इसके बाद से होलिका दहन की तैयारी हर घर में शुरू हो जाती है। परंपरानुसार महिलाएं घर में गोबर से उपले तैयार करतीं हैं जो होलिका दहन के समय पूजा में काम आते हैं।
वहीं होलाष्टक आरंभ होते ही युवा होलिका दहन स्थल पर दो डंडे स्थापित कर लकड़ियां जमा करते हैं। पंडित विनोद शास्त्री ने बताया कि होलाष्टक के बीच कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है। मान्यताओं के अनुसार ये आठ दिन मांगलिक या शुभ कार्यों के लिए अशुभ होते हैं। इन आठ दिनों में सभी ग्रहों का स्वभाव उग्र हो जाता है। जो शुभ कार्य के लिए सही नहीं माने जाते हैं। ज्योतिष की दृष्टि से होलाष्टक को एक तरह का दोष माना जाता है, जिसमें विवाह, गृह प्रवेश, निर्माण आदि शुभ कार्य वर्जित हैं। हिंदू धर्म के 16 संस्कारों को न करने की सलाह दी जाती है। यदि इन दिनों कोई शुभ कार्य करे तो या तो उसका विपरीत परिणाम आ सकता है या पूरा फल प्राप्त नहीं हो पाता है।
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प्रचलित कथाएं
होलाष्टक में शुभ कार्य क्यों नहीं होते, इसके पीछे एक कथा भी प्रचलित है। जिसमें कहा गया है कि हिरण्यकश्यप ने फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन से पुत्र प्रहलाद को कई यातनाएं देना शुरू कर दिया था। वहीं श्रीहरि भक्त प्रहलाद को मारने के लिए हिरण्यकश्यप ने कई षड्यंत्र भी रचे थे लेकिन प्रहलाद पर श्री हरि विष्णु की कृपा थी जिससे वह हर षड्यंत्र को मात देता गया। फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन में हिरण्यकश्यप की बहन होलिका जल गई लेकिन प्रहलाद बच गया, क्योंकि अष्टमी से पूर्णिमा तक भक्त प्रहलाद पर कई यातनाएं दी गईं, इस कारण इन आठ दिनों को शुभ नहीं माना जाता है।
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ये भी मान्यता है कि फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान शिव की तपस्या भंग करने का प्रयास करने पर उन्होंने कामदेव को भस्म कर दिया था। कामदेव जो कि प्रेम के देवता माने जाते हैं, उनके भस्म होने से तीनों लोक में शोक छा गया। उनकी पत्नी रति ने तब भगवान शिव से क्षमा मांगी जिसके बाद शिवजी ने कामदेव को पुनरजीवित करने का आश्वासन दिया था।
महामृत्युंजय मंत्र का करें जाप
एक तरफ होलाष्टक में 16 संस्कार समेत कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित होता है, वहीं यह समय भगवान की भक्ति के लिए उत्तम माना जाता है। होलाष्टक के दौरान दान-पुण्य करने का विशेष फल प्राप्त होता है। इस दौरान मनुष्य को अधिक से अधिक भगवत भजन और वैदिक अनुष्ठान करने चाहिए ताकि समस्त कष्टों से मुक्ति मिल सके। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक में महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से हर तरह के रोग से छुटकारा मिलता है और सेहत अच्छी रहती है।

होलाष्टक का समय
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से लगने वाला होलाष्टक 10 मार्च दोपहर 2:15 बजे से शुरू और फाल्गुन माह की पूर्णिमा 17 मार्च को होलिका दहन के साथ होलाष्टक का अंत होगा। 18 मार्च को रंग-गुलाल के साथ फाग मनाया जाएगा।
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