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Karnal News: कौशल विकास के लिए तय करनी पड़ रही लंबी दूरी या पढ़ाई छोड़ना मजबूरी
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- कौशल विकास के लिए तय करनी पड़ रही लंबी दूरी या पढ़ाई छोड़ना मजबूरी
- प्रदेश के 10 खंडों में केवल सरकारी और 14 खंडों में प्राइवेट आईटीआई भी नहीं, पांच खंडों में स्वीकृति के बाद भी शुरू नहीं हुई
- आईटीआई की पढ़ाई के लिए 20 से 30 किलोमीटर दूर जाने को मजबूर युवा
- फतेहाबाद के सर्वाधिक चार, जींद और कुरुक्षेत्र के तीन खंडों में नहीं संस्थान
गगन तलवार
करनाल। सरकार कौशल विकास के लिए पिछले एक दशक से जोर लगा रही है लेकिन हालात यह हैं कि प्रदेश के 29 खंडों के युवाओं को अपना कौशल बढ़ाने के लिए या तो रोजाना 20 से 30 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है या फिर उन्हें आईटीआई में पढ़ाई का विकल्प ही छोड़ना पड़ता है।
यह स्थिति प्रदेश में न केवल ग्रामीण लड़के, बल्कि शहरी क्षेत्र की लड़कियों के सामने भी है। क्योंकि प्रदेश के विभिन्न खंडों में आईटीआई संस्थान नहीं हैं। प्रदेश के 10 खंड ऐसे हैं, जहां पर एक भी राजकीय आईटीआई नहीं हैं, इन खंडों के विद्यार्थी निजी आईटीआई या दूसरे खंड के सरकारी संस्थान में पढ़ाई करने जाते हैं।
इसके अलावा 14 खंड ऐसे भी हैं, जहां न तो राजकीय और न ही निजी आईटीआई हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों के विद्यार्थी या तो जिला मुख्यालय की तरफ रुख करते हैं या फिर आईटीआई की बजाय आगे की पढ़ाई के लिए दूसरा विकल्प चुनते हैं। सबसे ज्यादा फतेहाबाद में चार, जींद और कुरुक्षेत्र में तीन खंडों में एक भी संस्थान नहीं है। जबकि करनाल, चरखीदादरी, कैथल, पंचकूला, पानीपत, सोनीपत, रेवाड़ी और नूंह में एक-एक खंड ऐसा है जहां निजी व राजकीय कोई भी आईटीआई नहीं है।
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इसके अलावा पांच खंडों में सरकार की स्वीकृति के बाद भी आईटीआई अभी तक नहीं खुल पाई हैं। हालांकि कई जगह भवन निर्माण कार्य व अन्य कागजी प्रक्रियाएं चल रही हैं। ऐसे में ज्यादातर युवा जिला मुख्यालय स्थित संस्थानों से पढ़ाई के लिए मजबूर हैं। इसके लिए कई गांवों, कस्बों एवं उपमंडल के युवाओं को रोजाना बसों से लंबा सफर करना पड़ता है। वर्तमान में प्रदेश के 22 जिलों में 192 सरकारी और 225 निजी आईटीआई संचालित हैं। ब्यूरो
इन खंडों में नहीं राजकीय आईटीआई
यमुनानगर का बिलासपुर, कुरुक्षेत्र का बबैन और ईस्माइलाबाद, करनाल का कुंजपुरा, चरखीदादरी का बदरा, हिसार का अग्रोहा, फतेहाबाद का भूना, भट्टूकलां और रतिया व सिरसा जिले का बारागुढ़ा खंड में राजकीय आईटीआई नहीं है।
यहां नहीं निजी और राजकीय आईटीआई
जिला खंड
पलवल पृथला और हसनपुर
जींद पील्लूखेड़ा और मुजहाना
पंचकूला मोरनी
कुरुक्षेत्र पिपली
कैथल सीवन
पानीपत सनौली खुर्द
सोनीपत राई
रेवाड़ी दाहिना
नूंह इंद्री
महेंद्रगढ़ नीजमपुर
चरखीदादरी बूंद
फतेहाबाद नागपुर खंड
यहां स्वीकृति के बाद भी नहीं शुरू हुई आईटीआई
जिला खंड (गांव)
यमुनानगर रादौर (संधाला संधाली)
रोहतक लाखन माजरा (लाखन माजरा)
गुरुग्राम फारुखनगर (मुशेदपुर)
जींद अलेवा (पींगा)
फतेहाबाद टोहाना (धरसुल कलां)
करनाल के कुंजपुरा खंड में कोई राजकीय आईटीआई नहीं है। इसी तरह प्रदेश के कई खंडों में संस्थान नहीं हैं। कुछ खंडों में नई आईटीआई खोलने की स्वीकृति भी मिली हुई है। नए सत्र की दाखिला प्रक्रिया जारी है, पहले चरण में विद्यार्थी फीस जमा करा चुके हैं, अब दूसरा चरण शुरू होगा।
- गुलजार विर्क, प्रिंसिपल, राजकीय महिला आईटीआई करनाल
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- प्रदेश के 10 खंडों में केवल सरकारी और 14 खंडों में प्राइवेट आईटीआई भी नहीं, पांच खंडों में स्वीकृति के बाद भी शुरू नहीं हुई
- आईटीआई की पढ़ाई के लिए 20 से 30 किलोमीटर दूर जाने को मजबूर युवा
- फतेहाबाद के सर्वाधिक चार, जींद और कुरुक्षेत्र के तीन खंडों में नहीं संस्थान
गगन तलवार
करनाल। सरकार कौशल विकास के लिए पिछले एक दशक से जोर लगा रही है लेकिन हालात यह हैं कि प्रदेश के 29 खंडों के युवाओं को अपना कौशल बढ़ाने के लिए या तो रोजाना 20 से 30 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है या फिर उन्हें आईटीआई में पढ़ाई का विकल्प ही छोड़ना पड़ता है।
यह स्थिति प्रदेश में न केवल ग्रामीण लड़के, बल्कि शहरी क्षेत्र की लड़कियों के सामने भी है। क्योंकि प्रदेश के विभिन्न खंडों में आईटीआई संस्थान नहीं हैं। प्रदेश के 10 खंड ऐसे हैं, जहां पर एक भी राजकीय आईटीआई नहीं हैं, इन खंडों के विद्यार्थी निजी आईटीआई या दूसरे खंड के सरकारी संस्थान में पढ़ाई करने जाते हैं।
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इसके अलावा 14 खंड ऐसे भी हैं, जहां न तो राजकीय और न ही निजी आईटीआई हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों के विद्यार्थी या तो जिला मुख्यालय की तरफ रुख करते हैं या फिर आईटीआई की बजाय आगे की पढ़ाई के लिए दूसरा विकल्प चुनते हैं। सबसे ज्यादा फतेहाबाद में चार, जींद और कुरुक्षेत्र में तीन खंडों में एक भी संस्थान नहीं है। जबकि करनाल, चरखीदादरी, कैथल, पंचकूला, पानीपत, सोनीपत, रेवाड़ी और नूंह में एक-एक खंड ऐसा है जहां निजी व राजकीय कोई भी आईटीआई नहीं है।
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इसके अलावा पांच खंडों में सरकार की स्वीकृति के बाद भी आईटीआई अभी तक नहीं खुल पाई हैं। हालांकि कई जगह भवन निर्माण कार्य व अन्य कागजी प्रक्रियाएं चल रही हैं। ऐसे में ज्यादातर युवा जिला मुख्यालय स्थित संस्थानों से पढ़ाई के लिए मजबूर हैं। इसके लिए कई गांवों, कस्बों एवं उपमंडल के युवाओं को रोजाना बसों से लंबा सफर करना पड़ता है। वर्तमान में प्रदेश के 22 जिलों में 192 सरकारी और 225 निजी आईटीआई संचालित हैं। ब्यूरो
इन खंडों में नहीं राजकीय आईटीआई
यमुनानगर का बिलासपुर, कुरुक्षेत्र का बबैन और ईस्माइलाबाद, करनाल का कुंजपुरा, चरखीदादरी का बदरा, हिसार का अग्रोहा, फतेहाबाद का भूना, भट्टूकलां और रतिया व सिरसा जिले का बारागुढ़ा खंड में राजकीय आईटीआई नहीं है।
यहां नहीं निजी और राजकीय आईटीआई
जिला खंड
पलवल पृथला और हसनपुर
जींद पील्लूखेड़ा और मुजहाना
पंचकूला मोरनी
कुरुक्षेत्र पिपली
कैथल सीवन
पानीपत सनौली खुर्द
सोनीपत राई
रेवाड़ी दाहिना
नूंह इंद्री
महेंद्रगढ़ नीजमपुर
चरखीदादरी बूंद
फतेहाबाद नागपुर खंड
यहां स्वीकृति के बाद भी नहीं शुरू हुई आईटीआई
जिला खंड (गांव)
यमुनानगर रादौर (संधाला संधाली)
रोहतक लाखन माजरा (लाखन माजरा)
गुरुग्राम फारुखनगर (मुशेदपुर)
जींद अलेवा (पींगा)
फतेहाबाद टोहाना (धरसुल कलां)
करनाल के कुंजपुरा खंड में कोई राजकीय आईटीआई नहीं है। इसी तरह प्रदेश के कई खंडों में संस्थान नहीं हैं। कुछ खंडों में नई आईटीआई खोलने की स्वीकृति भी मिली हुई है। नए सत्र की दाखिला प्रक्रिया जारी है, पहले चरण में विद्यार्थी फीस जमा करा चुके हैं, अब दूसरा चरण शुरू होगा।
- गुलजार विर्क, प्रिंसिपल, राजकीय महिला आईटीआई करनाल