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Karnal News: फिरोजाबाद से अंबाला तक के कांच कारोबारी निकाल रहे रास्ता
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अंबाला छावनी में कांच के साइंस उत्पाद बनाता कर्मचारी। संवाद
अंबाला। चूड़ियों के शहर उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद से लेकर दिल्ली और अंबाला तक के ग्लासवेयर उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े कारोबारी अब एक मंच पर आ गए हैं। वह अपने यहां छोटे ग्लासवेयर इंडस्ट्रीज से जुड़े उद्योगों को बचाने के लिए केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय में वार्ता कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
दरअसल, फिरोजाबाद, दिल्ली और अंबाला तीनों स्थानों पर ग्लासवेयर उद्योग काफी हैं। अंबाला में जहां साइंस उत्पाद बनते हैं तो फिरोजाबाद में कांच की क्रॉकरी, झूमर आदि उत्पादों को बनाने के उद्योग हैं। ऐसे में सरकार के ग्लासवेयर इंडस्ट्रीज में आईएसआई मार्का के उत्पादों को बनाने का फैसला इन सभी को प्रभावित कर रहा है।
अब तीनों स्थानों पर कारोबारियों की एसोसिएशनें एक मंच पर आकर वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों को अपनी-अपनी समस्याएं बताते हुए एक बीच का रास्ता बनाने को कह रहीं हैं। बार-बार दिल्ली स्थित मंत्रालय के चक्कर न लगाने पड़ें इसके लिए वह ऑनलाइन माध्यम से बैठकें कर रहे हैं। जल्द ही इसमें बीच का रास्ता निकलने की उम्मीद कारोबारियों को नजर आ रही है।
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गौरतलब है कि हाल ही में केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें ग्लासवेयर इंडस्ट्रीज को अपने यहां कच्चे माल के रूप में आईएसआई मार्का की गुणवत्ता के कांच का प्रयोग करने के आदेश दिए गए हैं। यह आदेश एक अक्टूबर से लागू होने हैं।
छोटे उद्योगों को बचाने के लिए हो रही कवायद
अंबाला में अंबाला साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महासचिव गौरव सौनी बताते हैं कि अब लड़ाई छोटे उद्योगों को बचाने की चल रही है। क्योंकि फिरोजाबाद, अंबाला और दिल्ली में इस इंडस्ट्रीज में ऐसे कई छोटे कारोबारी हैं जो अपने परिवार के साथ इस कार्य को कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। अगर यह नई अधिसूचना लागू हुई तो इन कारोबारियों को आजीविका का दूसरा माध्यम खोजना होगा। क्योंकि आईएसआई मार्का के उत्पादों को तैयार करने के लिए मशीन व अन्य संसाधन जुटाना छोटे कारोबारियों के लिए काफी मुश्किल है। उन्हें इसके लिए कर्जा तक लेना पड़ सकता है। गौरव सोनी ने बताया कि इसीलिए प्रतिनिधिमंडल की मंत्रालय के अधिकारियों से यही गुजारिश है कि बीच का रास्ता निकल आए।
अधिक उत्पादन करने वालों पर ही लागू हो यह नियम
असीमा के पदाधिकारियाें का कहना है कि वैसे तो आईएसआई ग्रेड के उत्पादों को काफी उच्च स्तर की लैबोरेट्री में प्रयोग किया जाता है, मगर जब देशभर में यह नियम लागू होगा तो सभी को महंगे साइंस उत्पाद खरीदने पड़ेंगे। इसमें स्कूल कॉलेजों में स्थापित प्रयोगशालाओं के बजट पर भी बोझ पड़ेगा। क्योंकि साइंस उपकरण की सबसे अधिक मांग इसी सेक्टर से रहती है। कारोबारियों की कोशिश है कि बड़े स्तर पर उत्पादन करने वालों पर आईएसआई ग्रेड का उत्पाद तैयार करने का नियम लागू हो तो छोटे कारोबारियों को पहले की तरह अपने उत्पाद बनाने की छूट दी जाए। हालांकि इस बात पर मंत्रालय के अधिकारी कितना राजी होते हैं यह तो समय ही बताएगा। इसमें एक समस्या यह भी है कि अगर आईएसआई ग्रेड के बिना उत्पाद बाजार में आए तो हो सकता है कि अधिकांश बिक्री सस्ते के कारण इन उत्पादों की हो जाए।
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दरअसल, फिरोजाबाद, दिल्ली और अंबाला तीनों स्थानों पर ग्लासवेयर उद्योग काफी हैं। अंबाला में जहां साइंस उत्पाद बनते हैं तो फिरोजाबाद में कांच की क्रॉकरी, झूमर आदि उत्पादों को बनाने के उद्योग हैं। ऐसे में सरकार के ग्लासवेयर इंडस्ट्रीज में आईएसआई मार्का के उत्पादों को बनाने का फैसला इन सभी को प्रभावित कर रहा है।
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अब तीनों स्थानों पर कारोबारियों की एसोसिएशनें एक मंच पर आकर वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों को अपनी-अपनी समस्याएं बताते हुए एक बीच का रास्ता बनाने को कह रहीं हैं। बार-बार दिल्ली स्थित मंत्रालय के चक्कर न लगाने पड़ें इसके लिए वह ऑनलाइन माध्यम से बैठकें कर रहे हैं। जल्द ही इसमें बीच का रास्ता निकलने की उम्मीद कारोबारियों को नजर आ रही है।
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गौरतलब है कि हाल ही में केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें ग्लासवेयर इंडस्ट्रीज को अपने यहां कच्चे माल के रूप में आईएसआई मार्का की गुणवत्ता के कांच का प्रयोग करने के आदेश दिए गए हैं। यह आदेश एक अक्टूबर से लागू होने हैं।
छोटे उद्योगों को बचाने के लिए हो रही कवायद
अंबाला में अंबाला साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के महासचिव गौरव सौनी बताते हैं कि अब लड़ाई छोटे उद्योगों को बचाने की चल रही है। क्योंकि फिरोजाबाद, अंबाला और दिल्ली में इस इंडस्ट्रीज में ऐसे कई छोटे कारोबारी हैं जो अपने परिवार के साथ इस कार्य को कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। अगर यह नई अधिसूचना लागू हुई तो इन कारोबारियों को आजीविका का दूसरा माध्यम खोजना होगा। क्योंकि आईएसआई मार्का के उत्पादों को तैयार करने के लिए मशीन व अन्य संसाधन जुटाना छोटे कारोबारियों के लिए काफी मुश्किल है। उन्हें इसके लिए कर्जा तक लेना पड़ सकता है। गौरव सोनी ने बताया कि इसीलिए प्रतिनिधिमंडल की मंत्रालय के अधिकारियों से यही गुजारिश है कि बीच का रास्ता निकल आए।
अधिक उत्पादन करने वालों पर ही लागू हो यह नियम
असीमा के पदाधिकारियाें का कहना है कि वैसे तो आईएसआई ग्रेड के उत्पादों को काफी उच्च स्तर की लैबोरेट्री में प्रयोग किया जाता है, मगर जब देशभर में यह नियम लागू होगा तो सभी को महंगे साइंस उत्पाद खरीदने पड़ेंगे। इसमें स्कूल कॉलेजों में स्थापित प्रयोगशालाओं के बजट पर भी बोझ पड़ेगा। क्योंकि साइंस उपकरण की सबसे अधिक मांग इसी सेक्टर से रहती है। कारोबारियों की कोशिश है कि बड़े स्तर पर उत्पादन करने वालों पर आईएसआई ग्रेड का उत्पाद तैयार करने का नियम लागू हो तो छोटे कारोबारियों को पहले की तरह अपने उत्पाद बनाने की छूट दी जाए। हालांकि इस बात पर मंत्रालय के अधिकारी कितना राजी होते हैं यह तो समय ही बताएगा। इसमें एक समस्या यह भी है कि अगर आईएसआई ग्रेड के बिना उत्पाद बाजार में आए तो हो सकता है कि अधिकांश बिक्री सस्ते के कारण इन उत्पादों की हो जाए।