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Karnal News: डीपफेक वीडियो बनाकर लड़कियों को किया जा रहा ब्लैकमेल
Sat, 10 Jan 2026 01:40 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Sat, 10 Jan 2026 01:40 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। ग्रोक और जेमिनी जैसे एआई टूल्स से डीपफेक वीडियो बनाकर लड़कियों को ब्लैकमेल किया जा रहा है। महिला थाना प्रभारी कन्नू प्रिया ने बताया कि हर माह दो से तीन ऐसे मामले पहुंच रहे हैं, जिनमें फर्जी प्रोफाइल, डीपफेक फोटो-वीडियो, आपत्तिजनक कंटेंट और धमकी भरे मैसेज के जरिये ब्लैकमेल किया जा रहा है।
कन्नू प्रिया ने बताया कि अपराधी युवतियों से संपर्क के लिए सबसे पहले ट्यूशन क्लास, ऑनलाइन स्टडी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। पढ़ाई या प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी बातचीत के बहाने पहचान बनाकर वे धीरे-धीरे भरोसा जीतते हैं। इसके बाद व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम या स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म पर निजी जानकारी जुटाई जाती है। अधिकतर मामलों में शुरुआत सामान्य बातचीत से होती है। भरोसा बनने के बाद फोटो, वीडियो या वॉयस नोट मांगे जाते हैं, जिन्हें बाद में ब्लैकमेलिंग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके लिए अभिभावकों को भी जागरूक होना बेहद जरूरी है कि वह अपने बच्चों पर व घर की महिलाओं पर भरोसा कर पहले जांच करें।
कन्नूप्रिया ने बताया कि ग्रोक और जेमिनी जैसे एआई टूल्स से फोटो और वीडियो एडिट करना आसान हो गया है। एक साधारण तस्वीर को आपत्तिजनक रूप देकर युवतियों को मानसिक रूप से तोड़ा जा रहा है। कई बार पीड़िता डर के कारण परिवार को भी कुछ नहीं बताती जिसके कारण तनाव व कई बार मरने तक के कदम भी उठा लिए जाते हैं। लेकिन अब युवतियों में जागरूकता भी आ रही हैं, जिसमें वह तुरंत शिकार होने के बजाय शिकायत दर्ज कर रहे हैं।
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-केस-1
ऑनलाइन ट्यूशन के बहाने किया संपर्क
19 वर्षीय एक छात्रा, जो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए ऑनलाइन ट्यूशन ले रही थी, उससे एक युवक ने खुद को उसी कोर्स का छात्र बताकर संपर्क किया। शुरुआत पढ़ाई से जुड़ी बातचीत से हुई। धीरे-धीरे दोस्ती बढ़ी और युवक ने वीडियो कॉल और फोटो शेयर करने का दबाव बनाया। कुछ समय बाद एआई टूल की मदद से उसकी फोटो को एडिट कर आपत्तिजनक रूप दिया गया और उसे भेजकर धमकी दी गई कि अगर 50 हजार रुपये नहीं दिए तो तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर दी जाएंगी। छात्रा ने अपने परिवार को बात बताई जिसके बाद शिकायत दर्ज कर अपराधी तक पहुंचा गया।
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केस-2
स्क्रीनशॉट भेजकर डराया
22 वर्षीय युवती की इंस्टाग्राम पर एक प्रोफाइल से दोस्ती हुई। प्रोफाइल आकर्षक और भरोसेमंद लग रही थी। कुछ दिनों की बातचीत के बाद आरोपी ने चैट के स्क्रीनशॉट और एडिटेड वीडियो भेजकर ब्लैकमेल करना शुरू किया। वीडियो पूरी तरह डीपफेक था, जिसे ग्रोक जैसे एआई टूल की मदद से तैयार किया गया था। आरोपी ने धमकी दी कि अगर वह उसकी बात नहीं मानेगी तो वीडियो परिवार और कॉलेज ग्रुप में भेज दिया जाएगा। पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर महिला थाने से संपर्क किया जिसके बाद पुलिस ने फर्जी प्रोफाइल को ट्रेस कर साइबर कानून के तहत कार्रवाई की।
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करनाल। ग्रोक और जेमिनी जैसे एआई टूल्स से डीपफेक वीडियो बनाकर लड़कियों को ब्लैकमेल किया जा रहा है। महिला थाना प्रभारी कन्नू प्रिया ने बताया कि हर माह दो से तीन ऐसे मामले पहुंच रहे हैं, जिनमें फर्जी प्रोफाइल, डीपफेक फोटो-वीडियो, आपत्तिजनक कंटेंट और धमकी भरे मैसेज के जरिये ब्लैकमेल किया जा रहा है।
कन्नू प्रिया ने बताया कि अपराधी युवतियों से संपर्क के लिए सबसे पहले ट्यूशन क्लास, ऑनलाइन स्टडी प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। पढ़ाई या प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी बातचीत के बहाने पहचान बनाकर वे धीरे-धीरे भरोसा जीतते हैं। इसके बाद व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम या स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म पर निजी जानकारी जुटाई जाती है। अधिकतर मामलों में शुरुआत सामान्य बातचीत से होती है। भरोसा बनने के बाद फोटो, वीडियो या वॉयस नोट मांगे जाते हैं, जिन्हें बाद में ब्लैकमेलिंग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके लिए अभिभावकों को भी जागरूक होना बेहद जरूरी है कि वह अपने बच्चों पर व घर की महिलाओं पर भरोसा कर पहले जांच करें।
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कन्नूप्रिया ने बताया कि ग्रोक और जेमिनी जैसे एआई टूल्स से फोटो और वीडियो एडिट करना आसान हो गया है। एक साधारण तस्वीर को आपत्तिजनक रूप देकर युवतियों को मानसिक रूप से तोड़ा जा रहा है। कई बार पीड़िता डर के कारण परिवार को भी कुछ नहीं बताती जिसके कारण तनाव व कई बार मरने तक के कदम भी उठा लिए जाते हैं। लेकिन अब युवतियों में जागरूकता भी आ रही हैं, जिसमें वह तुरंत शिकार होने के बजाय शिकायत दर्ज कर रहे हैं।
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-केस-1
ऑनलाइन ट्यूशन के बहाने किया संपर्क
19 वर्षीय एक छात्रा, जो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए ऑनलाइन ट्यूशन ले रही थी, उससे एक युवक ने खुद को उसी कोर्स का छात्र बताकर संपर्क किया। शुरुआत पढ़ाई से जुड़ी बातचीत से हुई। धीरे-धीरे दोस्ती बढ़ी और युवक ने वीडियो कॉल और फोटो शेयर करने का दबाव बनाया। कुछ समय बाद एआई टूल की मदद से उसकी फोटो को एडिट कर आपत्तिजनक रूप दिया गया और उसे भेजकर धमकी दी गई कि अगर 50 हजार रुपये नहीं दिए तो तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर दी जाएंगी। छात्रा ने अपने परिवार को बात बताई जिसके बाद शिकायत दर्ज कर अपराधी तक पहुंचा गया।
केस-2
स्क्रीनशॉट भेजकर डराया
22 वर्षीय युवती की इंस्टाग्राम पर एक प्रोफाइल से दोस्ती हुई। प्रोफाइल आकर्षक और भरोसेमंद लग रही थी। कुछ दिनों की बातचीत के बाद आरोपी ने चैट के स्क्रीनशॉट और एडिटेड वीडियो भेजकर ब्लैकमेल करना शुरू किया। वीडियो पूरी तरह डीपफेक था, जिसे ग्रोक जैसे एआई टूल की मदद से तैयार किया गया था। आरोपी ने धमकी दी कि अगर वह उसकी बात नहीं मानेगी तो वीडियो परिवार और कॉलेज ग्रुप में भेज दिया जाएगा। पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर महिला थाने से संपर्क किया जिसके बाद पुलिस ने फर्जी प्रोफाइल को ट्रेस कर साइबर कानून के तहत कार्रवाई की।