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Karnal News: बाढ़ का कहर, हर तरफ बर्बादी का मंजर
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बाढ़ का कहर, हर तरफ बर्बादी का मंजर
- गढ़पुर टापू का तटबंध बना नहीं, एक अन्य में आई दरार, 30 सरकारी स्कूलों में भरा पानी
प्रवीण कुमार
इंद्री। गढ़पुर टापू के पास टूटे तटबंध को प्रशासन बुधवार तक भी नहीं बना सका है, हालांकि इसे 24 घंटे में बना लेने का दावा किया गया था। वहीं, बुधवार अल सुबह समसपुर गांव के पास भी तटबंध में दरार आ गई। जिसकी वजह से समसपुर, मुस्सेपुर, करतारपुर और कलसौरा गांव में काफी पानी भर गया। मुस्सेपुर और समसपुर में तो पानी घरों में घुस गया, जिसके कारण ग्रामीणों को अपने चौबारों पर शरण लेनी पड़ी। यहां तक कि कई मकानों में दरारें आ गईं।
ग्रामीणों के मुताबिक अब तक करीब 27 गांवों को बाढ़ ने चपेट में ले लिया है, इनमें से 11 गांवों का शहर से संपर्क पूरी तरह से कटा है। चारों ओर तबाही का मंजर साफ देखा जा सकता है। इन गांवों में करीब 30 सरकारी स्कूल है, इनमें भी पानी भर गया है। समसपुर गांव के पास तटबंध टूटने के कारण बदरपुर, बीबीपुर ब्राहणान, डेरा हलवाना, ब्याना, डबकौली, रंदौली आदि गांव पूरी तरह से प्रभावित हो चुके हैं। यदि पानी कम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में चारों तरफ बर्बादी का दृश्य ही देखने को मिलेगा। बुधवार को सेना भी आई, लेकिन तटबंध को बनाने का काम शुरू नहीं हुआ। मंगलवार बाद बुधवार को भी मौका मुआयना कर सेना लौट गई।
ग्रामीण बोले, 1978 से ज्यादा बुरा हाल
ग्रामीण जसपाल सिंह, विरेंद्र सिंह, संजीव कुमार और धर्मवीर आर्य का कहना है कि वर्ष 1978 में गढ़ी बीरबल के पास तटबंध टूट गया था। जिस कारण आसपास के सभी गांवों में बाढ़ आ गई थी। काफी पशुओं की भी मौत हुई थी। लेकिन इस बाढ़ ने तो 1978 का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। उस समय भी इतने बुरे हालात नहीं थे, जितने अब हो चुके हैं। यह केवल प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है। यदि प्रशासन समय रहते तटबंध की मरम्मत करवाता तो यह परिणाम नहीं होते।
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प्रशासन पर अनदेखी का आरोप
मुस्सेपुर निवासी सलिंद्र कुमार का कहना है कि पड़ोसी कपूर अली का मकान रात को ढह गया था। पड़ोसियों ने मुश्किल से पूरे परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला गया। प्रशासन की ओर से उन्हें कोई सहायता नहीं मिली। आरोप है कि प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को कोई राहत सामग्री भी नहीं उपलब्ध करवाई जा रही है।
हथिनीकुंड बैराज पर दर्ज पानी की स्थिति
सुबह 10 बजे 1 लाख 42 हजार क्यूसेक
दोपहर 12 बजे 1 लाख 36 हजार क्यूसेक
दोपहर 3 बजे 1 लाख 30 हजार क्यूसेक
शाम 5 बजे 1 लाख 27 हजार क्यूसेक
शाम 6 बजे 1 लाख 30 हजार 604 क्यूसेक
वर्जन : तटबंध बनाने का कार्य जारी
दोनों तटबंधों को बनाने का कार्य जारी है। सभी बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों की हर संभव सहायता की जा रही है।
- अशोक कुमार, एसडीएम, इंद्री
तिल की फसल खराब, पावर हाउस में घुसा पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
असंध। दर्जनों गांवों में बरसात के बाद हालात बद से बदतर हो रहे हैं। पानी ज्यादा आ जाने की वजह से फसल बर्बाद होने के साथ ही पावर हाउस में भी पानी घुस गया है। नुकसान का खतरा मंडरा रहा है। पानी निकासी की व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो चुकी है। सालवन गांव निवासी निशु, राकेश, मनोज, राहुल, कृष्ण, गोपाल, जगता, सोहन आदि ने बताया कि गांव में फसल बर्बाद हो चुकी है। माता मनसा देवी मंदिर के तीन एकड़ में बोई गई तिल की फसल भी ज्यादा बारिश की वजह से खराब हो गई है। ग्रामीणों ने बताया कि ड्रेन में पीछे से बरसात का ज्यादा पानी आने की वजह से यह स्थिति पैदा हुई है । ग्रामीणों ने बताया कि ड्रेन की सफाई न होने की वजह से पानी की निकासी नहीं हो सकी । जिसकी वजह से सालवन पावर हाउस के अंदर भी पानी घुस गया । ट्रांसफार्मर के पास पानी ज्यादा होने की वजह से हादसे का डर सता रहा गई। बिजली व्यवस्था सुचारू रूप से चलने के लिए पानी की निकासी जल्द से जल्द हो। इसके लिए ग्रामीण प्रयास कर रहे है। ग्रामीणों ने मांग की है कि सहायता की जानी चाहिए।
विधायक ने बुलाई आपात बैठक, सावधान रहने का निर्देश
घरौंडा। इंद्री क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति के बाद पानी का बहाव धीरे-धीरे दक्षिण दिशा की ओर हो गया है, जिसके पुरानी यमुना एवं अन्य नालों के माध्यम से घरौंडा विधानसभा की यमुना बेल्ट के कुछ गांवों तक पहुंचने की आशंका है। इस आशंका के चलते घरौंडा विधायक हरविंदर कल्याण ने बुधवार की देर रात कार्यकर्ताओं के साथ आपात बैठक पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में की। इस स्थिति से निपटने के लिए रूपरेखा तैयार की और ग्रामीणों की हर संभव मदद करने को लेकर चर्चा की। विधायक कल्याण ने कहा कि क्षेत्र के जो गांव ड्रेनों या पुरानी छोटी यमुना के नजदीक लगते हैं या निचले इलाके में बसें हैं, वहां के ग्रामीणों को सजग एवं सावधान रहने की सूचना दी जाए।
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प्रवीण कुमार
इंद्री। गढ़पुर टापू के पास टूटे तटबंध को प्रशासन बुधवार तक भी नहीं बना सका है, हालांकि इसे 24 घंटे में बना लेने का दावा किया गया था। वहीं, बुधवार अल सुबह समसपुर गांव के पास भी तटबंध में दरार आ गई। जिसकी वजह से समसपुर, मुस्सेपुर, करतारपुर और कलसौरा गांव में काफी पानी भर गया। मुस्सेपुर और समसपुर में तो पानी घरों में घुस गया, जिसके कारण ग्रामीणों को अपने चौबारों पर शरण लेनी पड़ी। यहां तक कि कई मकानों में दरारें आ गईं।
ग्रामीणों के मुताबिक अब तक करीब 27 गांवों को बाढ़ ने चपेट में ले लिया है, इनमें से 11 गांवों का शहर से संपर्क पूरी तरह से कटा है। चारों ओर तबाही का मंजर साफ देखा जा सकता है। इन गांवों में करीब 30 सरकारी स्कूल है, इनमें भी पानी भर गया है। समसपुर गांव के पास तटबंध टूटने के कारण बदरपुर, बीबीपुर ब्राहणान, डेरा हलवाना, ब्याना, डबकौली, रंदौली आदि गांव पूरी तरह से प्रभावित हो चुके हैं। यदि पानी कम नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में चारों तरफ बर्बादी का दृश्य ही देखने को मिलेगा। बुधवार को सेना भी आई, लेकिन तटबंध को बनाने का काम शुरू नहीं हुआ। मंगलवार बाद बुधवार को भी मौका मुआयना कर सेना लौट गई।
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ग्रामीण बोले, 1978 से ज्यादा बुरा हाल
ग्रामीण जसपाल सिंह, विरेंद्र सिंह, संजीव कुमार और धर्मवीर आर्य का कहना है कि वर्ष 1978 में गढ़ी बीरबल के पास तटबंध टूट गया था। जिस कारण आसपास के सभी गांवों में बाढ़ आ गई थी। काफी पशुओं की भी मौत हुई थी। लेकिन इस बाढ़ ने तो 1978 का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। उस समय भी इतने बुरे हालात नहीं थे, जितने अब हो चुके हैं। यह केवल प्रशासन की लापरवाही का नतीजा है। यदि प्रशासन समय रहते तटबंध की मरम्मत करवाता तो यह परिणाम नहीं होते।
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प्रशासन पर अनदेखी का आरोप
मुस्सेपुर निवासी सलिंद्र कुमार का कहना है कि पड़ोसी कपूर अली का मकान रात को ढह गया था। पड़ोसियों ने मुश्किल से पूरे परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला गया। प्रशासन की ओर से उन्हें कोई सहायता नहीं मिली। आरोप है कि प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को कोई राहत सामग्री भी नहीं उपलब्ध करवाई जा रही है।
हथिनीकुंड बैराज पर दर्ज पानी की स्थिति
सुबह 10 बजे 1 लाख 42 हजार क्यूसेक
दोपहर 12 बजे 1 लाख 36 हजार क्यूसेक
दोपहर 3 बजे 1 लाख 30 हजार क्यूसेक
शाम 5 बजे 1 लाख 27 हजार क्यूसेक
शाम 6 बजे 1 लाख 30 हजार 604 क्यूसेक
वर्जन : तटबंध बनाने का कार्य जारी
दोनों तटबंधों को बनाने का कार्य जारी है। सभी बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। प्रशासन की ओर से ग्रामीणों की हर संभव सहायता की जा रही है।
- अशोक कुमार, एसडीएम, इंद्री
तिल की फसल खराब, पावर हाउस में घुसा पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
असंध। दर्जनों गांवों में बरसात के बाद हालात बद से बदतर हो रहे हैं। पानी ज्यादा आ जाने की वजह से फसल बर्बाद होने के साथ ही पावर हाउस में भी पानी घुस गया है। नुकसान का खतरा मंडरा रहा है। पानी निकासी की व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो चुकी है। सालवन गांव निवासी निशु, राकेश, मनोज, राहुल, कृष्ण, गोपाल, जगता, सोहन आदि ने बताया कि गांव में फसल बर्बाद हो चुकी है। माता मनसा देवी मंदिर के तीन एकड़ में बोई गई तिल की फसल भी ज्यादा बारिश की वजह से खराब हो गई है। ग्रामीणों ने बताया कि ड्रेन में पीछे से बरसात का ज्यादा पानी आने की वजह से यह स्थिति पैदा हुई है । ग्रामीणों ने बताया कि ड्रेन की सफाई न होने की वजह से पानी की निकासी नहीं हो सकी । जिसकी वजह से सालवन पावर हाउस के अंदर भी पानी घुस गया । ट्रांसफार्मर के पास पानी ज्यादा होने की वजह से हादसे का डर सता रहा गई। बिजली व्यवस्था सुचारू रूप से चलने के लिए पानी की निकासी जल्द से जल्द हो। इसके लिए ग्रामीण प्रयास कर रहे है। ग्रामीणों ने मांग की है कि सहायता की जानी चाहिए।
विधायक ने बुलाई आपात बैठक, सावधान रहने का निर्देश
घरौंडा। इंद्री क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति के बाद पानी का बहाव धीरे-धीरे दक्षिण दिशा की ओर हो गया है, जिसके पुरानी यमुना एवं अन्य नालों के माध्यम से घरौंडा विधानसभा की यमुना बेल्ट के कुछ गांवों तक पहुंचने की आशंका है। इस आशंका के चलते घरौंडा विधायक हरविंदर कल्याण ने बुधवार की देर रात कार्यकर्ताओं के साथ आपात बैठक पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में की। इस स्थिति से निपटने के लिए रूपरेखा तैयार की और ग्रामीणों की हर संभव मदद करने को लेकर चर्चा की। विधायक कल्याण ने कहा कि क्षेत्र के जो गांव ड्रेनों या पुरानी छोटी यमुना के नजदीक लगते हैं या निचले इलाके में बसें हैं, वहां के ग्रामीणों को सजग एवं सावधान रहने की सूचना दी जाए।