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Karnal: 81 की उम्र में पूर्व सैनिक हुआ स्नातक, जिंदगी की जंग लड़े दंपती बने काउंसलर

Tue, 04 Apr 2023 10:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो गगन तलवार, करनाल (हरियाणा)
गगन तलवार, करनाल (हरियाणा) Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 04 Apr 2023 10:03 AM IST
सार

सेना में रहकर तीन युद्ध लड़ चुके सिरसा के लाल चंद गोदारा को उच्च शिक्षा के लिए उनकी दोनों पोतियों ने प्रेरित किया, जो स्वयं एमबीबीएस कर रही है। दादा से स्नेह होने के कारण वे उन्हें भी अपने साथ पढ़ने के लिए प्रेरित करती रही। अब दादा लाल चंद इग्नू से एमए की पढ़ाई करेंगे।

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Ex-serviceman graduated at the age of 81, couple fought for life, became counselors
81 की उम्र में पूर्व सैनिक हुआ स्नातक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कई बार हालात और दूसरे से मिला प्रोत्साहन भी उच्च शिक्षा की राह खोलता है, जो न केवल हमारी काबिलियत को बढ़ाता है, बल्कि दूसरों के जीवन में भी उजियारा ला सकता है। सोमवार को इग्नू के करनाल क्षेत्रीय कार्यालय में हुए दीक्षांत समारोह में ऐसे कई उदाहरण देखने को मिले। इनमें से एक हैं सिरसा के पूर्व सैनिक, जिन्होंने 81 की उम्र में बीए की पढ़ाई पूरी की है। वहीं एक चंडीगढ़ के दंपती ने मास्टर इन सोशल वर्क काउंसिलिंग (एमएसडब्ल्यूसी) की डिग्री प्राप्त की है। पति-पत्नी अब लीवर ट्रांसप्लांट को लेकर जागरूकता अभियान चलाएंगे।

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अब तक 40 से ज्यादा पदक जीत चुके
सेना में रहकर तीन युद्ध लड़ चुके सिरसा के लाल चंद गोदारा को उच्च शिक्षा के लिए उनकी दोनों पोतियों ने प्रेरित किया, जो स्वयं एमबीबीएस कर रही है। दादा से स्नेह होने के कारण वे उन्हें भी अपने साथ पढ़ने के लिए प्रेरित करती रही। अब दादा लाल चंद इग्नू से एमए की पढ़ाई करेंगे। खेलों में हिस्सा लेते हुए भी वे अब तक 40 से ज्यादा पदक जीत चुके हैं।
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दूसरों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाएंगे।
वहीं चंडीगढ़ प्रशासन में एकाउंट अफसर प्रवीण कुमार और सरकारी स्कूल की शिक्षिका रूपा ने भी प्रवीण की बीमारी में पैदा हुए हालात से आगे पढ़ने की प्रेरणा ली। लीवर की समस्या झेल रहे प्रवीण को पत्नी रूपा ने लीवर दिया है। लीवर ट्रांसप्लांट कराने को लेकर या इस बीमारी में होने वाली दिक्कतों से किसी की जान न जाए, इसलिए दोनों ने मास्टर डिग्री करके काउंसलर बनने की ठानी, जो अब दूसरों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाएंगे।

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रोजाना 11 किमी. दौड़ लगा 18 वर्ष के युवा जैसा जोश

लाल चंद गौदारा ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि उन्होंने 1962, 65 और 71 की लड़ाई में सैनिक के रूप में काम करके दुश्मन के छक्के छुड़ाए। 1972 से लेकर 2002 तक परिवहन विभाग में यार्ड मास्टर के रूप में सेवाएं दीं। नौकरी पूरी करने के बाद उन्होंने हैमर और डिसकस थ्रो खेलना शुरू किया तो अब तक 40 से ज्यादा पदक जीत चुके हैं। रोजाना 11 किलोमीटर की दौड़ लगाकर खुद में 81 की उम्र में 18 जैसा जोश बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि आलसी को न कभी विद्या मिलती है न ही आराम। इसलिए जिस उम्र में लोग आराम करते हैं, उस आयु में पढ़ रहे हैं।

12 साल झेला दर्द, कोई और न कराहे इसलिए की पढ़ाई

चंडीगढ़ की रूपा ने बताया कि उनके पति प्रवीण कुमार लीवर की दिक्कत के कारण 12 साल तक बेड पर रहे। उन्होंने अपना लीवर डोनेट किया तो जिंदगी बची। ऑर्गन डोनेशन की वैल्यू समझते हैं, इसके लिए तैयार होने के लिए काउंसलिंग की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि पति के इलाज के लिए कई जगह चक्कर काटने पर भी रास्ता नहीं मिला। ऐसा किसी अन्य के साथ न हो, जानकारी के अभाव में कोई जान न गंवाए, इसलिए उन्होंने एमएसडब्ल्यूसी की डिग्री लेने की ठानी। यह डिग्री लीवर मरीजों को समर्पित करते हुए उन्होंने जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है।

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