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Karnal News: डीसी के आदेश पर भी नहर किनारे पर दीवार बनी न ग्रिल लगी
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डीसी के आदेश पर भी नहर किनारे पर दीवार बनी न ग्रिल लगी
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल।
नहरों की पटरी तो दूर, इन्हें पार करने के लिए बनाए हुए पुल भी खतरे से खाली नहीं है। पुलों के किनारे पर सुरक्षा दीवार नहीं है। ग्रिल टूटी हुई हैं। यह हालात तब हैं, जब दो माह पहले उपायुक्त उत्तम सिंह और अतिरिक्त उपायुक्त सोनू भट्ट सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सिंचाई विभाग के अधिकारियों से नहर के किनारों के हालात दुरुस्त करने के लिए आदेश दे चुके हैं। अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सोमवार की रात को जटपुरा में हुआ हादसा भी इसी लापरवाही का नतीजा है।
यह स्थिति शहर से गुजर रह रही सभी नहरों के किनारों की की है। हालात यह हैं कि वाहन चालक से थोड़ी सी लापरवाही हुई नहीं और गाड़ी सीधा नहर के अंदर। क्योंकि नहर पर बने पुलों के साथ से गुजर रही पटरी पर ग्रिल नहीं है। रात में हादसे की आशंका और ज्यादा बढ़ जाती है। किसी पुल पर ट्रैफिक सिग्नल या स्ट्रीट लाइट भी नहीं है, जिसे देखकर चालक दूर से स्थिति को भांप ले।
हर माह होने वाली सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में भी केवल सड़कों को सुरक्षित बनाने के दावे किए जाते हैं, जबकि धरातल पर स्थिति नहीं बदलती। शहर में सड़कों के गड्ढे नहीं भरे गए हैं। राजमार्गों पर नहरों के पुल हादसों को न्यौता दे रहे हैं। पश्चिमी यमुना नहर के किनारे पर 10 दिनों में ग्रिल लगाकर सभी अवैध कट बंद करने का दावा अधिकारियों ने अक्तूबर माह में हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में किया था। यह काम अब तक पूरा नहीं हुआ है।
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नहर किनारों पर ये होना चाहिए
- नहर पर बने पुलों के साथ करीब 10 मीटर तक ग्रिल होनी चाहिए।
- नहरों के पुल के पास संकेतक, लाइट या सूचना बोर्ड होना चाहिए।
- नहरों के पास जहां सड़क हो, वहां स्ट्रीट लाइट होनी चाहिए।
- आबादी क्षेत्र में नहर किनारे ग्रिल होनी चाहिए।
- पश्चिमी बाईपास पर जहां कट है, उसे बंद करना चाहिए।
(सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ शुभम और एडवोकेट संदीप के अनुसार)
यह है स्थिति
- गांव सूभरी की ओर आवर्धन नहर पर नया पुल बनाया गया है। यह सड़क से तिरछा है। सुभरी की तरफ से आते वाहनों को पुल पर चढ़ने के लिए मोड़ लेना पड़ता है। यहां नहर किनारों पर कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं है।
- पश्चिमी यमुना बाईपास से नहर किनारे अवैध रूप से कई कट बने हुए हैं।
- घोघड़ीपुर नहर किनारे पर लगी ग्रिल भी एक जगह आकर खत्म हो जाती है। इसके बाद मिट्टी के कच्चे रास्ते पर लोग नहर किनारे घूमते हैं। यहां से कभी हादसा हो सकता है। - काछवा रोड पर भाखड़ा नहर की पटरी से भी अक्सर वाहन पास के गांवों के लिए गुजरते हैं। यहां नहर पर बने लोहे के पुल पर कोई ग्रिल या लाइट नहीं है।
अब तक हादसे
- नेवल रोड पर स्थित नर्दक नहर में 23 दिसंबर, 2024 की रात को दो बाइक सवार युवक 30 फीट गहरी सूखी नहर में गिर गए थे।
- 31 जुलाई को कारोबारी अमित मिगलानी दंपती की कार भी पश्चिमी यमुना नहर में गिरी थी।
- 22 जुलाई को भाखड़ा नहर में कुरुक्षेत्र के युवकों की कार गिरी थी।
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नहरों की छोटी पुलियों के रखरखाव का कार्य सिंचाई विभाग के पास है और मुख्य मार्गों के पुलों का रखरखाव और मरम्मत कार्य पीडब्ल्यूडी करता है। जटपुरा में नहर की पुलिया को चौड़ा किया जाना है। यहां नया पुल बनेगा। दोबारा कोई हादसा न हो, इसके लिए सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। - रणबीर त्यागी, एक्सईएन सिंचाई विभाग
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करनाल।
नहरों की पटरी तो दूर, इन्हें पार करने के लिए बनाए हुए पुल भी खतरे से खाली नहीं है। पुलों के किनारे पर सुरक्षा दीवार नहीं है। ग्रिल टूटी हुई हैं। यह हालात तब हैं, जब दो माह पहले उपायुक्त उत्तम सिंह और अतिरिक्त उपायुक्त सोनू भट्ट सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में सिंचाई विभाग के अधिकारियों से नहर के किनारों के हालात दुरुस्त करने के लिए आदेश दे चुके हैं। अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सोमवार की रात को जटपुरा में हुआ हादसा भी इसी लापरवाही का नतीजा है।
यह स्थिति शहर से गुजर रह रही सभी नहरों के किनारों की की है। हालात यह हैं कि वाहन चालक से थोड़ी सी लापरवाही हुई नहीं और गाड़ी सीधा नहर के अंदर। क्योंकि नहर पर बने पुलों के साथ से गुजर रही पटरी पर ग्रिल नहीं है। रात में हादसे की आशंका और ज्यादा बढ़ जाती है। किसी पुल पर ट्रैफिक सिग्नल या स्ट्रीट लाइट भी नहीं है, जिसे देखकर चालक दूर से स्थिति को भांप ले।
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हर माह होने वाली सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में भी केवल सड़कों को सुरक्षित बनाने के दावे किए जाते हैं, जबकि धरातल पर स्थिति नहीं बदलती। शहर में सड़कों के गड्ढे नहीं भरे गए हैं। राजमार्गों पर नहरों के पुल हादसों को न्यौता दे रहे हैं। पश्चिमी यमुना नहर के किनारे पर 10 दिनों में ग्रिल लगाकर सभी अवैध कट बंद करने का दावा अधिकारियों ने अक्तूबर माह में हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में किया था। यह काम अब तक पूरा नहीं हुआ है।
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नहर किनारों पर ये होना चाहिए
- नहर पर बने पुलों के साथ करीब 10 मीटर तक ग्रिल होनी चाहिए।
- नहरों के पुल के पास संकेतक, लाइट या सूचना बोर्ड होना चाहिए।
- नहरों के पास जहां सड़क हो, वहां स्ट्रीट लाइट होनी चाहिए।
- आबादी क्षेत्र में नहर किनारे ग्रिल होनी चाहिए।
- पश्चिमी बाईपास पर जहां कट है, उसे बंद करना चाहिए।
(सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ शुभम और एडवोकेट संदीप के अनुसार)
यह है स्थिति
- गांव सूभरी की ओर आवर्धन नहर पर नया पुल बनाया गया है। यह सड़क से तिरछा है। सुभरी की तरफ से आते वाहनों को पुल पर चढ़ने के लिए मोड़ लेना पड़ता है। यहां नहर किनारों पर कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं है।
- पश्चिमी यमुना बाईपास से नहर किनारे अवैध रूप से कई कट बने हुए हैं।
- घोघड़ीपुर नहर किनारे पर लगी ग्रिल भी एक जगह आकर खत्म हो जाती है। इसके बाद मिट्टी के कच्चे रास्ते पर लोग नहर किनारे घूमते हैं। यहां से कभी हादसा हो सकता है। - काछवा रोड पर भाखड़ा नहर की पटरी से भी अक्सर वाहन पास के गांवों के लिए गुजरते हैं। यहां नहर पर बने लोहे के पुल पर कोई ग्रिल या लाइट नहीं है।
अब तक हादसे
- नेवल रोड पर स्थित नर्दक नहर में 23 दिसंबर, 2024 की रात को दो बाइक सवार युवक 30 फीट गहरी सूखी नहर में गिर गए थे।
- 31 जुलाई को कारोबारी अमित मिगलानी दंपती की कार भी पश्चिमी यमुना नहर में गिरी थी।
- 22 जुलाई को भाखड़ा नहर में कुरुक्षेत्र के युवकों की कार गिरी थी।
नहरों की छोटी पुलियों के रखरखाव का कार्य सिंचाई विभाग के पास है और मुख्य मार्गों के पुलों का रखरखाव और मरम्मत कार्य पीडब्ल्यूडी करता है। जटपुरा में नहर की पुलिया को चौड़ा किया जाना है। यहां नया पुल बनेगा। दोबारा कोई हादसा न हो, इसके लिए सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। - रणबीर त्यागी, एक्सईएन सिंचाई विभाग

डीसी के आदेश पर भी नहर किनारे पर दीवार बनी न ग्रिल लगी