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Karnal News: 13 साल बाद भी कच्ची असंध की नई अनाज मंडी
Fri, 24 Oct 2025 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Fri, 24 Oct 2025 01:01 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
असंध। नई अनाज मंडी पार्ट-2 के जर्जर हालात को लेकर वीरवार को किसानों ने प्रदर्शन किया। किसानों ने मंडी की चहारदीवारी को पक्का करने से लेकर मंडी में सुविधाओं की मांग की। मौके पर पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के प्रधान जोगेंद्रर सिंह झींडा ने कहा कि वर्ष 2012 में नई अनाज मंडी पार्ट-2 का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। करीब 13 वर्ष बीत जाने के बाद मंडी में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मंडी की भूमि 37 एकड़ 2 कनाल है। जिसमें पांच एकड़ कच्ची पड़ी है। जिसमें किसानों की फसल मिट्टी में पड़ी रहती है। उन्होंने कहा कि मंडी में आज भी चहारदीवारी नहीं है। जिस कारण किसानों की फसल तक चोरी हो रही है। आवारा पशुओं का जमावड़ा बना रहता है। आवारा पशु मंडी में पड़ी किसानों की फसलों में मुंह मारते रहते हैं। जिस कारण किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
मंडी में पीने के पानी की सुविधा नहीं है और न ही शौचालय की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि राइस मिलर कहते हैं कि खरीद के कोटे खत्म हो गए हैं। जिस कारण स्थानीय किसानों की फसल की बिक्री नहीं हो रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मिलीभगत से यूपी व बिहार से ट्राॅलों से फसल उतरती है। स्थानीय किसानों की फसल नहीं खरीद रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि मंडी की चहारदीवारी को पक्का कर किसानों को सभी प्रकार की सुविधा प्रदान की जाए। स्थानीय किसानों की फसल की खरीद की जाए। इस अवसर पर रणधीर सिंह जलमाना, काबल सिंह, सन्नी, बलकार, विक्रम सिंह आदि उपस्थित रहे।
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असंध। नई अनाज मंडी पार्ट-2 के जर्जर हालात को लेकर वीरवार को किसानों ने प्रदर्शन किया। किसानों ने मंडी की चहारदीवारी को पक्का करने से लेकर मंडी में सुविधाओं की मांग की। मौके पर पहुंचे भारतीय किसान यूनियन के प्रधान जोगेंद्रर सिंह झींडा ने कहा कि वर्ष 2012 में नई अनाज मंडी पार्ट-2 का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। करीब 13 वर्ष बीत जाने के बाद मंडी में मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मंडी की भूमि 37 एकड़ 2 कनाल है। जिसमें पांच एकड़ कच्ची पड़ी है। जिसमें किसानों की फसल मिट्टी में पड़ी रहती है। उन्होंने कहा कि मंडी में आज भी चहारदीवारी नहीं है। जिस कारण किसानों की फसल तक चोरी हो रही है। आवारा पशुओं का जमावड़ा बना रहता है। आवारा पशु मंडी में पड़ी किसानों की फसलों में मुंह मारते रहते हैं। जिस कारण किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
मंडी में पीने के पानी की सुविधा नहीं है और न ही शौचालय की व्यवस्था है। उन्होंने कहा कि राइस मिलर कहते हैं कि खरीद के कोटे खत्म हो गए हैं। जिस कारण स्थानीय किसानों की फसल की बिक्री नहीं हो रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मिलीभगत से यूपी व बिहार से ट्राॅलों से फसल उतरती है। स्थानीय किसानों की फसल नहीं खरीद रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि मंडी की चहारदीवारी को पक्का कर किसानों को सभी प्रकार की सुविधा प्रदान की जाए। स्थानीय किसानों की फसल की खरीद की जाए। इस अवसर पर रणधीर सिंह जलमाना, काबल सिंह, सन्नी, बलकार, विक्रम सिंह आदि उपस्थित रहे।
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