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Karnal News: बड़े संस्थानों के पास और औद्योगिक क्षेत्रों में बनाएं बच्चों के लिए डे केयर
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बाल भवन के डे केयर केंद्र में खेलते बच्चे संवाद
करनाल। शहरों में बढ़ती कामकाजी महिलाओं की संख्या के साथ-साथ छोटे बच्चों की देखभाल एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। वर्तमान में जिले में कुल 11 डे केयर सेंटर संचालित हो रहे हैं। बाल भवन के अंतर्गत दो डे केयर सेंटर अलग से चलाए जा रहे हैं। इन केंद्रों में कुल 213 बच्चे आते हैं जबकि बाल भवन के दोनों केंद्रों में लगभग 60 बच्चे देखभाल के लिए पहुंचते हैं।
कामकाजी महिलाएं रोजाना सुबह से शाम तक काम पर रहती हैं ऐसे में उनके छोटे बच्चों की देखभाल करना बड़ी चुनौती हो जाती है। महिलाओं का कहना है कि बड़े-बड़े संस्थानों जैसे सचिवालय, बड़े अस्पताल, काॅलेज बैंक और औद्योगिक क्षेत्र के आसपास केंद्रों को बनाया जाना चाहिए ताकि बच्चों को वहां पर छोड़ कर बिना चिंता के काम कर सकें। जिले में केवल 11 केंद्र होना चिंता का विषय है। महिलाओं का कहना है कि जिले में डे केयर सेंटर की संख्या अभी भी जरूरत के मुकाबले काफी कम है। प्रमुख संस्थानों सचिवालय, बड़े अस्पताल, कॉलेज, औद्योगिक क्षेत्र, बैंक और अन्य सरकारी दफ्तरों में डे केयर सेंटर खोले जाएं तो हजारों कामकाजी महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा।
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प्रशिक्षित स्टाफ करता है देखभाल
बाल कल्याण अधिकारी मंजू चौधरी ने बताया कि बाल भवन के तहत दो केंद्र हैं। इनमें एक सेक्टर-7 और एक बाल भवन में संचालित है। कुल 60 बच्चे रोजाना आते हैं। प्रशिक्षित स्टाफ बच्चों के खान-पान, स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखता है।
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क्षेत्र केंद्रों की संख्या बच्चों की संख्या
शहरी क्षेत्र 5 113
इंद्री 1 31
घरौंडा 1 20
असंध 1 25
नीलोखेड़ी 2 24
पुलिस लाइन 1-- -
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डे केयर से मिलेगी सहायता
निजी कंपनी में टेली कॉलर की नौकरी करने वाली स्वाति का कहना है कि सुबह 9 से शाम 7 बजे तक वह काम पर रहती हैं। उनका दो साल का बेटा है जिसके लिए वह अपने पड़ोसी पर निर्भर रहती हैं। काॅलोनियों के आसपास डे केयर केंद्र होगा तो उनके जैसी महिलाओं को सहायता मिलेगी।
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अपनी बेटी के लिए छोड़ी नौकरी
संजना ने बताया कि उन्होंने एक साल पहले ही शिक्षिका की नौकरी छोड़ी है। काम को लेकर परिवार से दूर रहना पड़ रहा था। बेटी होने पर उसकी देखभाल के कोई नहीं था। ऐसे में नौकरी छोड़नी पड़ी। अगर केंद्रों की संख्या अधिक होगी तो महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी।
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नर्सों के लिए बहुत ही जरूरी हैं
वसंत बिहार निवासी कविता नर्स हैं। बोलीं कि नर्सों की ड्यूटी कई बार 8 से 12 घंटे तक होती है। बच्चों को घर पर छोड़ना मुश्किल हो जाता है। अस्पताल परिसर के आसपास और बड़े संस्थानों के पास डे केयर केंद्र खुलने से को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। बेफिक्र होकर ड्यूटी निभा सकेंगी।
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औद्योगिक क्षेत्रों के पास बनें केंद्र
पालम कॉलोनी निवासी सुमन जूते बनाने वाली फैक्टरी में कार्यरत हैं। बोलीं कि फैक्टरियों में काम करने वाली महिलाओं के सामने सबसे बड़ी समस्या बच्चों की देखभाल की होती है। कई महिलाएं मजबूरी में नौकरी छोड़ देती हैं। औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास डे केयर केंद्र शुरू किए जाने चाहिए।
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कामकाजी महिलाएं रोजाना सुबह से शाम तक काम पर रहती हैं ऐसे में उनके छोटे बच्चों की देखभाल करना बड़ी चुनौती हो जाती है। महिलाओं का कहना है कि बड़े-बड़े संस्थानों जैसे सचिवालय, बड़े अस्पताल, काॅलेज बैंक और औद्योगिक क्षेत्र के आसपास केंद्रों को बनाया जाना चाहिए ताकि बच्चों को वहां पर छोड़ कर बिना चिंता के काम कर सकें। जिले में केवल 11 केंद्र होना चिंता का विषय है। महिलाओं का कहना है कि जिले में डे केयर सेंटर की संख्या अभी भी जरूरत के मुकाबले काफी कम है। प्रमुख संस्थानों सचिवालय, बड़े अस्पताल, कॉलेज, औद्योगिक क्षेत्र, बैंक और अन्य सरकारी दफ्तरों में डे केयर सेंटर खोले जाएं तो हजारों कामकाजी महिलाओं को सीधा लाभ मिलेगा।
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प्रशिक्षित स्टाफ करता है देखभाल
बाल कल्याण अधिकारी मंजू चौधरी ने बताया कि बाल भवन के तहत दो केंद्र हैं। इनमें एक सेक्टर-7 और एक बाल भवन में संचालित है। कुल 60 बच्चे रोजाना आते हैं। प्रशिक्षित स्टाफ बच्चों के खान-पान, स्वास्थ्य और सुरक्षा का ध्यान रखता है।
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क्षेत्र केंद्रों की संख्या बच्चों की संख्या
शहरी क्षेत्र 5 113
इंद्री 1 31
घरौंडा 1 20
असंध 1 25
नीलोखेड़ी 2 24
पुलिस लाइन 1
डे केयर से मिलेगी सहायता
निजी कंपनी में टेली कॉलर की नौकरी करने वाली स्वाति का कहना है कि सुबह 9 से शाम 7 बजे तक वह काम पर रहती हैं। उनका दो साल का बेटा है जिसके लिए वह अपने पड़ोसी पर निर्भर रहती हैं। काॅलोनियों के आसपास डे केयर केंद्र होगा तो उनके जैसी महिलाओं को सहायता मिलेगी।
अपनी बेटी के लिए छोड़ी नौकरी
संजना ने बताया कि उन्होंने एक साल पहले ही शिक्षिका की नौकरी छोड़ी है। काम को लेकर परिवार से दूर रहना पड़ रहा था। बेटी होने पर उसकी देखभाल के कोई नहीं था। ऐसे में नौकरी छोड़नी पड़ी। अगर केंद्रों की संख्या अधिक होगी तो महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होंगी।
नर्सों के लिए बहुत ही जरूरी हैं
वसंत बिहार निवासी कविता नर्स हैं। बोलीं कि नर्सों की ड्यूटी कई बार 8 से 12 घंटे तक होती है। बच्चों को घर पर छोड़ना मुश्किल हो जाता है। अस्पताल परिसर के आसपास और बड़े संस्थानों के पास डे केयर केंद्र खुलने से को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। बेफिक्र होकर ड्यूटी निभा सकेंगी।
औद्योगिक क्षेत्रों के पास बनें केंद्र
पालम कॉलोनी निवासी सुमन जूते बनाने वाली फैक्टरी में कार्यरत हैं। बोलीं कि फैक्टरियों में काम करने वाली महिलाओं के सामने सबसे बड़ी समस्या बच्चों की देखभाल की होती है। कई महिलाएं मजबूरी में नौकरी छोड़ देती हैं। औद्योगिक क्षेत्रों के आसपास डे केयर केंद्र शुरू किए जाने चाहिए।