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Karnal News: ठंड में बढ़ रहा कानों में दर्द, ओपीडी में दोगुने हुए मरीज
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल।
सर्दी बढ़ने के साथ कानों में तेज दर्द, सुनाई कम देने, निगलने और सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं। जिला नागरिक अस्पताल में पिछले एक सप्ताह में कान के संक्रमण के मामले सामान्य दिनों की तुलना में लगभग दोगुने हो गए हैं। ईएनटी ओपीडी में रोजाना लगभग 180 मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें करीब 50 प्रतिशत कानों के संक्रमण के हैं। इनमें अधिकांश बच्चे और युवा हैं।
नागरिक अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. जयवर्धन ने बताया कि सुबह-शाम खुले कानों के साथ बाहर निकलना, बाइक चलाते समय कान न ढंकने से समस्या बढ़ रही है। सर्दी में भी ठंडे पेय या दही का सेवन बच्चों और युवाओं में संक्रमण का बड़ा कारण बन रहा है। उन्होंने बताया कि सर्दी बढ़ने पर कानों की नसें सिकुड़ती हैं। ठंडी हवा सीधे कानों तक पहुंचकर इन्फेक्शन के जोखिम को बढ़ा देती है। कई मरीजों में गले की सूजन सीधे कान तक पहुंचने से दर्द बेहद तेज हो जाता है। निगलने पर भी परेशानी महसूस हो रही है।
डॉ. जयवर्धन बताते हैं कि ठंड के मौसम में ओटिटिस पैदा करने वाले बैक्टीरिया तेजी से सक्रिय हो जा रहे हैं। सर्दी होने पर नाक और गले की नलियों में सूजन आ जाती है। यह सूजन यूस्टेशियन ट्यूब को ब्लॉक कर देती है, जिससे कान में हवा का दबाव संतुलित नहीं रहता और संक्रमण पनपने लगता है।
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- सलाह
सर्दी में हमेशा कान ढककर रखें, खासकर सुबह-शाम। ठंडे पेय और ठंडी चीजों से बचें। सर्दी-जुकाम को सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। कान में किसी भी तरह का तेल नहीं डालें। दर्द या सुनने में कमी की शुरुआत होते ही डॉक्टर से जांच कराएं।
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करनाल।
सर्दी बढ़ने के साथ कानों में तेज दर्द, सुनाई कम देने, निगलने और सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायतें तेजी से बढ़ रही हैं। जिला नागरिक अस्पताल में पिछले एक सप्ताह में कान के संक्रमण के मामले सामान्य दिनों की तुलना में लगभग दोगुने हो गए हैं। ईएनटी ओपीडी में रोजाना लगभग 180 मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें करीब 50 प्रतिशत कानों के संक्रमण के हैं। इनमें अधिकांश बच्चे और युवा हैं।
नागरिक अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. जयवर्धन ने बताया कि सुबह-शाम खुले कानों के साथ बाहर निकलना, बाइक चलाते समय कान न ढंकने से समस्या बढ़ रही है। सर्दी में भी ठंडे पेय या दही का सेवन बच्चों और युवाओं में संक्रमण का बड़ा कारण बन रहा है। उन्होंने बताया कि सर्दी बढ़ने पर कानों की नसें सिकुड़ती हैं। ठंडी हवा सीधे कानों तक पहुंचकर इन्फेक्शन के जोखिम को बढ़ा देती है। कई मरीजों में गले की सूजन सीधे कान तक पहुंचने से दर्द बेहद तेज हो जाता है। निगलने पर भी परेशानी महसूस हो रही है।
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डॉ. जयवर्धन बताते हैं कि ठंड के मौसम में ओटिटिस पैदा करने वाले बैक्टीरिया तेजी से सक्रिय हो जा रहे हैं। सर्दी होने पर नाक और गले की नलियों में सूजन आ जाती है। यह सूजन यूस्टेशियन ट्यूब को ब्लॉक कर देती है, जिससे कान में हवा का दबाव संतुलित नहीं रहता और संक्रमण पनपने लगता है।
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सर्दी में हमेशा कान ढककर रखें, खासकर सुबह-शाम। ठंडे पेय और ठंडी चीजों से बचें। सर्दी-जुकाम को सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। कान में किसी भी तरह का तेल नहीं डालें। दर्द या सुनने में कमी की शुरुआत होते ही डॉक्टर से जांच कराएं।