{"_id":"6920d2ac01470541a2016924","slug":"dye-was-mixed-in-chamcham-karnal-news-c-18-knl1018-785430-2025-11-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: चमचम में मिलाई गई थी डाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: चमचम में मिलाई गई थी डाई
विज्ञापन
करनाल। जिले की मशहूर दुकानों और डेयरियों से लिए खाद्य पदार्थों के आठ नमूनों के फेल होने का केस खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से सीजेएम व एडीसी कोर्ट में पहुंच गया है। त्योहारी सीजन में जिले से कुल 41 नमूने लिए गए थे। सात नमूने कम गुणवत्ता के और एक नमूना स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित पाया गया। नीलोखेड़ी के पंजाब स्वीट्स से चमचम का नमूना असुरक्षित मिला। इसमें बेसिक डाई कलर की मिलावट थी।
फिलहाल कोर्ट ने संबंधित प्रतिष्ठानों को अपना पक्ष रखने और पहले जांच हुए पदार्थ के नमूने को रेफरल के तौर पर दोबारा जांच कराने के लिए 30 दिन का समय दिया है। अब तक जिन दुकानों से नमूने सब-स्टैंडर्ड स्तर और अनसेफ मिले, उनमें से किसी ने भी रेफरल के लिए अपना पक्ष नहीं रखा है। दो या तीन नमूनों की रिपोर्ट आनी अभी बाकी है। नियमों के अनुसार, जिन प्रतिष्ठानों के नमूने फेल मिले हैं, उन्हें रेफरल लैब में दोबारा जांच कराने का मौका दिया जाता है। नोटिस पीरियड पूरा होने के बाद नमूने फेल होने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सात नमूने मिले थे कम गुणवत्ता के
सात नमूने कम गुणवत्ता के मिले। निगदू के बीकानेर मिष्ठान भंडार से ब्राऊन पेड़े में जो दूध इस्तेमाल किया गया उसे सही से नहीं उबाला गया था। मित्तल ट्रेडिंग कंपनी से घी के नमूने में वसा की मात्रा कम पाई गई। पनीर, पाम ऑयल और व्हाइट बटर के तीन नमूने घरौंडा की अजय डेयरी से लिए गए थे। इनमें भी वसा की मात्रा कम मिली। सेक्टर-13 की शिव डेयरी से लिए गए पनीर के नमूने में भी वसा की मात्रा कम मिली। बड़ा गांव स्थित डेयरी से पनीर व दही के नमूने भी कम गुणवत्ता के मिले।
विज्ञापन
- मद्रासी डोसा के भी नमूने मिले फेल
सितंबर में सेक्टर-13 स्थित मद्रासी डोसा से पनीर, नारियल और टमाटर की चटनी सहित तीन नमूने लिए गए थे। ये सभी फेल मिले हैं। पनीर में वसा कम पाया गया तो चटनियों में सोल्यूबल सॉलिड गड़बड़ी यानी कि चटनी में पानी की मात्रा अधिक पाई गई। रेफरल लैब में दोबारा जांच कराने का मौका दिया गया है। 30 दिन पूरे होने पर कार्रवाई की जाएगी।
-- -- -- -
दुकानदारों ने कलर का इस्तेमाल किया है जो नहीं करना चाहिए। इससे सेहत पर गहरा असर पड़ सकता है। जो केस कोर्ट में पहुंचे हैं, 30 दिन का नोटिस पीरियड ठीक होने पर कार्रवाई की जाएगी। डॉ. अमित, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी
विज्ञापन
फिलहाल कोर्ट ने संबंधित प्रतिष्ठानों को अपना पक्ष रखने और पहले जांच हुए पदार्थ के नमूने को रेफरल के तौर पर दोबारा जांच कराने के लिए 30 दिन का समय दिया है। अब तक जिन दुकानों से नमूने सब-स्टैंडर्ड स्तर और अनसेफ मिले, उनमें से किसी ने भी रेफरल के लिए अपना पक्ष नहीं रखा है। दो या तीन नमूनों की रिपोर्ट आनी अभी बाकी है। नियमों के अनुसार, जिन प्रतिष्ठानों के नमूने फेल मिले हैं, उन्हें रेफरल लैब में दोबारा जांच कराने का मौका दिया जाता है। नोटिस पीरियड पूरा होने के बाद नमूने फेल होने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
सात नमूने मिले थे कम गुणवत्ता के
सात नमूने कम गुणवत्ता के मिले। निगदू के बीकानेर मिष्ठान भंडार से ब्राऊन पेड़े में जो दूध इस्तेमाल किया गया उसे सही से नहीं उबाला गया था। मित्तल ट्रेडिंग कंपनी से घी के नमूने में वसा की मात्रा कम पाई गई। पनीर, पाम ऑयल और व्हाइट बटर के तीन नमूने घरौंडा की अजय डेयरी से लिए गए थे। इनमें भी वसा की मात्रा कम मिली। सेक्टर-13 की शिव डेयरी से लिए गए पनीर के नमूने में भी वसा की मात्रा कम मिली। बड़ा गांव स्थित डेयरी से पनीर व दही के नमूने भी कम गुणवत्ता के मिले।
विज्ञापन
- मद्रासी डोसा के भी नमूने मिले फेल
सितंबर में सेक्टर-13 स्थित मद्रासी डोसा से पनीर, नारियल और टमाटर की चटनी सहित तीन नमूने लिए गए थे। ये सभी फेल मिले हैं। पनीर में वसा कम पाया गया तो चटनियों में सोल्यूबल सॉलिड गड़बड़ी यानी कि चटनी में पानी की मात्रा अधिक पाई गई। रेफरल लैब में दोबारा जांच कराने का मौका दिया गया है। 30 दिन पूरे होने पर कार्रवाई की जाएगी।
दुकानदारों ने कलर का इस्तेमाल किया है जो नहीं करना चाहिए। इससे सेहत पर गहरा असर पड़ सकता है। जो केस कोर्ट में पहुंचे हैं, 30 दिन का नोटिस पीरियड ठीक होने पर कार्रवाई की जाएगी। डॉ. अमित, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी