फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Karnal News ›   Durga Puja

दुर्गा पूजा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 02 Oct 2022 02:54 AM IST
विज्ञापन
Durga Puja
दुर्गा पूजा का शुभारंभ करती पार्षद सरिता कालड़ा। संवाद
करनाल। बंगाली कालोनी में शनिवार की रात से दुर्गा पूजा का शुभारंभ हुआ। चार दिन तक चलने वाली पूजा के लिए नैनीताल से ब्राह्मणों को बुलाया गया है, वहीं पूजा के समय बजने वाले ढाक भी कोलकता से बुलवाए गए हैं। करनाल दुर्गा पूजा के प्रधान संतोष कर ने बताया कि क ोरोना काल के बाद इस बार दुर्गा पूजा पूरे जोरों शोरों से मनाई जाएगी।
विज्ञापन

पंडाल में पूजा करने के लिए श्रद्धालु अंजना दास, साथी पाल, नितिका शाह, शिवानी दास, सुधा बरमन, ज्योति पाल, दीपा अधिकारी रोजाना मां दुर्गा के लिए छह प्रकार की सब्जी, छह प्रकार की मिठाई और अष्टमी के दिन हलवा पूरी और छोले की सब्जी बना मां दुर्गा को भोग लगवाती हैं। दुर्गा पूजा के दौरान रोजाना दोपहर को भंडारे का आयोजन किया जाएगा। शनिवार को दुर्गा पूजा का शुभारंभ पार्षद सरिता कालड़ा ने किया। दुर्गा पूजा में पहुंचे पंडित वापी गांगुली और चंदन गांगुली ने बताया कि दुर्गा पूजा के पहले दिन अकाल बोधन किया जाता है।
विज्ञापन

ये दुर्गा पूजा का पहला दिन है। इस दिन मंत्रों के माध्यम से देवी को जगाया जाता है। बिल्वपत्र के पेड़ की पूजा कर देवी को आने के लिए निमंत्रित किया जाता है। दुर्गा पूजा के पहले दिन को कल्पारंभ भी कहते हैं, जिसका अर्थ है सृष्टि की शुरूआत का पहला दिन।
विज्ञापन
विज्ञापन

बॉक्स
नवपत्रिका पूजा
ये दुर्गा पूजा का दूसरा दिन होता है, जो नवरात्र की सप्तमी तिथि पर मनाया जाता है। इस दिन नौ तरह के पेड़ की पत्तियों को मिलाकर एक गुच्छा बनाया जाता है, इसका उपयोग देवी की पूजा में किया जाता है। इसलिए इसे नवपत्रिका पूजा कहते हैं। इनमें केला, हल्दी, दारू हल्दी, जयंती, बिल्व पत्र, अनार, अशोक, चावल और अमलतास के पत्ते होते हैं। इस दिन लड़कियां व महिलाएं पीले कपड़े पहनकर पांडालों में आती हैं।
बॉक्स
धुनुची नृत्य
नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर खास तरह के दुर्गा पांडालों में किया जाता है, जिसे धुनुची नृत्यहो कहा जाता है। इसे शक्ति नृत्य भी कहा जाता है। धुनुची (एक मिट्टी का बर्तन) में नारियल की जटा, जलते कोयले और हवन सामग्री रखकर नृत्यु किया जाता है और मां की आरती भी इसी से की जाती है। ये नृत्य और आरती बहुत ही खास तरीके से की जाती है।

बॉक्स
सिंदूर खेला और मूर्ति विसर्जन
ये दुर्गा पूजा का अंतिम दिन होता है। सिंदूर खेला उत्सव विजयादशमी पर मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं और ये कामना करती हैं कि उनकी सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। इसी दिन देवी प्रतिमाओं का विसर्जन भी किया जाता है। इसके बाद सभी लोग एक-दूसरे के घर जाकर शुभकामनाएं और मिठाईयां देते हैं
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed