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Karnal News: सामाजिक दबाव और भेदभाव कर सफलता की राह में न बनें बाधक

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 13 Feb 2025 02:36 AM IST
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Don't let social pressure and discrimination stand in the way of success.
- शहर की प्रबुद्ध महिलाएं बोलीं, समाज और पुरुषों को बदलनी होगी सोच
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संवाद न्यूज एजेंसी

करनाल। हर वर्ष 13 फरवरी राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन सरोजिनी नायडू का जन्म हुआ था है, जो स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी रहीं और भारत की पहली महिला राज्यपाल बनीं। उन्होंने अपने जीवन में महिला सशक्तीकरण, शिक्षा और समानता के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। आज महिलाएं विज्ञान, शिक्षा, राजनीति, खेल और अन्य क्षेत्रों में विशेष पहचान बना रहीं हैं, इसके बावजूद वे कई चुनौतियों का सामना कर रही हैं। कार्यस्थल पर लैंगिक भेदभाव, सामाजिक दबाव और सुरक्षा से संबंधित कई समस्याएं हैं, जिस कारण कई बार महिलाएं आगे नहीं बढ़ पाती हैं। इस संदर्भ में शहर की प्रबुद्ध महिलाओं का कहना है कि महिलाओं के प्रति भेदभाव न किया जाए। उनकी आजादी पर अंकुश लगाने का प्रयास करने से वह आगे नहीं बढ़ पाती है।



महिलाएं हर क्षेत्र में सक्षम

जिला सलाहकार नेहा शर्मा कहती हैं कि महिलाओं के जीवन में शिक्षा को लेकर सबसे बड़ी चुनौती सामने आती है। वे बताती हैं कि वह अपने परिवार की पहली लड़की रही हैं जो अच्छी शिक्षा प्राप्त करके अपने इस पद पर पहचान बनाई है। उनका मानना है कि केवल विज्ञापन देकर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देकर महिलाओं का सशक्तीकरण नहीं हो सकता है बल्कि समाज और पुरुषों को अपनी सोच बदलनी होगी कि महिलाएं हर तरह से कार्य करने में सक्षम है व उन्हें आगे बढ़ाया जाए।
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माता-पिता का साथ देना जरूरी

-जिला खेल अधिकारी सुधा भसीन बताती हैं कि परिवार ही पहली सीढ़ी होती है इसलिए परिवार में हर सदस्य को स्त्रियों को लेकर अपनी सोच सकारात्मक रखनी चाहिए। माता-पिता का स्पोर्ट मिलना जरूरी होता है जिससे हर महिला अपने डर को खत्म कर हर क्षेत्र में पहचान बना पाती हैं। दूसरी तरफ समाज सबसे बड़ी बाधा बन कर हर महिला के जीवन में चुनौती बनता है इसलिए महिलाओं को स्वयं को सशक्त करने के लिए समाज का सामना करना चाहिए।
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महिलाओं को दें सम्मान

सेवानिवृत्त प्रिंसिपल गौतम जैन ने बताया कि महिलाएं आज के समय में हर क्षेत्र में अच्छी पहचान बना रही हैं जिनमें पहली चुनौती यही देखी जाती है कि उन्हें अपना घर और कार्य दोनों को एक-साथ संभालना होता है। साथ ही उन्हें स्वयं को भी समाज और परिवार के सामने साबित करना होता है कि वह एक सशक्त महिला है। महिलाओं का सशक्तिकरण करने के लिए उन्हें हर जगह सम्मान और इज्जत देनी चाहिए।





महिलाओं की समस्याएं सुनीं जाएं

महिला आश्रम की अध्यक्ष संध्या कहती हैं कि मानसिक, पारिवारिक और सामाजिक चुनौतियों से हर महिला को लड़ना होता है, जो कि चिंता का विषय है कि आखिर उन्हें स्वयं को साबित क्यों करना पड़ता है। महिलाओं को सशक्त करने के लिए समाज को और परिवार को उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए और उनका साथ देना चाहिए ताकि वह बिना किसी रुकावट के देश हित में योगदान दे सकें।





बचपन से ही रोक-टोक शुरू

महिला एवं बाल विकास की जिला कार्यक्रम अधिकारी सीमा प्रसाद ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में शिक्षा, नौकरी और हर चीज के लिए संघर्ष किया है। महिलाओं के जीवन में चुनौती यही है कि उन्हें हर चीज संघर्ष से प्राप्त होती है। महिलाओं के जीवन में बचपन से रोक-टोक की जाती है कि वह अधिक मित्र नहीं बना सकती, पहनावे को लेकर रोक और नौकरी से ज्यादा शादी को महत्व दिया जाना जैसी चुनौतियां उनके समक्ष रहती हैं।



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आत्मनिर्भर बन स्वयं को बनाएं सशक्त

हाल ही में उप जिला शिक्षा अधिकारी पद से सेवानिवृत्त उर्वशी विग ने बताया कि महिलाओं का शिक्षित होना और आर्थिक रूप से स्वावलंबी होना बेहद जरूरी है। वे कहती हैं कि यदि महिलाएं शिक्षित हैं तो वह हर प्रकार की चुनौतियों का सामना आसानी से कर सकेंगी, साथ ही शादी से पहले और शादी के बाद भी हर महिला को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होना चाहिए ताकि वह सशक्त बन सके।





लिंग भेदभाव बढ़ा रहा चुनौती

शिक्षिका अनुपमा शर्मा ने बताया कि लिंग भेद महिलाओं के जीवन में चुनौती बनता है। आज के समय में भी लड़के और लड़कियों में भेदभाव किया जाता है। महिलाएं रात के समय नौकरी नहीं कर सकतीं। यदि किसी भी महिला के साथ कुछ अनहोनी हो जाती है तो सबसे पहले उसी महिला को दोषी ठहराया जाता है। यह मानसिकता महिलाओं के सशक्तीकरण में चुनौती बनती है।






खुद के बारे में नहीं सोचती महिलाएं

ब्लॉक संसाधन समन्वयक रेनू मलिक कहती हैं कि पारिवारिक स्थिति महिलाओं के जीवन में चुनौती बनती हैं। वह महिला अपने परिवार के लिए अपने बारे में सोचना बंद कर देती है। यदि महिलाओं को परिवार की तरफ से प्रेरित किया जाए तो वह समाज की छोटी मानसिकता को पार कर सशक्त बन सकती है।
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