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Karnal News: डिजिटल लत से मानसिक विकारों का खतरा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 02 Mar 2025 01:58 AM IST
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Digital addiction can lead to mental disorders
संवाद न्यूज एजेंसी
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करनाल। डिजिटल लत अब गंभीर मानसिक समस्या बनती जा रही है जिसकी चपेट में किशोर और युवा तेजी से आ रहे हैं।
जिला नागरिक अस्पताल से मनोचिकित्सक डॉ. निर्णय सचदेवा के अनुसार, ओपीडी में रोजाना 10 से 12 मरीज जुआ खेलने, पोर्न एडिक्शन और यौन विकारों से जुड़ी मानसिक समस्याएं लेकर आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि यह संख्या सोशल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल और कम उम्र में ही मोबाइल हाथ में आने के कारण बढ़ रही है।
करीब छह से सात साल पहले तक जब युवाओं के पास मोबाइल फोन नहीं होता था, तब तक अस्पताल में केवल एक या दो मरीज ही आता था। लेकिन आज के युवाओं में लगभग 50 प्रतिशत डिजिटल एडिक्शन के शिकार हैं, खासकर वे बच्चे जो कम उम्र से ही सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का हिस्सा बन रहे हैं।
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डॉ. सौभाग्य संधु ने बताया कि डिजिटल एडिक्शन न केवल मानसिक बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य को भी बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। अगर इसे समय रहते नियंत्रित नहीं किया जाए, तो आने वाली पीढ़ी गंभीर मानसिक विकार और कई बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं, जो उनके व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन को बर्बाद कर सकता है।
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डॉ. निर्णय सचदेवा के अनुसार, ऑनलाइन जुआ, हिंसक वीडियो गेम और एडल्ट कंटेंट युवाओं के व्यवहार को प्रभावित कर रहे हैं। गलत और आक्रामक कंटेंट देखने के कारण किशोर इसे अपनी असल जिंदगी में अपनाने या लागू करने की कोशिश करते हैं, जिससे मानसिक विकार और अधिक गहराते हैं।
लगातार स्क्रीन टाइम के कारण एकाग्रता की कमी, चिड़चिड़ापन, स्लीप डिसऑर्डर और तनाव हार्मोन बढ़ने जैसी समस्याएं जन्म ले रही हैं, जिससे मोटापा, डायबिटीज और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियां भी बढ़ रही हैं। आंखों पर भी गहरा असर पड़ना और कम उम्र में ही चश्मा लगवाने की नौबत आ रही है। उन्होंने बताया कि डिजिटल एडिक्शन के कारण युवा अपने आसपास की चीजों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते और मानसिक अस्थिरता का शिकार हो जाते हैं। नींद की कमी के कारण मस्तिष्क पूरी तरह से आराम नहीं कर पाता।
डॉ. निर्णय ने बताया कि डिसऑर्डर से बचने के कई तरीके हैं जैसे कि मोबाइल और इंटरनेट के उपयोग को सीमित करना, सोने से कम से कम एक घंटे पहले फोन बंद करना और सोशल मीडिया ब्रेक लेना मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है।

इसके लिए कई तरह के डिजिटल डिटोक्स एप का उपयोग कर सकते हैं जो समय-समय पर यह याद दिलाता है कि आप मोबाइल का ज्यादा उपयोग कर रहे हैं। व्यवसायिक चिकित्सा और नैदानिक मनोविज्ञान की कक्षा जैसे विशेष प्रशिक्षण से भी डिजिटल एडिक्शन को कम किया जाता है।
ऐसी समस्याओं को ठीक करने के लिए छह साल तक प्रशिक्षण चल सकता है।ि
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