{"_id":"691cc8eeafd48ab0b405212a","slug":"devotees-danced-on-dama-dam-mast-kalandar-karnal-news-c-18-knl1008-783410-2025-11-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: दमा दम मस्त कलंदर... पर झूमे श्रद्धालु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: दमा दम मस्त कलंदर... पर झूमे श्रद्धालु
Wed, 19 Nov 2025 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
संवाद न्यूज एजेंसी, करनाल
Updated Wed, 19 Nov 2025 12:58 AM IST
विज्ञापन
लाइटाें से सजा दरगाह
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल।
बाबा बू अली शाह कलंदर महाराज के सालाना उर्स में मंगलवार को दरगाह शरीफ पर कव्वाली हुई। मुंबई से पहुंचे सूफी गायक रईस अनीश साबरी ने बाबा की महिमा का बखान किया। उन्होंने सबसे पहले ‘दमादम मस्त कलंदर, अली दा पहला नंबर...’ गाया। पंडाल झूम उठा।
एक के बाद एक कव्वालियों का सिलसिला चलता रहा। मुझे कौन जानता था तेरी बंदगी से पहले... कव्वाली को भी काफी पसंद किया गया। इसके बाद सूफी गायक फारूख शाहरूख ने ‘बू अली शाह तेरा दामन न छोड़ेगे और हर मर्ज की दवा है मोहम्मद के शहर में’ कव्वाली गाकर कलंदर साहिब की शान में कसीदे पढ़े।
बाबा रामकरण महाराज ने बताया कि हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश से श्रद्धालु बाबा की दरगाह पर मत्था टेक कर अपनी मनोकामना पूर्ण होने की दुआ मांगते हैं। बाबा बू अली शाह कलंदर साहिब की दरगाह का इतिहास लगभग 800 साल पुराना है।
विज्ञापन
विज्ञापन
करनाल।
बाबा बू अली शाह कलंदर महाराज के सालाना उर्स में मंगलवार को दरगाह शरीफ पर कव्वाली हुई। मुंबई से पहुंचे सूफी गायक रईस अनीश साबरी ने बाबा की महिमा का बखान किया। उन्होंने सबसे पहले ‘दमादम मस्त कलंदर, अली दा पहला नंबर...’ गाया। पंडाल झूम उठा।
एक के बाद एक कव्वालियों का सिलसिला चलता रहा। मुझे कौन जानता था तेरी बंदगी से पहले... कव्वाली को भी काफी पसंद किया गया। इसके बाद सूफी गायक फारूख शाहरूख ने ‘बू अली शाह तेरा दामन न छोड़ेगे और हर मर्ज की दवा है मोहम्मद के शहर में’ कव्वाली गाकर कलंदर साहिब की शान में कसीदे पढ़े।
विज्ञापन
बाबा रामकरण महाराज ने बताया कि हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश से श्रद्धालु बाबा की दरगाह पर मत्था टेक कर अपनी मनोकामना पूर्ण होने की दुआ मांगते हैं। बाबा बू अली शाह कलंदर साहिब की दरगाह का इतिहास लगभग 800 साल पुराना है।
विज्ञापन