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पुत्र प्राप्ति के लिए दशरथ ने कराया था अश्वमेध यज्ञ : कौशिक
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संवाद न्यूज एजेंसी
घरौंडा। भगवान परशुराम मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में पंडित श्रीकृष्ण कौशिक ने कहा कि अयोध्या के राजा दशरथ की तीन रानियां थीं, कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी। पुत्र प्राप्ति के लिए राजा दशरथ ने ऋष्यशृंग मुनि से अश्वमेध यज्ञ कराया। यज्ञ के फलस्वरूप अग्नि देव ने उन्हें दिव्य खीर प्रदान की, जिसे तीनों रानियों ने ग्रहण किया। समयानुसार भगवान श्रीराम ने कौशल्या के गर्भ से जन्म लिया, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म सुमित्रा से तथा भरत का जन्म कैकेयी से हुआ। श्रीराम के जन्म पर अयोध्या में उत्सव मनाया गया। सम्पूर्ण नगर दीपों और पुष्पों से सजाया गया था।
पंडित श्रीकृष्ण ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि द्वापर युग में मथुरा में कंस नामक अत्याचारी राजा का आतंक था। कंस की बहन देवकी का विवाह वासुदेव से हुआ था। आकाशवाणी द्वारा यह भविष्यवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान कंस का वध करेगी। भयवश कंस ने देवकी और वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया और एक-एक कर उनकी सात संतानों की हत्या कर दी। जब आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया, तो उसी रात वासुदेव उन्हें लेकर गोकुल पहुंचे और यशोदा के गर्भ से जन्मी कन्या को लेकर वापस कारागार लौटे। इस प्रकार श्रीकृष्ण का बाल्यकाल गोकुल में नंद यशोदा की छत्रछाया में बीता। कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर भक्ति रस में लीन हो गए।
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घरौंडा। भगवान परशुराम मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में पंडित श्रीकृष्ण कौशिक ने कहा कि अयोध्या के राजा दशरथ की तीन रानियां थीं, कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी। पुत्र प्राप्ति के लिए राजा दशरथ ने ऋष्यशृंग मुनि से अश्वमेध यज्ञ कराया। यज्ञ के फलस्वरूप अग्नि देव ने उन्हें दिव्य खीर प्रदान की, जिसे तीनों रानियों ने ग्रहण किया। समयानुसार भगवान श्रीराम ने कौशल्या के गर्भ से जन्म लिया, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म सुमित्रा से तथा भरत का जन्म कैकेयी से हुआ। श्रीराम के जन्म पर अयोध्या में उत्सव मनाया गया। सम्पूर्ण नगर दीपों और पुष्पों से सजाया गया था।
पंडित श्रीकृष्ण ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा का भावपूर्ण वर्णन करते हुए बताया कि द्वापर युग में मथुरा में कंस नामक अत्याचारी राजा का आतंक था। कंस की बहन देवकी का विवाह वासुदेव से हुआ था। आकाशवाणी द्वारा यह भविष्यवाणी हुई कि देवकी की आठवीं संतान कंस का वध करेगी। भयवश कंस ने देवकी और वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया और एक-एक कर उनकी सात संतानों की हत्या कर दी। जब आठवीं संतान के रूप में भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म लिया, तो उसी रात वासुदेव उन्हें लेकर गोकुल पहुंचे और यशोदा के गर्भ से जन्मी कन्या को लेकर वापस कारागार लौटे। इस प्रकार श्रीकृष्ण का बाल्यकाल गोकुल में नंद यशोदा की छत्रछाया में बीता। कथा के दौरान श्रद्धालु भावविभोर होकर भक्ति रस में लीन हो गए।
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