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एक साल से खतरे भरा सफर, पुल खोखले और लेन बाधित

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 21 Aug 2022 02:36 AM IST
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Dangerous journey for a year, bridge hollow and lane obstructed
करनाल। केंद्र सरकार सड़कों के सुदृढ़ीकरण के दावे करती है लेकिन अधिकारियों की लापरवाही सरकार के दावों पर भी सवाल उठा रहे है। हालात यह हैं कि नेशनल हाईवे-44 पर लोग पिछले एक साल से खतरे भरा सफर करने को मजबूर हैं। जुलाई और अगस्त 2021 की बरसातों के बाद से तीन से चार फ्लाईओवर मिट्टी खिसकने से खोखले हैं। इसकी मरम्मत करने की बजाय एनएचएआई ने ऐसे फ्लाईओवर पर फ्लेक्सीबल पोस्ट लगाकर एक लेन को ब्लॉक कर रखा है। ऐसे में हाईवे चौड़ाई पुलों पर अचानक कम होने से हादसे हो रहे हैं।
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इस मामले को लेकर जब एनएचएआई के अधिकारियों से बात की तो उनका तर्क है कि बरसाती मौसम में मरम्मत नहीं कर सकते। बरसात रुकने के बाद ही काम शुरू करेंगे। फिर भी इन्हें ठीक करने में छह माह तक का समय लग सकता है। ऐसे में सुरक्षित सफर की कल्पना कैसे की जा सकती है, क्योंकि दो माह बाद धुंध का मौसम भी शुरू हो जाएगा। और लोगों को रात में यह ब्लॉक लेन दिखाई दे जाए, इसके लिए विभाग की ओर से सिग्नल या संकेतक तक भी नहीं लगाया गया है। कुरुक्षेत्र से करनाल की तरफ आते हुए समानाबाहू, बराना और नीलोखेड़ी के फ्लाईओवर की लेन ब्लॉक है। वर्ष 2022 में 398 सड़क हादसों में 250 से ज्यादा लोगों की जान गई और करीब 300 लोग हादसों में घायल हुए हैं। इन हादसों में करीब 87 हादसे इन्हीं तीन फ्लाईओवर पर हुए हैं। ब्यूरो
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विशेषज्ञ बोले, एक साल से क्या कर रहे अधिकारी
हर बार सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में डीसी ने इन पुलों की मरम्मत के आदेश देते हैं लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। एक साल से केवल फ्लैक्सीबल पोस्ट लगाकर वैकल्पिक व्यवस्था की गई है। इस पर सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं। एडवोेकेट राजकुमार और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ तेजपाल का कहना है कि अभी भी पुलों को ठीक करने के लिए छह माह का समय मांगा जा रहा है। पिछले एक साल में अधिकारी क्या कर रहे थे। लचर व्यवस्था के जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
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अचानक ब्रेक लगने से हादसे की संभावना ज्यादा
हाईवे पर चार पहिया एवं बड़े वाहन तेज रफ्तार से चलते हैं। तीन से पांच किलोमीटर के अंतराल में एक फ्लाईओवर आता है। ऐसे में तेज गति से तीन लेन के हाइवे पर आ रहे वाहनों के अचानक ब्रेक लगने से हादसे की संभावना ज्यादा रहती है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ शुभम भारद्वाज ने बताया कि ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एक वाहन के पीछे चल रहे वाहन को आगे की स्थिति का नहीं पता होता है। आगे चल रहा वाहन स्थिति देखकर अचानक ब्रेक लगता है तो पीछे चल रहे वाहन अगले वाहन में टकराते हैं।

वर्जन-
हमारी टीमें फ्लाईओवर की मरम्मत कर रही हैं। बरसात के कारण कई जगह स्थिति खराब हुई थी। दीवारें भी दोबारा बनाई जाएंगी। इसके लिए समय लगेगा। सुरक्षा के लिहाज से लेन ब्लॉक की हुई है। - भानू प्रताप सिंह, सेक्शन इंजीनियर, एनएचएआई।
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