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संतों के सहारे भवसागर पार संभव : सत्यानंद
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संवाद न्यूज एजेंसी
तरावड़ी। श्री आनंदपुर आश्रम मॉडल टाउन की ओर से आयोजित वार्षिक सत्संग में श्री आनंदपुर धाम से आए महात्मा सत्यानंद ने कहा कि संतों के सहारे ही इंसान की जीवन रूपी नैया भवसागर पार हो सकती है। इंसान को गुरु की शरण में जाना चाहिए। न जाने कब गुरु के आशीर्वाद से जीवन रूपी नैया पार हो जाए।
इस अवसर पर पुनीता बाई ने अपने प्रवचनों में कहा कि हमारा शरीर विकारों से भरा हुआ है। विकारों को दूर करने के लिए संस्कारों की जरूरत होती है। संस्कारों के लिए हमें अपने माता-पिता या गुरु के चरणों में जाना होगा। तभी हम विकारों को दूर कर सकते हैं। जैसे विकार दूर होंगे तो गुरु को मिलने का रास्ता नजर आएगा। गोपाल आनंद ने कहा कि इस संसार में प्रभु आने पर इंसान को गुरु नाम का ध्यान करना चाहिए। गुरु नाम ही इस भवसागर से हमें पार करवा सकता है। श्री धाम से पहुंचे संतों ने अपने गुरु भजनों से श्रद्धालुओं को निहाल किया। इस सत्संग के समापन के पश्चात भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भगत संजय, यश सलूजा, सुरेश चावला, पार्षद ओमप्रकाश मल्होत्रा के साथ अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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तरावड़ी। श्री आनंदपुर आश्रम मॉडल टाउन की ओर से आयोजित वार्षिक सत्संग में श्री आनंदपुर धाम से आए महात्मा सत्यानंद ने कहा कि संतों के सहारे ही इंसान की जीवन रूपी नैया भवसागर पार हो सकती है। इंसान को गुरु की शरण में जाना चाहिए। न जाने कब गुरु के आशीर्वाद से जीवन रूपी नैया पार हो जाए।
इस अवसर पर पुनीता बाई ने अपने प्रवचनों में कहा कि हमारा शरीर विकारों से भरा हुआ है। विकारों को दूर करने के लिए संस्कारों की जरूरत होती है। संस्कारों के लिए हमें अपने माता-पिता या गुरु के चरणों में जाना होगा। तभी हम विकारों को दूर कर सकते हैं। जैसे विकार दूर होंगे तो गुरु को मिलने का रास्ता नजर आएगा। गोपाल आनंद ने कहा कि इस संसार में प्रभु आने पर इंसान को गुरु नाम का ध्यान करना चाहिए। गुरु नाम ही इस भवसागर से हमें पार करवा सकता है। श्री धाम से पहुंचे संतों ने अपने गुरु भजनों से श्रद्धालुओं को निहाल किया। इस सत्संग के समापन के पश्चात भंडारे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भगत संजय, यश सलूजा, सुरेश चावला, पार्षद ओमप्रकाश मल्होत्रा के साथ अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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