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सुबह पांच बजे बिजली चोरी पकड़ने गांव में पहुंची बिजली निगम की टीम, ग्रामीणों ने पकड़ा, दो घंटे के बाद छुड़वाया
Updated Tue, 29 May 2018 12:28 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
करनाल।
शुगरफेड चेयरमैन के गांव शेखपुरा सुहाना में सुबह बिजली चोरी पकड़ने के लिए छापेमारी की तो ग्रामीणों ने उन्हें काबू कर लिया और गांव की चौपाल में बैठा लिया। बिजली कर्मियों ने आरोप लगाया कि ग्रामीणों ने उनके साथ मारपीट कर उन्हें बंधक बनाया है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि ये बिजली कर्मी हैं तो उन्होंने बिजली कर्मियों को एक कमरे में बैठाया था, लेकिन बिजली कर्मचारियों ने खुद ही कमरे की अंदर से कुंडी लगा ली और फोन कर अधिकारियों को बंधक बनाने की बात कहकर गुमराह किया है। इस मामले की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और बिजली कर्मियों को कमरे से बाहर निकाला। गुस्साए ग्रामीणों ने कहा कि घरों की छतों से व दीवारें फांदकर रात को कौन सी छापेमारी होती है। घरों में महिलाएं भी रहती हैं। उनकी कोई इज्जत नहीं है क्या? करीब दो घंटे के बाद बिजली कर्मचारियों को पुलिस ने बाहर निकाला। उधर, सदर थाना पुलिस ने इस मामले में 6 ग्रामीणों को नामजद करते हुए 25 अन्य लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है।
बिजली निगम के जेई सूरजमल ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देश पर वह गांव में सुबह पांच बजे बिजली चोरी पकड़ने के लिए आए थे। उनकी टीम में जेई जसबीर सिंह, लाइनमैन कुलदीप, सोमपाल, जगपाल और बलबीर के साथ तीन पुलिस कर्मचारी रहे। जब वह गांव में ग्रामीण सतपाल के घर सुबह पांच बजे पहुंचे तो उन्होंने बिजली चोरी पकड़ ली। इसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें पकड़ लिया और उनके साथ धक्कामुक्की कर उन्हें चौपाल में बंधक बना लिया और उनका सारा रिकॉर्ड भी छीन लिया है। करीब दो घंटे तक कर्मचारियों को गांव की चौपाल में बैठाया, बाद में एक कमरे में बंद कर दिया। हालांकि, आरोप है कि बिजली कर्मचारियों ने खुद ही अंदर से कुंडी लगा ली और बंधक बनाने के झूठे आरोप लगाए। इस बारे में सदर थाना प्रभारी हरजिंद्र सिंह ने बताया कि 6 लोगों को नामजद करते हुए 25 ग्रामीणों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
पॉवर हाउस को दी हुई है 40 एकड़ जमीन, बिजली आती है 6 घंटे
ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने नेवल पावर हाउस के लिए बिजली निगम को 40 एकड़ जमीन दी हुई है। उस दौरान बिजली निगम ने कहा था कि गांव में 24 घंटे बिजली दी जाएगी, लेकिन 6 घंटे भी गांव में बिजली नहीं चलती, उसमें भी कट लगते रहते हैं। बिजली न आने से ग्रामीण बहुत परेशान हो रहे हैं। बार-बार मांग करने पर भी उनकी कोई सुनवाई नहीं होती।
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रात को बिजली ठीक करने आते नहीं, सुबह छापा मारने आ जाते हैं
ग्रामीणों ने बताया कि शनिवार को पूरी रात गांव में लाइट नहीं थी, बिजली कर्मियों को कई बार फोन किया तो उन्होंने कहा कि कर्मचारी नहीं हैं। इसके बाद वे पावर हाउस में गए वहां भी कोई नहीं मिला। फोन किया तो बोले की रात को कोई कर्मचारी नहीं आने वाला। ग्रामीणों ने कहा कि रात को बिजली ठीक करने के लिए तो कोई कर्मचारी नहीं आता और सुबह छापेमारी करने के लिए आ जाते हैं।
कर्मियों का कहना 50 प्रतिशत से ज्यादा है लाइनलॉस
जेई सूरजमल ने बताया कि इस गांव में 50 प्रतिशत से ज्यादा लाइन लॉस है। जगमग योजना के तहत उस गांव में 24 घंटे बिजली दी जाएगी, जिसका लाइनलॉस 15 प्रतिशत से कम होगा। जेई ने बताया कि इस गांव में बिजली चोरी की कई शिकायतें आ चुकी हैं। इसलिए वे छापेमारी करने के लिए आए थे।
छापेमारी का ये कैसा अजीब तरीका
बिजली चोरी पकड़ने के लिए बिजली निगम के कर्मचारी रात को या सुबह गांव में छापेमारी करने के लिए जाते हैं। यदि घर का दरवाजा बंद होता है तो वे चोरों की तरह दीवार फांदकर व दूसरे की छत के सहारे घर में घुसते हैं और बिजली चोरी की वीडियो बनाते हैं। ऐसे में घर में बच्चों, महिलाओं सहित सभी सदस्य होते हैं। यह तरीका बिल्कुल गलत है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर छापेमारी करनी है तो गांव के प्रमुख लोग टीम के साथ होने चाहिए।
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करनाल।
शुगरफेड चेयरमैन के गांव शेखपुरा सुहाना में सुबह बिजली चोरी पकड़ने के लिए छापेमारी की तो ग्रामीणों ने उन्हें काबू कर लिया और गांव की चौपाल में बैठा लिया। बिजली कर्मियों ने आरोप लगाया कि ग्रामीणों ने उनके साथ मारपीट कर उन्हें बंधक बनाया है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि ये बिजली कर्मी हैं तो उन्होंने बिजली कर्मियों को एक कमरे में बैठाया था, लेकिन बिजली कर्मचारियों ने खुद ही कमरे की अंदर से कुंडी लगा ली और फोन कर अधिकारियों को बंधक बनाने की बात कहकर गुमराह किया है। इस मामले की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और बिजली कर्मियों को कमरे से बाहर निकाला। गुस्साए ग्रामीणों ने कहा कि घरों की छतों से व दीवारें फांदकर रात को कौन सी छापेमारी होती है। घरों में महिलाएं भी रहती हैं। उनकी कोई इज्जत नहीं है क्या? करीब दो घंटे के बाद बिजली कर्मचारियों को पुलिस ने बाहर निकाला। उधर, सदर थाना पुलिस ने इस मामले में 6 ग्रामीणों को नामजद करते हुए 25 अन्य लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया है।
बिजली निगम के जेई सूरजमल ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देश पर वह गांव में सुबह पांच बजे बिजली चोरी पकड़ने के लिए आए थे। उनकी टीम में जेई जसबीर सिंह, लाइनमैन कुलदीप, सोमपाल, जगपाल और बलबीर के साथ तीन पुलिस कर्मचारी रहे। जब वह गांव में ग्रामीण सतपाल के घर सुबह पांच बजे पहुंचे तो उन्होंने बिजली चोरी पकड़ ली। इसके बाद ग्रामीणों ने उन्हें पकड़ लिया और उनके साथ धक्कामुक्की कर उन्हें चौपाल में बंधक बना लिया और उनका सारा रिकॉर्ड भी छीन लिया है। करीब दो घंटे तक कर्मचारियों को गांव की चौपाल में बैठाया, बाद में एक कमरे में बंद कर दिया। हालांकि, आरोप है कि बिजली कर्मचारियों ने खुद ही अंदर से कुंडी लगा ली और बंधक बनाने के झूठे आरोप लगाए। इस बारे में सदर थाना प्रभारी हरजिंद्र सिंह ने बताया कि 6 लोगों को नामजद करते हुए 25 ग्रामीणों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
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पॉवर हाउस को दी हुई है 40 एकड़ जमीन, बिजली आती है 6 घंटे
ग्रामीणों ने कहा कि उन्होंने नेवल पावर हाउस के लिए बिजली निगम को 40 एकड़ जमीन दी हुई है। उस दौरान बिजली निगम ने कहा था कि गांव में 24 घंटे बिजली दी जाएगी, लेकिन 6 घंटे भी गांव में बिजली नहीं चलती, उसमें भी कट लगते रहते हैं। बिजली न आने से ग्रामीण बहुत परेशान हो रहे हैं। बार-बार मांग करने पर भी उनकी कोई सुनवाई नहीं होती।
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रात को बिजली ठीक करने आते नहीं, सुबह छापा मारने आ जाते हैं
ग्रामीणों ने बताया कि शनिवार को पूरी रात गांव में लाइट नहीं थी, बिजली कर्मियों को कई बार फोन किया तो उन्होंने कहा कि कर्मचारी नहीं हैं। इसके बाद वे पावर हाउस में गए वहां भी कोई नहीं मिला। फोन किया तो बोले की रात को कोई कर्मचारी नहीं आने वाला। ग्रामीणों ने कहा कि रात को बिजली ठीक करने के लिए तो कोई कर्मचारी नहीं आता और सुबह छापेमारी करने के लिए आ जाते हैं।
कर्मियों का कहना 50 प्रतिशत से ज्यादा है लाइनलॉस
जेई सूरजमल ने बताया कि इस गांव में 50 प्रतिशत से ज्यादा लाइन लॉस है। जगमग योजना के तहत उस गांव में 24 घंटे बिजली दी जाएगी, जिसका लाइनलॉस 15 प्रतिशत से कम होगा। जेई ने बताया कि इस गांव में बिजली चोरी की कई शिकायतें आ चुकी हैं। इसलिए वे छापेमारी करने के लिए आए थे।
छापेमारी का ये कैसा अजीब तरीका
बिजली चोरी पकड़ने के लिए बिजली निगम के कर्मचारी रात को या सुबह गांव में छापेमारी करने के लिए जाते हैं। यदि घर का दरवाजा बंद होता है तो वे चोरों की तरह दीवार फांदकर व दूसरे की छत के सहारे घर में घुसते हैं और बिजली चोरी की वीडियो बनाते हैं। ऐसे में घर में बच्चों, महिलाओं सहित सभी सदस्य होते हैं। यह तरीका बिल्कुल गलत है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर छापेमारी करनी है तो गांव के प्रमुख लोग टीम के साथ होने चाहिए।