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डा. दिवाकर की जमानत हुई खारिज, अब विजिलेंस कसेगी शिकंजा
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जांच के नाम पर विर्क अस्पताल के डॉ. रोहित सरदाना से 6 लाख रुपये की रिश्वत मांगने के मामले में आरोपी डॉ. दिवाकर भटनागर की जिला अदालत ने अग्रिम जमानत खारिज कर दी है। हालांकि, डॉ. दिवाकर का कहना है कि वे न्याय से लिए उच्च अदालत तक जाएंगे। उधर, अब विजिलेंस डॉ. दिवाकर पर शिकंजा कस सकती है। विजिलेंस टीम डॉ. दिवाकर की वॉयस सैंपल को जांच के लिए इसी सप्ताह मधुबन स्थित एफएसएल लैब में भेजे जाएंगे।
बता देें कि कर्ण विहार निवासी सुरेश कुमार ने फरवरी माह में विर्क अस्पताल के डॉ. रोहित सरदाना से आंख का मोतियाबिंद का ऑॅपरेशन कराया था। सुरेश ने दी शिकायत में आरोप लगाया कि आपरेशन के बाद भी उसकी नजर तेज नहीं हुई और कमजोर हो गई। सुरेश का आरोप है कि डॉ. सरदाना ने कहा था कि ऑॅपरेशन के बाद नजर तेज हो जाएगी। इसके बाद कई बार डॉ. रोहित सरदाना के पास गए, पर उनकी सुनवाई नहीं की गई। इस पर उसने मामले की शिकायत सीएम विंडो पर दी।
इस पर सीएमओ की ओर से तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई। डॉ. रजनीश गर्ग, डॉ. सतबीर व डॉ. दिवाकर भटनागर ने इसकी जांच की। इसी दौरान डॉ. रोहित सरदाना ने विजिलेंस को शिकायत दी कि डॉ. दिवाकर ने उससे जांच के नाम पर पहले 1.75 लाख रुपये मांगे और बाद में 6 लाख रुपये की डिमांड की। इतना ही नहीं डॉ. रोहित ने बाद में विजिलेंस को समझौता पत्र भी दे दिया, लेकिन विजिलेंस ने इसे दरकिनार करते हुए डॉ. दिवाकर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। इस मामले में डॉ. रोहित ने डॉ. दिवाकर की पैसे मांगने की रिकार्डिंग भी पेश की थी। विजिलेंस अब इस रिकार्डिंग की एफएसएल लैब से जांच कराने का प्रयास कर रहा है। इस बारे में विजिलेंस करनाल के एसपी श्यामलाल शर्मा का कहना है कि डॉ. दिवाकर ने अदालत में अग्रिम जमानत लगाई थी, लेकिन वह रिजेक्ट हो गई है। विजिलेंस गंभीरता से मामले की जांच कर रही है।
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मैं हर तरह से जांच के लिए तैयार : डॉ. दिवाकर
इस बारे में डॉ. दिवाकर भटनागर ने बताया कि वे हर तरह से जांच के लिए तैयार हैं। अदालत में अग्रिम जमानत के लिए अप्लीकेशन लगाई थी, फैसला क्या आया मुझे नहीं पता। अगर रिजेक्ट हो गई तो उच्च अदालत में जाएंगे। मैंने न तो किसी से पैसे की डिमांड की और न ही जांच में किसी को लाभ दिया है। जांच में वही लिखा है, जो सामने आया है। अगर डॉक्टर की कमी मिली है तो कमी अंकित की है और रिकार्ड में कमी है तो वो भी लिखा है। जांच पूरी तरह से निष्पक्षता के साथ की गई है। जहां तक रिकार्डिंग की बात है तो इस बारे में मैं तभी बता सकता हूं, जब मैं उनको सुन सकूं। मैं विजिलेंस को जांच के लिए तैयार हूं। मुझे विश्वास है कि मैंने कोई गलत कार्य नहीं किया है। एक सवाल के जवाब में डॉ. दिवाकर ने बताया कि मैंने ही फोन नहीं किए थे, फोन तो डॉ. रोहित के भी मेरे पास आए थे। जांच में सब कुछ पता चल जाएगा।
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बता देें कि कर्ण विहार निवासी सुरेश कुमार ने फरवरी माह में विर्क अस्पताल के डॉ. रोहित सरदाना से आंख का मोतियाबिंद का ऑॅपरेशन कराया था। सुरेश ने दी शिकायत में आरोप लगाया कि आपरेशन के बाद भी उसकी नजर तेज नहीं हुई और कमजोर हो गई। सुरेश का आरोप है कि डॉ. सरदाना ने कहा था कि ऑॅपरेशन के बाद नजर तेज हो जाएगी। इसके बाद कई बार डॉ. रोहित सरदाना के पास गए, पर उनकी सुनवाई नहीं की गई। इस पर उसने मामले की शिकायत सीएम विंडो पर दी।
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इस पर सीएमओ की ओर से तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई। डॉ. रजनीश गर्ग, डॉ. सतबीर व डॉ. दिवाकर भटनागर ने इसकी जांच की। इसी दौरान डॉ. रोहित सरदाना ने विजिलेंस को शिकायत दी कि डॉ. दिवाकर ने उससे जांच के नाम पर पहले 1.75 लाख रुपये मांगे और बाद में 6 लाख रुपये की डिमांड की। इतना ही नहीं डॉ. रोहित ने बाद में विजिलेंस को समझौता पत्र भी दे दिया, लेकिन विजिलेंस ने इसे दरकिनार करते हुए डॉ. दिवाकर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। इस मामले में डॉ. रोहित ने डॉ. दिवाकर की पैसे मांगने की रिकार्डिंग भी पेश की थी। विजिलेंस अब इस रिकार्डिंग की एफएसएल लैब से जांच कराने का प्रयास कर रहा है। इस बारे में विजिलेंस करनाल के एसपी श्यामलाल शर्मा का कहना है कि डॉ. दिवाकर ने अदालत में अग्रिम जमानत लगाई थी, लेकिन वह रिजेक्ट हो गई है। विजिलेंस गंभीरता से मामले की जांच कर रही है।
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मैं हर तरह से जांच के लिए तैयार : डॉ. दिवाकर
इस बारे में डॉ. दिवाकर भटनागर ने बताया कि वे हर तरह से जांच के लिए तैयार हैं। अदालत में अग्रिम जमानत के लिए अप्लीकेशन लगाई थी, फैसला क्या आया मुझे नहीं पता। अगर रिजेक्ट हो गई तो उच्च अदालत में जाएंगे। मैंने न तो किसी से पैसे की डिमांड की और न ही जांच में किसी को लाभ दिया है। जांच में वही लिखा है, जो सामने आया है। अगर डॉक्टर की कमी मिली है तो कमी अंकित की है और रिकार्ड में कमी है तो वो भी लिखा है। जांच पूरी तरह से निष्पक्षता के साथ की गई है। जहां तक रिकार्डिंग की बात है तो इस बारे में मैं तभी बता सकता हूं, जब मैं उनको सुन सकूं। मैं विजिलेंस को जांच के लिए तैयार हूं। मुझे विश्वास है कि मैंने कोई गलत कार्य नहीं किया है। एक सवाल के जवाब में डॉ. दिवाकर ने बताया कि मैंने ही फोन नहीं किए थे, फोन तो डॉ. रोहित के भी मेरे पास आए थे। जांच में सब कुछ पता चल जाएगा।