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दिल्ली-पानीपत के अस्पतालों से बिना पीपीई किट कोरोना श्मशान घाट पहुंच रहे शव
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गैर राज्यों और जिलों से आने वाले कोरोना संक्रमित शवों को बिना पीपीई किट के करनाल के कोरोना श्मशान घाट पर भेजा जा रहा है। दिल्ली के बड़े हास्पिटल से आए शव को बिना किट के देखते ही श्मशान पर दाह संस्कार करने वाले निगम कर्मियों ने शुक्रवार को हाथ लगाने से इनकार कर दिया। करीब एक घंटे के बाद परिजनों की गुहार पर कर्मचारियों ने किसी तरह दाह संस्कार कराया।
करनाल के सेक्टर-7 निवासी 73 वर्षीय सीनियर सिटीजन को दो सितंबर को कल्पना चावला हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। उनके रिश्तेदार ने बताया कि यहां उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव बता दी गई। इस पर परिजन उन्हें चार सितंबर को उपचार के लिए नगर के ही विर्क हास्पिटल ले गए। 12 सितंबर की रात 1.30 बजे उनकी तबियत और बिगड़ी तो परिजन उन्हें 13 सितंबर को दिल्ली के गंगाराम हास्पिटल ले गए। यहां पहले तो कोरोना रिपोर्ट निगेटिव बताई लेकिन दूसरी रिपोर्ट में उन्हें पॉजिटिव बताया गया। 17 सितंबर को करीब 1.15 बजे उनकी मौत हो गयी। शव को किसी परिजन को दिखाया भी नहीं गया, इसलिए शव को पीपीई किट में रखा गया है या नहीं, इसकी जानकारी नहीं हो सकी। वहां से एंबुलेंस के जरिये परिजन शव को शुक्रवार को करनाल के कोरोना श्मशान घाट बलड़ी ले आए। यहां जब उतारकर दाह संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई तो कर्मचारियों ने शव को बिना किट के देखा तो हाथ लगाने से मना कर दिया। करीब एक घंटे तक शव यूं ही दाह संस्कार के इंतजार में रखा रहा। जब परिजनों ने कर्मचारियों से अनुनय विनय की तो निगम के सफाई निरीक्षक प्रवेश कुमार व नगर पालिका कर्मचारी संघ के उप प्रधान राम सिंह के कहने पर कर्मचारियों ने उनका दाह संस्कार पीपीई किट पहने परिजनों के साथ मिलकर रीति रिवाज के अनुसार कराया। दाह संस्कार में लगे कर्मचारियों ने बताया कि 16 सितंबर को पार्क हास्पिटल पानीपत से भी एक शव लाया गया था, वह भी बिना किट के ही था, सिर्फ पालिथीन में लपेटकर भेज दिया गया था, जो एक बार छूटकर नीचे भी गिर गया था। पानीपत से पहले भी बिना किट के शव यहां आते रहे हैं। कर्मचारियों ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इससे परिजनों के साथ एंबुलेंस कर्मियों, दाह संस्कार करने वालों, साथ आने वाले नाते रिश्तेदारों के भी संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है।
गंगाराम हास्पिटल दिल्ली से आज यहां लाया गया शव बिना पीपीई किट के था, जिसे पहले तो हाथ नहीं लगाने की बात कही थी लेकिन बाद में परिजनों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए दाह संस्कार करा दिया गया है, लेकिन आगे से यदि बिना किट के शव आता है तो हम हाथ नहीं लगाएंगे। पानीपत के पार्क हास्पिटल से भी 16 सितंबर को बिना किट के शव आया था, जो एक बार पालिथीन व कट्टे में लिपटा होने के कारण छूटकर नीचे भी गिर गया था। यहां से पहले भी बिना किट के शव आते रहे हैं।
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-राम सिंह, उप प्रधान-नगर पालिका कर्मचारी संघ करनाल।
बिना किट के किसी शव के आने का मामला संज्ञान में नहीं है, यदि ऐसा है तो बेहद गंभीर मामला है। क्योंकि इसकी जद में तो शव के साथ आने वाले एंबुलेंस कर्मी, परिजन व नगर निगम के कर्मचारी भी आ सकते हैं। इस मामले को निगमायुक्त व सीएमओ के संज्ञान में लाया जाएगा। आगे से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई ऐसा शव न आ सके, जो पीपीई किट में न हो।
-धीरज कुमार, डीएमसी नगर निगम करनाल।
हम शव को स्वास्थ्य विभाग को सौंपते हैं, इस दौरान प्रशासन की एक गाड़ी भी वहां मौजूद होती है, शव को पूरी तरह नियमानुसार पैक करके ही स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को सौंपते हैं। कोई बिना किट के शव को भेजने का आरोप लगा रहा है तो वह गलत है।
अशोक कुमार, सीईओ पार्क हास्पिटल पानीपत।
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करनाल के सेक्टर-7 निवासी 73 वर्षीय सीनियर सिटीजन को दो सितंबर को कल्पना चावला हास्पिटल में भर्ती कराया गया था। उनके रिश्तेदार ने बताया कि यहां उनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव बता दी गई। इस पर परिजन उन्हें चार सितंबर को उपचार के लिए नगर के ही विर्क हास्पिटल ले गए। 12 सितंबर की रात 1.30 बजे उनकी तबियत और बिगड़ी तो परिजन उन्हें 13 सितंबर को दिल्ली के गंगाराम हास्पिटल ले गए। यहां पहले तो कोरोना रिपोर्ट निगेटिव बताई लेकिन दूसरी रिपोर्ट में उन्हें पॉजिटिव बताया गया। 17 सितंबर को करीब 1.15 बजे उनकी मौत हो गयी। शव को किसी परिजन को दिखाया भी नहीं गया, इसलिए शव को पीपीई किट में रखा गया है या नहीं, इसकी जानकारी नहीं हो सकी। वहां से एंबुलेंस के जरिये परिजन शव को शुक्रवार को करनाल के कोरोना श्मशान घाट बलड़ी ले आए। यहां जब उतारकर दाह संस्कार की प्रक्रिया शुरू हुई तो कर्मचारियों ने शव को बिना किट के देखा तो हाथ लगाने से मना कर दिया। करीब एक घंटे तक शव यूं ही दाह संस्कार के इंतजार में रखा रहा। जब परिजनों ने कर्मचारियों से अनुनय विनय की तो निगम के सफाई निरीक्षक प्रवेश कुमार व नगर पालिका कर्मचारी संघ के उप प्रधान राम सिंह के कहने पर कर्मचारियों ने उनका दाह संस्कार पीपीई किट पहने परिजनों के साथ मिलकर रीति रिवाज के अनुसार कराया। दाह संस्कार में लगे कर्मचारियों ने बताया कि 16 सितंबर को पार्क हास्पिटल पानीपत से भी एक शव लाया गया था, वह भी बिना किट के ही था, सिर्फ पालिथीन में लपेटकर भेज दिया गया था, जो एक बार छूटकर नीचे भी गिर गया था। पानीपत से पहले भी बिना किट के शव यहां आते रहे हैं। कर्मचारियों ने इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इससे परिजनों के साथ एंबुलेंस कर्मियों, दाह संस्कार करने वालों, साथ आने वाले नाते रिश्तेदारों के भी संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है।
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गंगाराम हास्पिटल दिल्ली से आज यहां लाया गया शव बिना पीपीई किट के था, जिसे पहले तो हाथ नहीं लगाने की बात कही थी लेकिन बाद में परिजनों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए दाह संस्कार करा दिया गया है, लेकिन आगे से यदि बिना किट के शव आता है तो हम हाथ नहीं लगाएंगे। पानीपत के पार्क हास्पिटल से भी 16 सितंबर को बिना किट के शव आया था, जो एक बार पालिथीन व कट्टे में लिपटा होने के कारण छूटकर नीचे भी गिर गया था। यहां से पहले भी बिना किट के शव आते रहे हैं।
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-राम सिंह, उप प्रधान-नगर पालिका कर्मचारी संघ करनाल।
बिना किट के किसी शव के आने का मामला संज्ञान में नहीं है, यदि ऐसा है तो बेहद गंभीर मामला है। क्योंकि इसकी जद में तो शव के साथ आने वाले एंबुलेंस कर्मी, परिजन व नगर निगम के कर्मचारी भी आ सकते हैं। इस मामले को निगमायुक्त व सीएमओ के संज्ञान में लाया जाएगा। आगे से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई ऐसा शव न आ सके, जो पीपीई किट में न हो।
-धीरज कुमार, डीएमसी नगर निगम करनाल।
हम शव को स्वास्थ्य विभाग को सौंपते हैं, इस दौरान प्रशासन की एक गाड़ी भी वहां मौजूद होती है, शव को पूरी तरह नियमानुसार पैक करके ही स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को सौंपते हैं। कोई बिना किट के शव को भेजने का आरोप लगा रहा है तो वह गलत है।
अशोक कुमार, सीईओ पार्क हास्पिटल पानीपत।