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किसान आंदोलन : टोल प्लाजा पर पहुंचे पूर्व सीएम समेत कई कांग्रेसी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 17 Jan 2021 02:50 AM IST
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congressmen reach toll plaza in support of farmer movement
राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित बसताड़ा टोल टैक्स प्लाजा पर शनिवार को 23वें दिन किसानों का धरना और टोल फ्री आंदोलन जारी रहा। शनिवार को किसान बलवान सिंह, बलराज सिंह, राजिंद्र सांगवान, जोगिंद्र सांगवान, हिसम सिंह सांगवान व गुरनाम सिंह भूख हड़ताल पर बैठे।
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पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा, पूर्व वन मंत्री किरण चौधरी, पूर्व सांसद श्रुति चौधरी, कांग्रेस प्रदेश महासचिव प्रवेश पूनिया, पूर्व मंत्री भीमसेन मेहता, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप शर्मा, पूर्व बिजली मंत्री कैप्टन अजय यादव, पूर्व संसदीय सचिव जिलेराम शर्मा, इसराना के विधायक बलबीर वाल्मीकि, पूर्व विधायक सुमिता सिंह, पूर्व विधायक नरेंद्र सांगवान, जिला बार संघ के पूर्व प्रधान चांदबीर मंढाण, पंकज पूनिया, नीटू मान व कांग्रेस जिला संयोजक त्रिलोचन सिंह किसानों के बीच धरनास्थल पर पहुंचे। भाकियू प्रदेश कोर कमेटी संयोजक जगदीप सिंह औलख व जिलाध्यक्ष अजय राणा ने कांग्रेस नेताओं से कहा कि आपकी सरकार ने भी स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं की थी। उन्होंने सवाल किया कि भविष्य में सरकार बनने पर क्या स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू होगी, किसानों के कर्ज माफ व तीनों कृषि कानून रद होंगे। पूर्व सीएम हुड्डा ने किसानों की तीनों बातें स्वीकार की।
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टोल टैक्स प्लाजा पर किसानों के धरने को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने दिया समर्थन
बोले-उन्होंने 2010 में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने के लिए की थी सिफारिश
घरौंडा (करनाल)। राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित बसताड़ा टोल टैक्स प्लाजा पर शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा एवं नेता प्रतिपक्ष किसानों के धरने को समर्थन देने पहुंचे। उन्होंने कहा कि वह नेता नहीं किसान पुत्र होने की हैसियत से यहां आए हैं। उन्होंने 2010 में ही केंद्र सरकार को स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने की सिफारिश की थी। उनकी पार्टी की सत्ता में आई तो किसानों की यह मांग पूरी की जाएगी और नए कृषि कानूनों को रद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन कर रहे किसानों पर दर्ज मुकदमे तुरंत रद कि जाएं। कैमला में मुख्यमंत्री मनोहरलाल की किसान महापंचायत का विरोध करने वाले किसानों पर दर्ज किए गए मुकदमे भी वापस लिए जाएं। आंदोलन में कुर्बानी देने वाले किसानों के परिवारों को आर्थिक मदद और नौकरी दी जाए। यदि मौजूदा सरकार ऐसा नहीं करती तो उनकी सरकार बनने पर यह काम किया जाएगा। हुड्डा ने कहा कि सरकार किसानों की आवाज सुनने की बजाय टकराव के हालात पैदा कर उन्हें उकसाने में लगी है। कैमला गांव में जो हुआ उसके लिए सरकार जिम्मेदार है न कि किसान। किसानों पर बदले की भावना से कार्रवाई नहीं करनी चाहिये। किसानों की मांग जायज है। वह खुद पहले दिन से इस आंदोलन के समर्थन में हैं। इस मौके पर रघबीर संधू, राजेश वैद, राजीव सेन, हरिराम सांबा व अमरजीत धीमान मौजूद रहे।
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भाजपा ने केवल जुमले छोड़े : किरण चौधरी
वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री एवं पूर्व वन मंत्री हरियाणा किरण चौधरी ने कहा कि भाजपा ने छह साल में केवल जुमले ही छोड़े हैं। जनता से झूठे वादे किए। पूर्व मुख्यमंत्री स्व. चौधरी बंसीलाल की पुत्रवधू होने के नाते उन्होंने कहा कि चौ. बंसीलाल ने ईमानदारी से काम किया था। प्रदेश में बिजली व्यवस्था, सड़कें व मूलभूत सुविधाएं जनता को उपलब्ध कराई है, उसे जनता कभी नहीं भुला सकती। वह फौजी की बेटी हैं और किसानों की दुख तकलीफें अच्छे से समझती हैं। उनके साथ पूर्व सांसद श्रुति चौधरी, पंकज पूनिया व बलवान सेन मौजूद रहे।
किसान व गरीबों के खिलाफ हैं कानून : पूर्व बिजली मंत्री
पूर्व बिजली मंत्री कैप्टन अजय यादव भी किसानों के धरने को समर्थन देने पहुंचे। उन्होंने कहा कि इन कानूनों से पूंजीपतियों के हाथ में सारा अनाज जाने से गरीबों को खाद्य सुरक्षा कैसे दी जा सकेगी। यह जनविरोधी कानून हैं और किसान व गरीबों के खिलाफ हैं। वह दक्षिण हरियाणा से धरने को समर्थन देने आए हैं। सरकार तीनों कृषि कानून तुरंत वापस ले।

सत्ता में रहकर नहीं उठाते किसानों की आवाज
अखिल भारतीय जाट महासभा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेंद्र कौर ने कहा कि किसान आंदोलन को राजनीति के अखाड़े की जरूरत नहीं। जो नेता अब किसानों के धरने पर पहुंचे हैं जब ये सत्ता में थे तब इनको स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट याद क्यों नहीं आई। विपक्ष में आकर ही किसानों के दर्द का पता चलता है। किसान उन नेताओं से जवाब मांगता है जिन्होंने 70 साल राज किया। तब स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू क्यों नहीं हुई। सत्ता में रहकर किसानों की आवाज नहीं उठाते। किसानों ने हमेशा ही लाठी-गोली खाई है।
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