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Karnal News: चंद्र शेखर आजाद इक बार फिर से आना, भटके जवानों को रास्ता दिखाना
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- साहित्यिक मंच की ओर से आयोजित काव्य संगोष्ठी में साहित्यकारों ने पेश की रचनाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। राष्ट्रीय आध्यात्मिक काव्य साहित्यिक मंच करनाल की ओर से साहित्यकार रामेश्वर दयाल गोयल की स्मृति में पूनम गोयल व रचना गोयल की ओर से अल्फा सिटी के एक होटल में 21वीं राष्ट्रीय आध्यात्मिक काव्य संगोष्ठी आयोजित की गई इसमें शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।
कवि भारत भूषण वर्मा ने कहा- शहीदों की शहादत को न आलम भूल पाएगा, पहलगाम हो या पुलवामा लहू में रंग लाएगा। कवयित्री डॉ. अंजू शर्मा ने कहा- आज़ाद चंद्र शेखर इक बार फिर से आना, भटके हुए जवानों को रास्ता दिखाना। डॉ. एसके शर्मा बोले- मेरे देश के वीरों ने दी थी कुर्बानी, हम न कभी भुला सकते थे देशभक्त बलिदानी। डॉ. अशोक गिरि हरिद्वार ने कहा- गर्दिश में अपने भी गैर हो जाते हैं, गर्दिश में दरिया भी समुंदर बन जाते हैं। शायर इकबाल पानीपती ने गंगाजमुनी संस्कृति पर कविता प्रस्तुत की- बहती हैं जहां गंगा-जमुना ये वो जमीं है, जन्नत जो है दुनिया में कहीं पर तो यही है।
शायर इंतखाब संभली बोले- वक्त तो वक्त है आता है गुजर जाता है, रंग कमज़र्फ के चेहरे का उतर जाता है। रचनाकार रामेश्वर देव ने धर्मग्रंथ की महत्ता बताई- गीता हमारे धर्म की सच्ची किताब है, खुश्बू है जिसमें प्यार की ये वो गुलाब है। साथ ही कवि जयसिंह जीत, नरेश लाभ, डॉ. आरबी कपूर, ममता प्रवीण, सुषमा चौपड़ा, आशीष ताज, शकील जठेडी, कमलेश कुमार पालीवाल, दीनदयाल दीक्षित, कादिर किठारवी ने भी अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी।
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संचालन कवि भारत भूषण वर्मा व रामेश्वर देव ने किया। मौके पर पूनम गोयल, शायर डॉ. एसके शर्मा, सीएसएसआरआई के पूर्व निदेशक डॉ. गुरबचन सिंह पहुंचे। विशिष्ट अतिथि एमडीडी बाल भवन के अध्यक्ष सरदार परमिंदर पाल सिंह व वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अशोक गिरि हरिद्वार रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। राष्ट्रीय आध्यात्मिक काव्य साहित्यिक मंच करनाल की ओर से साहित्यकार रामेश्वर दयाल गोयल की स्मृति में पूनम गोयल व रचना गोयल की ओर से अल्फा सिटी के एक होटल में 21वीं राष्ट्रीय आध्यात्मिक काव्य संगोष्ठी आयोजित की गई इसमें शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।
कवि भारत भूषण वर्मा ने कहा- शहीदों की शहादत को न आलम भूल पाएगा, पहलगाम हो या पुलवामा लहू में रंग लाएगा। कवयित्री डॉ. अंजू शर्मा ने कहा- आज़ाद चंद्र शेखर इक बार फिर से आना, भटके हुए जवानों को रास्ता दिखाना। डॉ. एसके शर्मा बोले- मेरे देश के वीरों ने दी थी कुर्बानी, हम न कभी भुला सकते थे देशभक्त बलिदानी। डॉ. अशोक गिरि हरिद्वार ने कहा- गर्दिश में अपने भी गैर हो जाते हैं, गर्दिश में दरिया भी समुंदर बन जाते हैं। शायर इकबाल पानीपती ने गंगाजमुनी संस्कृति पर कविता प्रस्तुत की- बहती हैं जहां गंगा-जमुना ये वो जमीं है, जन्नत जो है दुनिया में कहीं पर तो यही है।
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शायर इंतखाब संभली बोले- वक्त तो वक्त है आता है गुजर जाता है, रंग कमज़र्फ के चेहरे का उतर जाता है। रचनाकार रामेश्वर देव ने धर्मग्रंथ की महत्ता बताई- गीता हमारे धर्म की सच्ची किताब है, खुश्बू है जिसमें प्यार की ये वो गुलाब है। साथ ही कवि जयसिंह जीत, नरेश लाभ, डॉ. आरबी कपूर, ममता प्रवीण, सुषमा चौपड़ा, आशीष ताज, शकील जठेडी, कमलेश कुमार पालीवाल, दीनदयाल दीक्षित, कादिर किठारवी ने भी अपनी रचनाओं की प्रस्तुति दी।
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संचालन कवि भारत भूषण वर्मा व रामेश्वर देव ने किया। मौके पर पूनम गोयल, शायर डॉ. एसके शर्मा, सीएसएसआरआई के पूर्व निदेशक डॉ. गुरबचन सिंह पहुंचे। विशिष्ट अतिथि एमडीडी बाल भवन के अध्यक्ष सरदार परमिंदर पाल सिंह व वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अशोक गिरि हरिद्वार रहे।