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Karnal News: आज और कल बारिश की संभावना, धान को नुकसान संभव
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। कुछ दिनों से मौसम परिवर्तनशीन रहने के कारण गर्मी से राहत मिली है। मंगलवार को मौसम साफ रहा, हालांकि आसमान पर बादलों की आवाजाही रही। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि बुधवार व वीरवार को हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। जिससे पके हुए धान की फसल को नुकसान की संभावना है। साथ ही धान कटाई में और देरी हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को सतर्क रहना होगा, यदि खेत में पानी भरता है तो उसकी निकासी की उचित व्यवस्था करनी चाहिए।
खेतों में धान की फसल पकने लगी है। पीआर-26 जो कि अगेती प्रजाति है, उसकी कटाई भी शुरू हो चुकी है, लेकिन अब लगातार मौसम परिवर्तनशील बना हुआ है, जिससे किसानों की खेतों में धान के रूप में लहलहाती मेहनत पर संकट के बादल छाए हुए हैं। जिनके बरसने से मेहनत बर्बाद हो सकती है। केंद्रीय मृदा एवं लवणता अनुसंधान संस्थान करनाल की जिला मौसम शाखा में बुधवार का अधिकतम तापमान 33.8 और न्यूनतम तापमान 25.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। जो सोमवार से मामूली रूप से बढ़ा हुआ है।
तेज हवा चलने से गिर सकती है धान की फसल
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल की जिला कृषि मौसम सेवा की ओर से किसानों को जारी सलाह में वैज्ञानिकों ने 20 व 21 सितंबर के साथ-साथ 24 सितंबर को भी हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। हालांकि 20 से 24 सितंबर तक तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। किसानों के लिए राहत की बात ये है कि इस दौरान हवा की गति पांच से 11 किमी प्रति घंटा रह सकती है। क्योंकि अधिक तेज हवाएं चलने से धान की फसल गिर सकती है। हालांकि वैज्ञानिकों का ये भी कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर इसमें परिवर्तन हो सकता है। ज्यों-ज्यों समय आगे बढ़ रहा है, त्यों-त्यों धान पकाव की ओर बढ़ रहा है। इसी आधार पर बारिश से धान को नुकसान की संभावना भी बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि बारिश से खेत गीले होने पर उनमें कंबाइन नहीं चलती, जिसके कारण धान की कटाई ठहर जाती है।
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करनाल। कुछ दिनों से मौसम परिवर्तनशीन रहने के कारण गर्मी से राहत मिली है। मंगलवार को मौसम साफ रहा, हालांकि आसमान पर बादलों की आवाजाही रही। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि बुधवार व वीरवार को हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। जिससे पके हुए धान की फसल को नुकसान की संभावना है। साथ ही धान कटाई में और देरी हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को सतर्क रहना होगा, यदि खेत में पानी भरता है तो उसकी निकासी की उचित व्यवस्था करनी चाहिए।
खेतों में धान की फसल पकने लगी है। पीआर-26 जो कि अगेती प्रजाति है, उसकी कटाई भी शुरू हो चुकी है, लेकिन अब लगातार मौसम परिवर्तनशील बना हुआ है, जिससे किसानों की खेतों में धान के रूप में लहलहाती मेहनत पर संकट के बादल छाए हुए हैं। जिनके बरसने से मेहनत बर्बाद हो सकती है। केंद्रीय मृदा एवं लवणता अनुसंधान संस्थान करनाल की जिला मौसम शाखा में बुधवार का अधिकतम तापमान 33.8 और न्यूनतम तापमान 25.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। जो सोमवार से मामूली रूप से बढ़ा हुआ है।
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तेज हवा चलने से गिर सकती है धान की फसल
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल की जिला कृषि मौसम सेवा की ओर से किसानों को जारी सलाह में वैज्ञानिकों ने 20 व 21 सितंबर के साथ-साथ 24 सितंबर को भी हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। हालांकि 20 से 24 सितंबर तक तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है। किसानों के लिए राहत की बात ये है कि इस दौरान हवा की गति पांच से 11 किमी प्रति घंटा रह सकती है। क्योंकि अधिक तेज हवाएं चलने से धान की फसल गिर सकती है। हालांकि वैज्ञानिकों का ये भी कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर इसमें परिवर्तन हो सकता है। ज्यों-ज्यों समय आगे बढ़ रहा है, त्यों-त्यों धान पकाव की ओर बढ़ रहा है। इसी आधार पर बारिश से धान को नुकसान की संभावना भी बढ़ रही है। किसानों का कहना है कि बारिश से खेत गीले होने पर उनमें कंबाइन नहीं चलती, जिसके कारण धान की कटाई ठहर जाती है।
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