{"_id":"674b81d55e2072ee470ebf74","slug":"bohli-sahib-will-soon-be-seen-in-its-ancient-form-karnal-news-c-18-knl1008-530162-2024-12-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Karnal News: जल्द प्राचीन स्वरूप में दिखेंगे बोहली साहिब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Karnal News: जल्द प्राचीन स्वरूप में दिखेंगे बोहली साहिब
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। सिखों के प्रथम गुरु श्री नानक देव 509 साल पहले कर्ण नगरी आए थे। अपने करनाल प्रवास के दौरान गुरु जी ने जिस खुई (कुएं) पर स्नान किया था, वहां से आज भी पवित्र जल निकलता है। अब इस खुई का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसे उसी प्राचीन रूप में सजाया जाएगा, जिससे श्रद्धालु इसके दर्शन से इसके महत्व को भी समझ सकें।
हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और बाबा सुक्खा सिंह जी की देखरेख में खुई के जीर्णोद्धार का कार्य होगा। ठठियारा मोहल्ले के जिस बगीचे में गुरु जी ने डेरा डाला था, अब उसी जगह पर गुरुद्वारा मंजी साहिब पहली पातशाही सुशोभित है।
सर्राफा बाजार स्थित यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा संगत की आस्था का केंद्र है। इस पवित्र स्थल पर गुरु अमर दास, गुरु हरकिशन और बाबा बंदा बहादुर भी आ चुके हैं।
गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी अमृतपाल सिंह के अनुसार, गुरु नानक देव जी ने इस जगह से लोगों को शांति, सद्भाव कायम करने और सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने की उन्होंने राह दिखाई। उनके समय का कुआं भी यहां बने गुरुद्वारा साहिब में विराजमान है। बोहली साहिब के नाम से जानी जाने वाली खुई को गुरु नानक देव जी की चरण छू प्राप्त है। खुई के जल से श्रद्धालु स्नान करते हैं और मन की मुरादें पाते हैं। दूर-दराज से संगत माथा टेकने के लिए पहुंचती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
करनाल। सिखों के प्रथम गुरु श्री नानक देव 509 साल पहले कर्ण नगरी आए थे। अपने करनाल प्रवास के दौरान गुरु जी ने जिस खुई (कुएं) पर स्नान किया था, वहां से आज भी पवित्र जल निकलता है। अब इस खुई का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसे उसी प्राचीन रूप में सजाया जाएगा, जिससे श्रद्धालु इसके दर्शन से इसके महत्व को भी समझ सकें।
हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और बाबा सुक्खा सिंह जी की देखरेख में खुई के जीर्णोद्धार का कार्य होगा। ठठियारा मोहल्ले के जिस बगीचे में गुरु जी ने डेरा डाला था, अब उसी जगह पर गुरुद्वारा मंजी साहिब पहली पातशाही सुशोभित है।
विज्ञापन
सर्राफा बाजार स्थित यह ऐतिहासिक गुरुद्वारा संगत की आस्था का केंद्र है। इस पवित्र स्थल पर गुरु अमर दास, गुरु हरकिशन और बाबा बंदा बहादुर भी आ चुके हैं।
गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी अमृतपाल सिंह के अनुसार, गुरु नानक देव जी ने इस जगह से लोगों को शांति, सद्भाव कायम करने और सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने की उन्होंने राह दिखाई। उनके समय का कुआं भी यहां बने गुरुद्वारा साहिब में विराजमान है। बोहली साहिब के नाम से जानी जाने वाली खुई को गुरु नानक देव जी की चरण छू प्राप्त है। खुई के जल से श्रद्धालु स्नान करते हैं और मन की मुरादें पाते हैं। दूर-दराज से संगत माथा टेकने के लिए पहुंचती है।
विज्ञापन