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Karnal News: संभलकर चलें! यहां गईं 19 जानें
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गगन तलवार
करनाल। घना कोहरा छाने से पहले ही राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर अब तक हुए सड़क हादसों के आधार पर एक और नया ब्लैक स्पॉट चिन्हित हो गया है। करनाल शहर की सीमा में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर मयूर ढाबे के नजदीक के क्षेत्र में सड़क हादसों की संख्या बढ़ गई है। सड़क सुरक्षा समिति की ओर से इसे अति संभावित दुर्घटना क्षेत्र घोषित कर दिया गया है।
वहीं प्रशासन की ओर से भी यहां अब राहत एवं हादसों की संख्या में कमी लाने के लिए योजना बनाई जा रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो मयूर ढाबा के नजदीक के दो किलोमीटर के क्षेत्र की अवधि में पिछले तीन वर्ष में कुल 36 सड़क हादसे हुए हैं। इनमें 19 लोगों की जान गई है। जबकि 10 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। जिन्हें अस्पताल में दाखिल करना पड़ा। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2022 और 2023 के मुकाबले 2024 के 11 माह में हादसों का ग्राफ बढ़ा है। 2024 में अब तक 14 हादसे हुए। गत वर्ष 09 और 2022 में 13 हादसे हुए थे। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन को यहां सुधार को लेकर कड़े इंतजाम करने होंगे। 2022 में भी यही क्षेत्र हादसों का हॉटस्पॉट बना था।
इस दौरान बढ़े स्तर पर सुरक्षा इंतजाम, रोड इंजीनियरिंग से जुड़े कार्य हुए थे। पुलिस ने भी यहां पर सख्ती करते हुए लापरवाही बरतने वाले वाहन चालकों पर शिकंजा कसा था। इस बार और सख्ती की जरूरत है। क्योंकि साल खत्म होने में अभी समय है, ऐसे में धुंध में सड़क हादसे की संभावना यहां ज्यादा है। राजमार्ग पर हादसों की संख्या साल की अंतिम तिमाही में ज्यादा है। आईआरएडी की जिला समन्वयक स्वाति गुप्ता का कहना है कि कुल 36 हादसों में 38 प्रतिशत लोगों की मौत हुई है। अक्तूबर से दिसंबर माह में धुंध होती है। इसलिए इन महीनों में सतर्कता की यहां ज्यादा जरूरत है। तीनों वर्षों में सर्वाधिक 11 हादसे अक्तूबर से दिसंबर माह में हुए।
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ये हैं खामियां
अवैध कट खुले हैं। राजमार्ग और सर्विस लेन की सड़क के बीच ऊंची-नीची जगह है। संकेतक टूटे हुए हैं। कई जगह सफेद पट्टी नहीं है। पशुओं को सड़क पर आने से रोकने के लिए तार नहीं है। रफ्तार कम रखने व सावधानी व यातायात नियमों संबंधित बोर्ड नहीं हैं।
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करनाल। घना कोहरा छाने से पहले ही राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर अब तक हुए सड़क हादसों के आधार पर एक और नया ब्लैक स्पॉट चिन्हित हो गया है। करनाल शहर की सीमा में राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर मयूर ढाबे के नजदीक के क्षेत्र में सड़क हादसों की संख्या बढ़ गई है। सड़क सुरक्षा समिति की ओर से इसे अति संभावित दुर्घटना क्षेत्र घोषित कर दिया गया है।
वहीं प्रशासन की ओर से भी यहां अब राहत एवं हादसों की संख्या में कमी लाने के लिए योजना बनाई जा रही है। आंकड़ों पर नजर डालें तो मयूर ढाबा के नजदीक के दो किलोमीटर के क्षेत्र की अवधि में पिछले तीन वर्ष में कुल 36 सड़क हादसे हुए हैं। इनमें 19 लोगों की जान गई है। जबकि 10 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। जिन्हें अस्पताल में दाखिल करना पड़ा। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2022 और 2023 के मुकाबले 2024 के 11 माह में हादसों का ग्राफ बढ़ा है। 2024 में अब तक 14 हादसे हुए। गत वर्ष 09 और 2022 में 13 हादसे हुए थे। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशासन को यहां सुधार को लेकर कड़े इंतजाम करने होंगे। 2022 में भी यही क्षेत्र हादसों का हॉटस्पॉट बना था।
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इस दौरान बढ़े स्तर पर सुरक्षा इंतजाम, रोड इंजीनियरिंग से जुड़े कार्य हुए थे। पुलिस ने भी यहां पर सख्ती करते हुए लापरवाही बरतने वाले वाहन चालकों पर शिकंजा कसा था। इस बार और सख्ती की जरूरत है। क्योंकि साल खत्म होने में अभी समय है, ऐसे में धुंध में सड़क हादसे की संभावना यहां ज्यादा है। राजमार्ग पर हादसों की संख्या साल की अंतिम तिमाही में ज्यादा है। आईआरएडी की जिला समन्वयक स्वाति गुप्ता का कहना है कि कुल 36 हादसों में 38 प्रतिशत लोगों की मौत हुई है। अक्तूबर से दिसंबर माह में धुंध होती है। इसलिए इन महीनों में सतर्कता की यहां ज्यादा जरूरत है। तीनों वर्षों में सर्वाधिक 11 हादसे अक्तूबर से दिसंबर माह में हुए।
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ये हैं खामियां
अवैध कट खुले हैं। राजमार्ग और सर्विस लेन की सड़क के बीच ऊंची-नीची जगह है। संकेतक टूटे हुए हैं। कई जगह सफेद पट्टी नहीं है। पशुओं को सड़क पर आने से रोकने के लिए तार नहीं है। रफ्तार कम रखने व सावधानी व यातायात नियमों संबंधित बोर्ड नहीं हैं।