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फिलहाल नहीं मिलेगी प्रदूषण से निजात
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संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। शहर में प्रदूषण का गुबार अभी पूरी तरह छंटा नहीं है। सोमवार को जहां एक्यूआई में कुछ कमी आई लेकिन प्रदूषण के गुबार की निम्न दबाव के क्षेत्र में गतिशीलता बनी हुई है। जिस कारण इसका ज्यादा प्रभाव झज्जर, रोहतक व दिल्ली की तरफ नजर आ रहा है।
प्राचार्य एवं पर्यावरणविद् डॉ. राकेश भारद्वाज ने बताया कि जिस दिशा में निमभन दबाव बन जाता है उसी दिशा में इसका असर होता है। अभी इससे निजात नहीं मिली है। यह अलग-अलग क्षेत्र में अपना दुष्प्रभाव दिखाएगा। जब तक तेज हवा नहीं चलती या बारिश नहीं होती तब तक इससे निजात नहीं मिलेगी।
सोमवार शाम वायु गुणवत्ता सूचकांक पीएम 2.5 का स्तर औसतन 219, न्यूनतम 98 व अधिकतम 303 आंका गया। पीएम 10 का स्तर औसतन 173, न्यूनतम 88 व अधिकतम 425 आंका गया। डॉ. भारद्वाज ने मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए उपाय सुझाए हैं।
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इन उपायों से हो सकता है नियंत्रण
- प्रभावित क्षेत्र में कुछ समय के लिए वाहन चलाने पर प्रतिबंध लगे।
- आवश्यक सरकारी कार्यालयों को छोड़कर स्कूल-कॉलेज व निजी संस्थान में दो-तीन दिन तक वर्क फ्रॉम होम नियम अपनाया जाए।
- शहरों में जहां धूल कण उड़ते हों वहां सड़कों पर पानी का छिड़काव हो।
- स्टोन क्रेशर इकाईयां पूर्ण रूप से बंद रहें।
- खेतों में पराली, कूड़ा-कचरा जलने व औद्योगिक धुएं पर पूरी निगरानी हो और प्रतिबंधित हो।
- भवन व सड़क निर्माण कार्य बंद रखे जाएं।
- किसी भी माध्यम से पर्यावरण में प्रदूषण नहीं जाना चाहिए।
अवशेष जलाने पर लगाया 11.85 लाख रुपये जुर्माना
कृषि विभाग ने फसल अवशेष जलाने के मामले में 467 किसानों के चालान किए हैं। इन किसानों पर 11.85 लाख रुपये जुर्माना किया है। इसके अलावा 82 किसानों के खिलाफ मामले दर्ज करवाए गए हैं। कृषि क्षेत्र में जांच करने पर 678 स्थानों पर आगजनी की घटनाओं की पुष्टि हुई है। धान कटाई के सीजन में इस बार अब तक सेटेलाइट के जरिए जिले में आगजनी की कुल 912 सूचनाएं प्राप्त हुईं। अन्य माध्यम से भी 12 सूचनाएं अलग से मिलीं। जांच करने पर 99 जगहों पर आगजनी नहीं पाई गई। कुल 743 स्थानों पर आगजनी पाई गई। इनमें गैर कृषि क्षेत्र में आगजनी के 83 मामले भी हैं। सेटेलाइट से प्राप्त सूचनाओं में से कृषि विभाग 161 मामलों में फिलहाल जांच कर रहा है।
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करनाल। शहर में प्रदूषण का गुबार अभी पूरी तरह छंटा नहीं है। सोमवार को जहां एक्यूआई में कुछ कमी आई लेकिन प्रदूषण के गुबार की निम्न दबाव के क्षेत्र में गतिशीलता बनी हुई है। जिस कारण इसका ज्यादा प्रभाव झज्जर, रोहतक व दिल्ली की तरफ नजर आ रहा है।
प्राचार्य एवं पर्यावरणविद् डॉ. राकेश भारद्वाज ने बताया कि जिस दिशा में निमभन दबाव बन जाता है उसी दिशा में इसका असर होता है। अभी इससे निजात नहीं मिली है। यह अलग-अलग क्षेत्र में अपना दुष्प्रभाव दिखाएगा। जब तक तेज हवा नहीं चलती या बारिश नहीं होती तब तक इससे निजात नहीं मिलेगी।
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सोमवार शाम वायु गुणवत्ता सूचकांक पीएम 2.5 का स्तर औसतन 219, न्यूनतम 98 व अधिकतम 303 आंका गया। पीएम 10 का स्तर औसतन 173, न्यूनतम 88 व अधिकतम 425 आंका गया। डॉ. भारद्वाज ने मौजूदा स्थिति से निपटने के लिए उपाय सुझाए हैं।
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इन उपायों से हो सकता है नियंत्रण
- प्रभावित क्षेत्र में कुछ समय के लिए वाहन चलाने पर प्रतिबंध लगे।
- आवश्यक सरकारी कार्यालयों को छोड़कर स्कूल-कॉलेज व निजी संस्थान में दो-तीन दिन तक वर्क फ्रॉम होम नियम अपनाया जाए।
- शहरों में जहां धूल कण उड़ते हों वहां सड़कों पर पानी का छिड़काव हो।
- स्टोन क्रेशर इकाईयां पूर्ण रूप से बंद रहें।
- खेतों में पराली, कूड़ा-कचरा जलने व औद्योगिक धुएं पर पूरी निगरानी हो और प्रतिबंधित हो।
- भवन व सड़क निर्माण कार्य बंद रखे जाएं।
- किसी भी माध्यम से पर्यावरण में प्रदूषण नहीं जाना चाहिए।
अवशेष जलाने पर लगाया 11.85 लाख रुपये जुर्माना
कृषि विभाग ने फसल अवशेष जलाने के मामले में 467 किसानों के चालान किए हैं। इन किसानों पर 11.85 लाख रुपये जुर्माना किया है। इसके अलावा 82 किसानों के खिलाफ मामले दर्ज करवाए गए हैं। कृषि क्षेत्र में जांच करने पर 678 स्थानों पर आगजनी की घटनाओं की पुष्टि हुई है। धान कटाई के सीजन में इस बार अब तक सेटेलाइट के जरिए जिले में आगजनी की कुल 912 सूचनाएं प्राप्त हुईं। अन्य माध्यम से भी 12 सूचनाएं अलग से मिलीं। जांच करने पर 99 जगहों पर आगजनी नहीं पाई गई। कुल 743 स्थानों पर आगजनी पाई गई। इनमें गैर कृषि क्षेत्र में आगजनी के 83 मामले भी हैं। सेटेलाइट से प्राप्त सूचनाओं में से कृषि विभाग 161 मामलों में फिलहाल जांच कर रहा है।