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सेना दिवस विशेष : सैनिक स्कूल कुंजपुरा ने तीनों सेनाओं में दिए एक हजार सैन्य अधिकारी
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105....पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा। संवाद
गगन तलवार
करनाल। जिन सेनाओं के बल पर देश के नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर पाते हैं, उन सेनाओं को मजबूती प्रदान करने में करनाल के सैनिक स्कूल कुंजपुरा का भी अहम योगदान है। तीनों सेनाओं में यहां के स्कूल ने अब तक करीब एक हजार सैन्य अधिकारी दिए हैं, जिनके नेतृत्व में भारतीय सेना के जवानों ने रणभूमि में दुश्मनों के छक्के छुड़ाए और बहादुरी की मिसाल पेश की।
देश के पहले पांच सैनिक स्कूलों (सन-1961) में कुंजपुरा का स्कूल भी शामिल है, जहां के विद्यार्थी तीनों सेनाओं में लेफ्टिनेंट, सब लेफ्टिनेंट और फ्लाइंग अफसर से लेकर आर्मी में जनरल, नेवी में एडमिरल और एयर फोर्स में एयर मार्शल तक पहुंचे चुके हैं। इनमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर, सदन दक्षिण कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जेएस नैन, एयर मार्शल आरके धीर का नाम उल्लेखनीय है। इनके नेतृत्व में देश के जवानों ने जहां सरहद पर भारत को मजबूती प्रदान की, वहीं दुश्मन की नापाक हरकतों का मुंह तोड़ जवाब दिया। इसके अलावा देश को कई आईएएस, आईपीएस, न्यायाधीश भी सैनिक स्कूल ने दिए हैं। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी यहां के पूर्व छात्र हैं। उनके नाम पर स्कूल का प्रशासनिक ब्लॉक भी है। ब्यूरो
उल्लेखनीय कार्य पर नौ बार मिली रक्षामंत्री ट्राफी
सैनिक स्कूल कुंजपुरा की स्थापना भारत के तत्कालीन रक्षामंत्री (दिवंगत) वीके कृष्ण मेनन ने 24 जुलाई 1961 को की थी। स्कूल के प्रिंसिपल कर्नल विजय राणा ने बताया कि नौ बार स्कूल को देश में शिक्षा व सेना के लिए उल्लेखनीय कार्य करने पर रक्षामंत्री ट्राफी मिल चुकी है। सबसे पहले स्कूल खुलने के पांच साल बाद 1966 में ट्रॉफी मिली थी। इसके बाद 1969, 1970, 1971, 1990, 1995, 2000, 2014 और 2016 में इस विशेष पुरस्कार से नवाजा गया।
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फ्रांस से राफेल लाने वाले विंग कमांडर मनीष भी पूर्व छात्र
29 जुलाई 2020 को पांच लड़ाकू राफेल विमानों की पहली खेप फ्रांस से भारत लाने वालों में वायुसेना के जांबाज विंग कमांडर मनीष कुमार भी शामिल रहे। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रहने वाले विंग कमांडर मनीष कुमार कुंजपुरा स्कूल के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने 1993 में दाखिला लिया था और वर्ष 2000 में पास आउट हुए। जगुआर के पायलट होने के अलावा फाइटर स्ट्राइक लीडर की उपलब्धि भी उनके नाम है। इस काबिलियत को देखते हुए ही उन्हें राफेल की कमान सौंपी गई थी।
पहले बैच के छात्र थे जनरल दीपक कपूर
पूर्व थलसेना अध्यक्ष जनरल दीपक कपूर ने कुंजपुरा स्कूल के पहले साल 1961 में 9वीं कक्षा में दाखिला लिया था। इसके अलावा लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र सिंह, अरुण कुमार नंदा, डॉ. डीडीएस संधू, आरके लूंबा, केजेएस ओबरॉय, राजीव भल्ला, आरके आहुजा, एसके पटयाल, आरआर गोस्वामी, आरके हुड्डा, पीएस भल्ला, वीके नरुला, वाइस एडमिरल एचएस मल्ही, सीनियर आईपीएस अफसर एसएस देसवाल, ओलंपियन कर्नल संत कुमार व एड गुरु प्रहलाद कक्कड़ भी कुंजपुरा स्कूल के पूर्व छात्र हैं।
सेना के विमान जो स्कूल के लिए बने मॉडल
लड़ाकू विमान अजीत : 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध में पराक्रमी विमान अजीत का विशेष योगदान रहा। इसका वायु सेना में 1958 से 1991 तक कार्यकाल रहा। इसके बाद से इसे कुंजपुरा स्कूल में ही मॉडल के तौर पर खड़ा किया गया है। इसके एकमात्र शूरवीर पायलट फ्लाइंग अफसर निर्मल जती सिंह को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था, जिन्होंने 1971 में भारत-पाक युद्ध में भी हिस्सा लिया था।
- भारतीय टैंक विजयंता : इसे 1966 में थल सेना में शामिल किया गया। कई युद्धों में इस टैंक के बल पर सेना ने पराक्रम दिखाया।
- मिग 23 बीएन : विजय एयरक्राफ्ट 1979 से 2009 तक सेवा में रहा। 30 जनवरी 2010 से ये स्कूल में मॉडल के रूप में स्थापित है।
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करनाल। जिन सेनाओं के बल पर देश के नागरिक स्वयं को सुरक्षित महसूस कर पाते हैं, उन सेनाओं को मजबूती प्रदान करने में करनाल के सैनिक स्कूल कुंजपुरा का भी अहम योगदान है। तीनों सेनाओं में यहां के स्कूल ने अब तक करीब एक हजार सैन्य अधिकारी दिए हैं, जिनके नेतृत्व में भारतीय सेना के जवानों ने रणभूमि में दुश्मनों के छक्के छुड़ाए और बहादुरी की मिसाल पेश की।
देश के पहले पांच सैनिक स्कूलों (सन-1961) में कुंजपुरा का स्कूल भी शामिल है, जहां के विद्यार्थी तीनों सेनाओं में लेफ्टिनेंट, सब लेफ्टिनेंट और फ्लाइंग अफसर से लेकर आर्मी में जनरल, नेवी में एडमिरल और एयर फोर्स में एयर मार्शल तक पहुंचे चुके हैं। इनमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर, सदन दक्षिण कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल जेएस नैन, एयर मार्शल आरके धीर का नाम उल्लेखनीय है। इनके नेतृत्व में देश के जवानों ने जहां सरहद पर भारत को मजबूती प्रदान की, वहीं दुश्मन की नापाक हरकतों का मुंह तोड़ जवाब दिया। इसके अलावा देश को कई आईएएस, आईपीएस, न्यायाधीश भी सैनिक स्कूल ने दिए हैं। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा भी यहां के पूर्व छात्र हैं। उनके नाम पर स्कूल का प्रशासनिक ब्लॉक भी है। ब्यूरो
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उल्लेखनीय कार्य पर नौ बार मिली रक्षामंत्री ट्राफी
सैनिक स्कूल कुंजपुरा की स्थापना भारत के तत्कालीन रक्षामंत्री (दिवंगत) वीके कृष्ण मेनन ने 24 जुलाई 1961 को की थी। स्कूल के प्रिंसिपल कर्नल विजय राणा ने बताया कि नौ बार स्कूल को देश में शिक्षा व सेना के लिए उल्लेखनीय कार्य करने पर रक्षामंत्री ट्राफी मिल चुकी है। सबसे पहले स्कूल खुलने के पांच साल बाद 1966 में ट्रॉफी मिली थी। इसके बाद 1969, 1970, 1971, 1990, 1995, 2000, 2014 और 2016 में इस विशेष पुरस्कार से नवाजा गया।
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फ्रांस से राफेल लाने वाले विंग कमांडर मनीष भी पूर्व छात्र
29 जुलाई 2020 को पांच लड़ाकू राफेल विमानों की पहली खेप फ्रांस से भारत लाने वालों में वायुसेना के जांबाज विंग कमांडर मनीष कुमार भी शामिल रहे। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रहने वाले विंग कमांडर मनीष कुमार कुंजपुरा स्कूल के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने 1993 में दाखिला लिया था और वर्ष 2000 में पास आउट हुए। जगुआर के पायलट होने के अलावा फाइटर स्ट्राइक लीडर की उपलब्धि भी उनके नाम है। इस काबिलियत को देखते हुए ही उन्हें राफेल की कमान सौंपी गई थी।
पहले बैच के छात्र थे जनरल दीपक कपूर
पूर्व थलसेना अध्यक्ष जनरल दीपक कपूर ने कुंजपुरा स्कूल के पहले साल 1961 में 9वीं कक्षा में दाखिला लिया था। इसके अलावा लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र सिंह, अरुण कुमार नंदा, डॉ. डीडीएस संधू, आरके लूंबा, केजेएस ओबरॉय, राजीव भल्ला, आरके आहुजा, एसके पटयाल, आरआर गोस्वामी, आरके हुड्डा, पीएस भल्ला, वीके नरुला, वाइस एडमिरल एचएस मल्ही, सीनियर आईपीएस अफसर एसएस देसवाल, ओलंपियन कर्नल संत कुमार व एड गुरु प्रहलाद कक्कड़ भी कुंजपुरा स्कूल के पूर्व छात्र हैं।
सेना के विमान जो स्कूल के लिए बने मॉडल
लड़ाकू विमान अजीत : 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध में पराक्रमी विमान अजीत का विशेष योगदान रहा। इसका वायु सेना में 1958 से 1991 तक कार्यकाल रहा। इसके बाद से इसे कुंजपुरा स्कूल में ही मॉडल के तौर पर खड़ा किया गया है। इसके एकमात्र शूरवीर पायलट फ्लाइंग अफसर निर्मल जती सिंह को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था, जिन्होंने 1971 में भारत-पाक युद्ध में भी हिस्सा लिया था।
- भारतीय टैंक विजयंता : इसे 1966 में थल सेना में शामिल किया गया। कई युद्धों में इस टैंक के बल पर सेना ने पराक्रम दिखाया।
- मिग 23 बीएन : विजय एयरक्राफ्ट 1979 से 2009 तक सेवा में रहा। 30 जनवरी 2010 से ये स्कूल में मॉडल के रूप में स्थापित है।

104..... पूर्व थल सेना अध्यक्ष जनरल दीपक कपूर। संवाद

103....कर्नल विजय राणा, प्रिंसिपल, सैनिक स्कूल। संवाद