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भगवान का हर समय करें धन्यवाद : आचार्य दिनेश
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- फूसगढ़ में शिव महापुराण कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
इंद्री। फूसगढ़ में चल रही शिव महापुराण कथा के सातवें दिन आचार्य दिनेश शरण महाराज ने बताया कि शिव उमा संहिता सूत ने शौनक आदि मुनियों को सुनाई थी। तब सभी मुनियों ने सूत जी का धन्यवाद किया था। हमें हर समय उठते-बैठते, चलते-फिरते संसार का हर कर्म करते हुए परमपिता परमात्मा का शुक्राना करना चाहिए। महादेव की कृपा प्राप्ति का यह एक सरल साधन है।
कथा में बताया गया कि यहां तक कि मनुष्य का चोला जो देवी देवताओं के लिए भी दुर्लभ है और फिर भारत जैसे महान देश में जिसमें सभी वर्णों व धर्मों के लोग रहते हैं जहां गंगा-यमुना जैसी हजारों पवित्र नदियां कलकल करती बहती जा रही है, जो मनुष्यों के सभी पापों को नष्ट करने वाली हैं। इन नदियों के दर्शन मात्र से मन आनंदित हो जाता है। यहां तक ऐसा हमारा देश जहां पहाड़ों, वृक्षों को भी पूजा जाता है। जहां स्त्रियों व मेहमानों को पूजा जाता है। ऐसे दिव्य भारत देश में हमारा जन्म हुआ।
उस परमपिता परमात्मा का शुक्राना और फिर भारत देश में भी हरियाणा जहां भगवान का आना हुआ। वह हरियाणा जहां महाभारत जैसा युद्ध हुआ और भगवान ने अर्जुन को निमित्त बनाकर हमें दिव्य गीता ज्ञान का कुरुक्षेत्र में ज्योतिसर में उपदेश दिया।
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इंद्री। फूसगढ़ में चल रही शिव महापुराण कथा के सातवें दिन आचार्य दिनेश शरण महाराज ने बताया कि शिव उमा संहिता सूत ने शौनक आदि मुनियों को सुनाई थी। तब सभी मुनियों ने सूत जी का धन्यवाद किया था। हमें हर समय उठते-बैठते, चलते-फिरते संसार का हर कर्म करते हुए परमपिता परमात्मा का शुक्राना करना चाहिए। महादेव की कृपा प्राप्ति का यह एक सरल साधन है।
कथा में बताया गया कि यहां तक कि मनुष्य का चोला जो देवी देवताओं के लिए भी दुर्लभ है और फिर भारत जैसे महान देश में जिसमें सभी वर्णों व धर्मों के लोग रहते हैं जहां गंगा-यमुना जैसी हजारों पवित्र नदियां कलकल करती बहती जा रही है, जो मनुष्यों के सभी पापों को नष्ट करने वाली हैं। इन नदियों के दर्शन मात्र से मन आनंदित हो जाता है। यहां तक ऐसा हमारा देश जहां पहाड़ों, वृक्षों को भी पूजा जाता है। जहां स्त्रियों व मेहमानों को पूजा जाता है। ऐसे दिव्य भारत देश में हमारा जन्म हुआ।
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उस परमपिता परमात्मा का शुक्राना और फिर भारत देश में भी हरियाणा जहां भगवान का आना हुआ। वह हरियाणा जहां महाभारत जैसा युद्ध हुआ और भगवान ने अर्जुन को निमित्त बनाकर हमें दिव्य गीता ज्ञान का कुरुक्षेत्र में ज्योतिसर में उपदेश दिया।
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