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America Donkey Route: तस्वीरों से दिखाया कठिनाइयों का मंजर; डिपोर्ट हुआ करनाल का आकाश बोला- सपना अधूरा रह गया

Thu, 06 Feb 2025 02:49 PM IST
नवीन दलाल माई सिटी रिपोर्टर, करनाल (हरियाणा)
माई सिटी रिपोर्टर, करनाल (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Thu, 06 Feb 2025 02:49 PM IST
सार

घरौंडा का ही अरुण भी अमेरिका जाने के लिए 14 महीने पहले निकला था। उसके परिवार ने इस यात्रा के लिए 45 लाख रुपये खर्च किए थे। अरुण के भाई गौरव ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए डॉलर कमाने के लिए अरुण ने यह जोखिम भरा सफर चुना।

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America Donkey Route, Pictures show difficulties; Akash from Karnal deported said- dream remained unfulfilled
जंगलों की तस्वीरें - फोटो : संवाद

विस्तार

अमेरिका जाने के सपने को साकार करने के लिए डंकी रूट अपनाने वाले हरियाणा के कई युवा अब स्वदेश लौट चुके हैं। लेकिन वे लोगों के सामने आने से भी कतरा रहे हैं। करनाल जिले के घरौंडा क्षेत्र के गांव कालरों निवासी 20 वर्षीय आकाश भी उनमें से एक हैं।

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आकाश ने अमेरिका पहुंचने के दौरान पनामा के घने जंगलों की तस्वीरें अपने परिवार को भेजी थीं, जिसमें रास्ते की कठिनाइयों को साफ देखा जा सकता था। इन तस्वीरों में लोग जंगल में टेंट लगाकर रह रहे थे और बारिश से बचने के लिए प्लास्टिक की चादरों का सहारा ले रहे थे। आकाश ने 26 जनवरी को अमेरिका की धरती पर कदम रखा, लेकिन कुछ ही दिनों में वहां की पुलिस ने उसे पकड़ लिया और डिपोर्ट कर दिया।
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परिवार ने बेची थी जमीन, फिर भी सपना अधूरा रह गया
आकाश के भाई शुभम ने बताया कि अमेरिका जाने के लिए परिवार ने अपनी ढाई एकड़ जमीन बेचकर 65 लाख रुपये एजेंट को दिए थे। आकाश ने मुंबई से अपनी यात्रा शुरू की और अलग-अलग देशों के रास्ते अमेरिका तक पहुंचा। इस दौरान कई बार उसे गाड़ियों में छिपाकर ले जाया गया, तो कई बार पैदल ही जंगलों में चलना पड़ा। मैक्सिको के पास एक नदी पार करते समय उसके सारे कपड़े बह गए, जिसके बाद परिवार ने उसे पैसे भेजे थे। लेकिन जब वह अमेरिका पहुंचा, तो उसे पुलिस ने पकड़ लिया और वापस भेज दिया।
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गांव लौटने में शर्म महसूस कर रहे प्रवासी युवा
गांव के लोग अब आकाश और अन्य युवाओं से तरह-तरह के सवाल पूछ रहे हैं, जिससे वे असहज महसूस कर रहे हैं। परिवार भी चाहकर तुरंत उन्हें घर बुलाने से बच रहा है, क्योंकि समाज में उनकी यात्रा और असफलता को लेकर चर्चा हो रही है।

एक और युवा की मेहनत हुई बेकार
घरौंडा का ही अरुण भी अमेरिका जाने के लिए 14 महीने पहले निकला था। उसके परिवार ने इस यात्रा के लिए 45 लाख रुपये खर्च किए थे। अरुण के भाई गौरव ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए डॉलर कमाने के लिए अरुण ने यह जोखिम भरा सफर चुना।

डंकी रूट से जाने वाले कई परिवारों की हालत खराब
इसी ग्रुप में करनाल के हैबतपुर गांव का एक परिवार भी शामिल था, जिसमें माता-पिता अपने बेटे और बेटी के साथ अमेरिका जा रहे थे। किसी ने अपनी जमीन बेच दी, तो किसी ने घर गिरवी रख दिया। कई लोगों ने भारी कर्ज लेकर यह खतरनाक सफर किया, लेकिन अमेरिका पहुंचने के बाद उन्हें डिपोर्ट कर दिया गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो गई है।


दीवार कूदकर अमेरिका पहुंचे हरकेश को भी किया गया डिपोर्ट
खंड मूनक के गांव जानी निवासी हरकेश करीब पांच साल पहले एजेंट के जरिए अमेरिका के लिए निकला था। वह छोटे देशों से होते हुए हाल ही में अमेरिका पहुंचा, लेकिन दीवार कूदकर दाखिल होते ही पुलिस ने उसे पकड़ लिया और वापस भेज दिया।

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