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Agriculture: बासमती की किस्मों के निर्यात पर मार, किसानों को नुकसान, निर्यातक भी निराश
Tue, 27 Aug 2024 10:36 PM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, करनाल (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, करनाल (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Tue, 27 Aug 2024 10:36 PM IST
सार
बासमती की किस्म 1509 और पूसा-1 का धान घाटे का सौदा साबित हो रहा है। एफओबी अधिक होने के कारण समस्या बढ़ी है। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल को चिट्ठी लिखी है।
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करनाल मंडी में आया 1509 किस्म का धान।
- फोटो : संवाद
विस्तार
हरियाणा में इस बार बासमती की किस्म 1509 और पूसा-1 का धान घाटे का सौदा साबित हो रहा है। किसानों को तो प्रति क्विंटल करीब 800 से 1200 रुपये तक का नुकसान हो ही रहा है। चावल निर्यातक भी निराश हैं, क्योंकि बासमती चावल पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमईपी) लागू होने और उसका रेट 950 अमेरिकी डॉलर प्रति मीट्रिक टन (एफओबी) होने के कारण इन किस्मों का अपेक्षित निर्यात नहीं हो पा रहा है। इस पर हरियाणा राइस एक्सपोर्ट एसोसिएशन ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल को पत्र लिखकर एमईपी को हटाने या घटाने की मांग की है।
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पिछले साल हरियाणा ही नहीं देशभर के चावल निर्यातकों ने कई दिन हड़ताल की थी, तब जाकर केंद्र सरकार ने एफओबी को घटाकर 950 रुपये कर दिया था। इसके बाद निर्यात शुरू हो गया था। अब इस साल इसका प्रभाव दिखने लगा है।
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1509 किस्म का धान तो पिछले महीने से ही आ रहा है लेकिन अब इसी किस्म का नया धान आना भी शुरू हो गया है लेकिन मंडियों में इसका किसानों को 2200- से 2600 रुपये प्रति क्विंटल ही मिल रहा है, जबकि पिछले वर्ष इसी धान का भाव 3200-3800 प्रति क्विंटल था।
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यानी धान के भाव में लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक की गिरावट दिख रही है। जिसका सीधा नुकसान फिलहाल किसानों को ही उठाना पड़ रहा है। निर्यात अपेक्षित नहीं हो पाने के कारण निर्यातक भी परेशान हैं। 1509 व पूसा-1 किस्म के धान के भाव में गिरावट के पीछे चावल उद्योग के जानकार अधिक एफओबी को ही मान रहे हैं।
चावल निर्यातक और मिल मालिक इस धान को खरीदने से हाथ खींच रहे हैं, क्योंकि उनके अनुसार इस धान से बना चावल उच्च एमईपी के कारण निर्यात नहीं किया जा सकता है। इससे किसानों के साथ-साथ निर्यातक और चावल कारोबारी भी चिंतित हैं।
एफओबी से पाकिस्तान का बढ़ रहा निर्यात : सुशील जैन
हरियाणा राइस एक्सपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान सुशील जैन की ओर से केंद्रीय मंत्री और करनाल के सांसद मनोहर लाल को पत्र लिखा है, जिसमें एफओबी को हटाने या घटाने की मांग की गई है। उनका कहना है कि पाकिस्तान में एफओबी 700 अमेरिकी डालर प्रति मीट्रिक टन है और भारत में 950। इस कारण भारत के मुकाबले पाकिस्तान का चावल निर्यात बढ़ने लगा है। देश के किसानों को भी 1509 व पूसा-1 आदि किस्मों का उचित भाव नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने पत्र में कहा है कि इस बात पर विचार किया जाना चाहिए कि निर्यात बाजार, अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ संबंध और विदेशों में बासमती चावल के लिए प्रतिष्ठा/सद्भावना जो हमारे चावल उद्योग ने कई वर्षों में विकसित की थी, वह सब खो जाएगी। एमईपी को हटाया या कम नहीं किया गया। भारत में भी एफओबी को हटा दिया जाए, यदि आवश्यक है तो 700 या 750 किया जाए। एमईपी को भी खत्म किया जाना चाहिए, इसे पिछले साल ही लगाया गया है, ये पहले कभी नहीं थी। यदि ऐसा होता है तो विदेशी मुद्रा आय भी बढ़ेगी। देश के किसानों को भी अच्छे भाव मिल सकेंगे।