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हालात याद कर डरता है दिल, चिप्स, बिस्कुट और पानी के सहारे कटे कई दिन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 04 Mar 2022 02:19 AM IST
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Afraid to remember the situation, many days cut with the help of heart, chips, biscuits and water
माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। यूक्रेन में युद्ध के दौरान वहां बिताए पलों को याद करके विद्यार्थी अब भी सिहर उठते हैं। ये हालात उन विद्यार्थियों के हैं, जो सकुशल अपने घर लौट आए हैं। उनका कहना है कि वहां की तस्वीर काफी डरावनी थी। परिवार को भी हम अपने हालात बता नहीं सकते थे। अमर उजाला से बातचीत में विद्यार्थियों ने बताया कि उनके कई दिन संकट में गुजरे। उन्हें खाना भी नहीं मिला। पानी, चिप्स और बिस्कुट के सहारे ही उन्होंने दिन और रात गुजारे। उनका आरोप है कि न उनकी यूनिवर्सिटी ने साथ दिया और न ही एंबेसी ने। जब युद्ध की स्थिति बन रही थी तो भी 23 फरवरी तक उन्हें यही कहा गया कि कुछ नहीं होगा। 23 फरवरी तक उनकी कक्षाएं भी चल रही थी। उन्होंने मांग की है कि सरकार उन बच्चों को भी जल्द वापस लाए जो वहां फंसे हैं।
उपायुक्त अनीश यादव ने बताया कि यूक्रेन में जिले के 138 भारतीय छात्रों में से 75 छात्र स्वदेश लौट आए हैं, 39 बच्चे नजदीक के देशों में सुरक्षित स्थानों पर पहुंच चुके हैं। दो बच्चे रास्ते में हैं। अब केवल 11 बच्चे यूक्रेन में शेष हैं, उनसे भी संपर्क जारी है। उन्होंने कहा कि छात्रों की स्वदेश वापसी के लिए सरकार व प्रशासन पूरी तरह से सजग है, छात्रों को जल्द ही स्वदेश वापस लाया जाएगा।
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खुद लिया वापस आने का निर्णय, कई किलोमीटर चली पैदल
निगदू की सुरक्षा ने बताया कि वे यूक्रेन में खारकीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस चौथे वर्ष की पढ़ाई कर रही है। जब कहीं से मदद नहीं मिली तो एक मार्च को अपने स्तर पर घर आने का निर्णय लिया। टैक्सी बुक करके वे लविव शहर पहुंची। यहां से रेल से वे 24 घंटे का सफर तय करके पोलैंड बार्डर के नजदीक आईं। यहां यूक्रेेेेनी सेना के जवान ने उनकी मदद की और दस्तावेजों की जांच के बाद कई किलोमीटर पैदल चलकर उन्होंने बार्डर पार किया। दो मार्च को जब पोलैंड पहुंची तो आते ही दो घंटे बाद जाने वाली फ्लाइट में ही उनका नाम आ गया और वे अब घर पहुंची है।
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खाना तो दूर नहा भी नहीं पाए, धमाकों ने डरा दिया
सुरक्षा ने बताया कि 24 से 28 फरवरी तक अपार्टमेंट के बेसमेंट में रहे। उनके साथ पंजाब के 40 बच्चे थे। खाने के लिए केवल चिप्स और बिस्कुट ही थे। नहाने की व्यवस्था तीसरी मंजिल पर थी लेकिन वे बाहर जाते थे तो धमाकों की आवाज सुनाई पड़ती थी। ऐसे में वे नहा भी नहीं पाए। परिवार भी चिंता में था। पिता सुशील ने बताया कि घर पहुंचने के बाद भी बेटी सहमी है। हालांकि परिवार की चिंता जरूर कम हुई है। उन्होंने पोलैंड बार्डर से बेटी को वापस लाने के लिए सरकार का धन्यवाद किया।

तीन देशों से होता हुआ भारत पहुंचा सौरभ, मोलदोवा में मिली मदद
सेक्टर-6 निवासी सौरभ ने बताया कि वह तीन देशों से होते हुए अपने वतन लौटा है। उन्होंने बताया कि बमबारी में बने मौत के मंजर को देख सभी छात्र घबरा गए। ऐसे में सौरभ ने समझदारी का परिचय देते हुए वहां से निकलने का रास्ता खोजा। ज्यादा किराया देते हुए यूक्रेन से मोलदोवा देश में पहुंचे और वहां से आगे रोमानिया पहुंच गए। रोमानिया से भारत सरकार की व्यवस्था का लाभ उठाते हुए अपने देश पहुंचे हैं। सौरभ ने बताया कि साउथ रिजन के ओडेसा में पढ़ाई कर रहा था। वहां पर तीसरे साल का मेडिकल छात्र रहा। 24 फरवरी के बाद अचानक उनके दोस्त के साथ वहां से निकलने की ठानी। उन्होंने बताया कि मोलदोवा के आम लोगों ने बॉर्डर पर काफी मदद की। टैक्सी का किराया भी नहीं लिया। वहीं के लोगों ने रोमानिया के लिए बस की व्यवस्था की।
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