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संशोधित कॉपी -अकाउंटेंट सस्पेंड

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 05 Jul 2022 02:09 AM IST
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accountant suspended
यमुनानगर। बिजली निगम में 49 करोड़ 28 लाख के फर्जी वाउचर के मामले में बिजली निगम ने सोमवार को अकाउंटेंट शैफाली को भी सस्पेंड कर दिया गया। बिजली निगम के एमडी डॉ. साकेत कुमार सोमवार को जिले में आए हुए थे। वह कई घंटे तक बिजली निगम के एसई कार्यालय में रहे। हालांकि एमडी के जाने के कुछ देर बाद ही एसई राजेंद्र कुमार की ट्रांसफर के भी आदेश जारी हो गए। एमडी के दौरे के बाद एसई का तबादला चर्चा का विषय बना रहा।
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एसई राजेंद्र कुमार को पंचकूला में लगाया गया है। उनकी जगह करनाल के एसई यशवीर सिंह को यमुनानगर ट्रांसफर किया गया है। हालांकि बिजली निगम में जो करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है वह एसई राजेंद्र कुमार के कार्यभार संभालने से पहले का है। इस संबंध में राजेंद्र कुमार का कहना है कि फर्जी वाउचर मामले में शैफाली को सस्पेंड किया गया है। यमुनानगर डिवीजन के अन्य अकाउंटेंट बलबीर पर की गई कार्रवाई की जानकारी उन्हें नहीं है। बताया कि सर्कल में निगम के एसडीओ की ट्रांसफर होनी है। इसी मामले में एसडीओ की परफार्मेंस जांचने के लिए बिजली निगम के एमडी साकेत कुमार कार्यालय में आए थे। अपने तबादले पर उन्होंने कहा कि ट्रांसफर एक रूटीन प्रक्रिया है। मुख्यालय के आदेशानुसार ट्रांसफर होते रहते हैं।
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बाक्स
ट्रालियों में फर्जीवाड़े ने उड़ाई कइयों की नींद
बिजली निगम के एक के बाद एक नए फर्जीवाड़े सामने आ रहे हैं। दरअसल किसी एरिया में लगा ट्रांसफार्मर खराब हो जाता है तो वहां पर मोबाइल ट्रॉली ट्रांसफार्मर लगाया जाता है। इस ट्राली को किसी भी वाहन के पीछे बांध कर कहीं भी ले जाया जा सकता है। अब ट्रांसफार्मर ले जाने के लिए खरीदी गई मोबाइल ट्रालियों की खरीद में भी हेराफेरी का मामला उजागर हुआ है। सूत्रों की माने तो निगम ने कुछ माह पहले ही 25 से 30 मोबाइल ट्रालियां खरीदी हैं। यमुनानगर डिवीजन में जो ट्रालियां खरीदी गई हैं उनके रेट में जगाधरी डिवीजन में आई ट्रालियों की कीमत से कहीं ज्यादा अंतर है। माना जा रहा है कि एक ट्राली में 20 से 25 हजार रुपये का अंतर है। इसी मामले की जांच के लिए एक सप्ताह पहले सीएम फ्लाइंग की टीम भी एसई कार्यालय में आई थी। टीम ने एसई से ट्रालियों की खरीद से संबंधित रिकार्ड मांगा था। ऐसे में अब जिलेभर में खरीदी गई मोबाइल ट्रालियों की जांच संदेह के घेरे में आ गई है। माना जा रहा है कि एमडी डॉ. साकेत कुमार इसी मामले की जांच के लिए एसई कार्यालय में आए थे।
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