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Karnal News: मिलों में अटका नौ हजार ट्रक चावल, नए धान सीजन से पहले मालिक परेशान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2026 01:17 AM IST
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9,000 trucks of rice stranded at mills; owners worried ahead of new paddy season.
गोदाम में खराब हो रहा है धान। प्रवक्ता एसोसिएशन
करनाल। जिले के राइस मिलर्स की कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) डिलीवरी का संकट गहराता जा रहा है। जिला करनाल राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन का दावा है कि जिले में करीब 9,000 ट्रकों के बराबर चावल की डिलीवरी लंबित है। समय सीमा बढ़ाए जाने के बावजूद एफसीआई की ओर से पर्याप्त मात्रा में चावल स्वीकार नहीं किया जा रहा। मिल मालिक का कहना है कि गोदामों में जगह की कमी, स्टैक बुकिंग बंद होने और प्रशासनिक देरी से उनके सामने नए धान को रखने का संकट खड़ा हो गया है।
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चावल मिलों के मालिकों का प्रतिनिधिमंडल बुधवार को उपायुक्त से मिला। एसोसिएशन के प्रधान राजेश गुप्ता, उप प्रधान राजेंद्र मोंगा, नरेश बंसल, विजय, सचिव राकेश प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे। प्रधान राजेश गुप्ता ने बताया कि नया धान सीजन सिर पर है और मंडियों में जल्द ही नई फसल पहुंचने वाली है। अगर पुराने सीएमआर और स्टॉक की निकासी नहीं हुई तो मिलों में नया धान रखने और सुखाने तक की जगह नहीं बचेगी। इसका सीधा असर धान की खरीद और किसानों की फसल पर पड़ने की आशंका है।
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उन्होंने उपायुक्त से मांग की है कि 2014 की तर्ज पर सीएमआर डिलीवरी सीमा को 30 सितंबर के आगे बढ़ाते हुए नए सीजन तक विस्तारित किया जाए। मिलर्स ने सीएमआर में अनिवार्य फॉर्टिफाइड राइस की व्यवस्था में देरी को भी मिलर्स ने बड़ी बाधा बताया। हरियाणा में सीएमआर डिलीवरी का बड़ा बैकलॉग बताया जा रहा है। जुलाई की शुरुआत में राज्यभर में करीब 6.94 लाख मीट्रिक टन सीएमआर लंबित बताया गया था। इसमें करनाल सबसे आगे था। करनाल में करीब 2.54 लाख मीट्रिक टन चावल की डिलीवरी बाकी है।
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शुरुआत से ही दिक्कतें
एसोसिएशन के प्रधान के अनुसार, सीएमआर डिलीवरी का काम 15 नवंबर 2025 से शुरू होना था लेकिन संयुक्त भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया दिसंबर 2025 में शुरू हो सकी। इसके बाद एफसीआई का पोर्टल भी जनवरी 2026 में चालू हो पाया। मिलर्स का कहना है कि शुरुआत में उन्हें कुछ स्टैक उपलब्ध कराए गए लेकिन जल्द ही स्टैक की संख्या कम कर दी गई। इससे डिलीवरी की गति प्रभावित हुई।

डेडलाइन 30 सितंबर तक बढ़ी

सीएमआर डिलीवरी की पहले अंतिम तारीख 30 जून निर्धारित थी। सरकार ने इसे 30 सितंबर तक बढ़ा दिया है। मिलर्स का कहना है कि 30 जून से 30 जुलाई के बीच करीब एक महीने तक सीएमआर डिलीवरी स्वीकार नहीं की गई। महत्वपूर्ण समय निकल गया। एसोसिएशन का आरोप है कि एफसीआई की ओर से जिला कार्यालयों को सीएमआर डिलीवरी रोकने के निर्देश दिए गए हैं। गोदामों में जगह नहीं होने का हवाला दिया जा रहा है। मिलर्स का कहना है कि जब डिलीवरी स्वीकार ही नहीं की जाएगी तो निर्धारित समय सीमा में लंबित सीएमआर जमा करना उनके लिए संभव नहीं होगा।

गोदाम में खराब हो रहा है धान। प्रवक्ता एसोसिएशन

गोदाम में खराब हो रहा है धान। प्रवक्ता एसोसिएशन

गोदाम में खराब हो रहा है धान। प्रवक्ता एसोसिएशन

गोदाम में खराब हो रहा है धान। प्रवक्ता एसोसिएशन

गोदाम में खराब हो रहा है धान। प्रवक्ता एसोसिएशन

गोदाम में खराब हो रहा है धान। प्रवक्ता एसोसिएशन

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